कविता

शराबी होना पर मजदूर न होना

कोरोना का है कहना ! शराबी होना पर मजदूर न होना अमेरिका जाना पर भारत में न रहना खूब रोना पर कुछ न कहना भूखे रहना और बार बार हाथ धोना.. कोरोना का है कहना ! शराबी होना पर मजदूर न होना कोटा जाना पर दिल्ली न आना वरना लाठी खाना और चुप रहना न […]

कविता

होली के रंग मे डूब जाएं

आओ हम सब होली के रंग मे डूब जाएं मस्त मगन होकर जश्न मनाए तन भीग जाए मन भीग जाए कुछ ऐसे सरोबोर हो जाएं कि खुशी से सारा जग भीग जाएं हर तरफ उल्लास ही उल्लास हो हर तरफ उमंग ही उमंग हो रंगों के खेल में सब मगन हो नया जोश और एक […]

कविता

हिंदी

इंसान को इंसान से मिलाती है हिंदी गैरों के बीच अपनों का एहसास कराती है हिंदी !! एक साज़, एक उमंग है हिंदी समुन्द्र की लहरों से भी तेज, तिरंगे की शान है हिंदी !! सुरों को राग से मिलाती है हिंदी सरगम की धुनों से भी तेज, स्वरों का ताज है हिंदी !! अँधेरे […]

कविता

बिक जाता है हर बार इंसान !!

कभी सपनों की खातिर तो, कभी अपनों की खातिर कभी पेट की खातिर  तो, कभी लालच की खातिर बिक जाता है हर बार इंसान…. कभी धर्म की खातिर तो, कभी कर्म की खातिर कभी बेबसी बेच देती है तो, कभी सोहरत बिक जाता है बिक जाता है हर बार इंसान…. कभी रात के पहर में […]

कविता

गुमनाम अँधेरे का शहीद !

शहीदों की चिताओं पे न फूल होंगे न होंगे मेले, न होगा कोई बाकी निशाँ वतन पे कुर्बानी देने वाला रहेगा सूंसान ……   न कोई जश्न होगा , न होगा कोई इन्कलाब हर एक शहीद बन जायेगा एक ख़्वाब ….   न रक्त बहेगा न होगा क्रान्ति का आह्वान अब न होगा कोई सुभाष […]

बाल कविता

क्रिसमस आया क्रिसमस आया !

घर घर में खुशियाँ लाया मीठे मीठे पकवान और रंग बिरंगे तारे लाया क्रिसमस आया क्रिसमस आया गुब्बारे संग तितलियाँ लाया गीत-संगीत संग ढोल-नगाड़े लाया क्रिसमस आया क्रिसमस आया घर घर में खुशियाँ लाया रौशनी संग खूब सारा प्यार लाया नए नए खेल-खिलौने और उपहार लाया क्रिसमस आया क्रिसमस आया घर घर में खुशियाँ लाया […]

कविता

यहाँ भी रावण वहां भी रावण !!

आतंकी रावण , घुसपैठी रावण अन्दर भी रावण, बाहर भी रावण गाली भी देता, गोली भी देता रावण सेना में भी रावण, राजनीति में भी रावण सीज फायर में माहिर है रावण सर्जिकल स्ट्राईकर भी है अपना रावण बयानबाजी भी करता है रावण गोले भी दागता  है रावण कभी सरबजीत तो कभी इदरीस है रावण […]

कविता

क्या आयेगा गाँधी दोबारा !!

पूछती हैं गलियां पूछते हैं गाँव- चौबारा क्या आयेगा गाँधी दोबारा !! पूछती हैं नदियाँ पूछता है लोकतंत्र हमारा क्या आयेगा गाँधी दोबारा !! पुकारती है निर्भया पुकारता है कालाहांडी का सवेरा क्या आयेगा गाँधी दोबारा !! क्या आयेगा गाँधी दोबारा !! भ्रष्ट होते इस तंत्र में राह टके हर एक दुखियारा क्या आयेगा गाँधी दोबारा […]

कविता

भुखमरी मुस्कराती है !!!

मेरे देश में भूखे रहने की तड़प इत्र की महक से ज्यादा खुशबूदार होती है भुखमरी में बासी रोटी भी पकवान होती है …. तुम्हारे घर में रोटी फेंकी जाती है यह जानकर हैरानी होती है हमारे लिए तो रोटी भगवान् होती है… अपनी जरूरत से ज्यादा रखना अमीरों की शान होती है ….. भूख […]