सामाजिक

कानून व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता

मेरे विचार से देश में सबसे अधिक आवश्यकता कानून व्यवस्था में सुधार की है। केन्द्र हो या राज्य सरकार सबका दायित्व नागरिकों को भयमुक्त समाज उपलब्द्ध कराना होता है। विडम्बना यह है कि अधिकतर राज्यों में अपराध का ग्राफ बढ़ा है। अपराधियों की पुलिस तथा नेताओं से सांठ-गाँठ की खबरें रोज ही सुर्ख़ियों में रहती […]

गीतिका/ग़ज़ल

अभिमन्यु वध

अभिमन्यु का वध हो गया, एक बार फिर दिल्ली में, सभी विरोधी हुए इकट्ठा, एक बार फिर दिल्ली में। मुस्लिम तुष्टिकरण की बातें, इस्लामिक मुल्कों से चन्दा, देख रही थी सारी दुनिया,एक बार फिर दिल्ली में। नहीं जरुरत कोई काम की, मुफ्त में बिजली- पानी लो, झाड़ू ने समझाया सबको, एक बार फिर दिल्ली में। […]

कविता

बसंत

  बसंत आगमन ऋतु परिवर्तन, पीत पत्तों का रुदन नव स्रष्टि का सृजन| पशु पक्षियों का कलरव मानव के मन मे हलचल भोरों का बढ़ता गुंजन उपवन मे बढ़ती थिरकन| शिशिर ऋतु का हुआ अंत नई फसलों का शुरू आगमन घर घर मे उत्सव भारी बसंत आगमन की तैयारी| जीवन के प्रति करे उमंगित बसंत […]

कविता

एक मुक्तक

माना कि बुझे हुये चिरागों में, रौशनी नहीं होती, माना कि ख्वाब की जिंदगी, असली नहीं होती। मगर सच है कि अहसास दिलाती है कुछ होने का, निराश व्यक्ति के लिए, मंजिल आसां नहीं होती। डॉ अ कीर्तिवर्द्धन

कविता

एक मुक्तक

झुकी नज़रों को तेरी, इकरार समझा था , खामोश लबों को मैं, इसरार समझा था, नहीं जानता था सबब इसके पीछे क्या था, तेरे मुड़कर चले जाने को, प्यार समझा था । डॉ अ कीर्तिवर्धन 8265821800

कविता

कविता : शांति दीप जलाना होगा

आज दिलों में अपने हमको, शान्ति दीप जलाना होगा, नफ़रत का संसार मिटाकर, प्यार उजाला लाना होगा। खेल चुके हैं खेल बहुत, अलगाववाद और आरक्षण का, ज्ञानवान- विद्वान बनाकर, विकसित राष्ट्र बनाना होगा। भ्रष्टाचार के जो भी पोषक, हैं आतंकवाद के अनुयायी, देश प्रेम की अलख जगाकर, उन दुष्टों को निपटाना होगा। वेद ऋचाएँ ज्ञान […]

कविता

कविता : शान्ति दीप जलाना होगा

आज दिलों में अपने हमको, शान्ति दीप जलाना होगा, नफ़रत का संसार मिटाकर, प्यार उजाला लाना होगा। खेल चुके हैं खेल बहुत, अलगाववाद और आरक्षण का, ज्ञानवान- विद्वान बनाकर, विकसित राष्ट्र बनाना होगा। भ्रष्टाचार के जो भी पोषक, हैं आतंकवाद के अनुयायी, देश प्रेम की अलख जगाकर, उन दुष्टों को निपटाना होगा। वेद ऋचाएँ ज्ञान […]

कविता

जीवन – मृत्यु संवाद

एक दिवस—- जीवन व मृत्यु में संवाद होने लगा दोनों में कौन श्रेष्ठ ,वाद होने लगा, बात बढ़ते-बढ़ते विवाद होने लगा जीवन की हर बात का प्रतिवाद होने लगा |   अंतिम सत्य मृत्यु है, प्रचार होने लगा, विपरीत वातावरण,जीवन भी निराश होने लगा, मृत्यु के पक्ष में ही सरोबार होने लगा, हर आस छोड़कर […]

राजनीति

आतंकवाद

हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि सन्यासी बनाने की प्रक्रिया बहुत ही दुरूह है। सन्यासी बनने की लिए मनुष्य को मात्र कर्म से नहीं अपितु धर्म एवं मन से भी अपने आप को पवित्र करना पड़ता है।  सन्यासी बनने के लिए मनुष्य को सबसे पहले अपने परिवार से अलग होना पड़ता है। मोह- माया […]

कविता

कविता : मौन रहकर भी…

मौन रहकर भी मुखर जो हो रहा है, दर्द चेहरे से बयां  वो हो रहा है ।   सोचा था जिऊँगा खुशहाल होकर , तनहा जीवन आज बोझिल हो रहा है ।   उम्र गुजरी सोचा नहीं मैंने कभी कुछ , जो नहीं सोचा वही सब हो रहा है ।   साथ थे मेरे हजारों […]