बाल कविता बाल साहित्य

खुशियाँ (बाल कविता)

माँ के आँचल में हैं खुशियाँ पकते चावल में हैं खुशियाँ प्रेम लुटाती गृहलक्ष्मी की रुनझुन पायल में हैं खुशियाँ बहन रूप में आतीं खुशियाँ भाई संग मिल गातीं खुशियाँ गोद पिता की अनुपम जग में वहाँ खूब किलकातीं खुशियाँ अपने घर-आँगन में खुशियाँ कुदरत के दामन में खुशियाँ अगर ढूँढना चाहोगे तो धरती के […]

बाल कविता बाल साहित्य

समझदार गिलहरी (बाल कविता)

लकी गिलहरी लेकर आयी, बोरी भर अखरोट देख चतुर खरहे के मन में, आया थोड़ा खोट अखरोटों को पाने खातिर, सोचा एक उपाय दौड़ लकी के पास गया और बोला – सिस्टर हाय! बोरी मुझको दे दे, तेरा घर है काफी दूर छोटी सी तू, हो जाएगी थककर बिल्कुल चूर चतुर सोचता था कि बोरी […]

लघुकथा

वानप्रस्थ

गुप्ता जी लॉन में बैठे चाय पी रहे थे तभी टेबलपर एक सूखा, पीला पड़ता पत्ता आ गिरा “क्या हुआ भई? अपनी डाल को छोड़ आए” गुप्ता जी ने पूछा “वहाँ अब नये पत्तों का जमाना आ गया बंधु, किसी दिन आँधी में उनसे रगड़ खाकर टूटता इससे बेहतर खुद ही हट गया” रिटायरमेंट के […]

लघुकथा

पाप

“अरे मुझे तो कल बिट्टू ने दिखाया कि देखो माँ होनेवाली भाभी की कॉलेज ट्रिप की फोटो फेसबुकपर, उसमें देखा मैंने किसी लड़के के साथ नाच रही थी, ना बाबा मुझे नहीं मंजूर” “ओह्हो जीजी, अब ७० के मॉडल की लड़की तो मिलने से रही” “जो भी हो, जाने क्या-क्या पाप करती होगी पीठ पीछे, […]

बाल कहानी

मक्कू को सबक

शरारती और चटोरा मक्कू चूहा इधर-उधर खाने की तलाश में फिर रहा था। उसे मिर्च-मसालेदार और दूध से बनी चीजें बहुत पसंद आती थीं। तभी पनीर की लुभावनी गंध उसकी नाक में घुसी और वह उसको खोजने के लिए बेचैन हो उठा। एक कमरे से दूसरे कमरे में घूमते-फिरते अंततः उसको वो डिब्बा दिख ही […]

बाल कविता

होता उल्टे काम का, गलत सदा परिणाम

मटकू गदहा आलसी, सोता था दिन-रात। समझाते सब ही उसे, नहीं समझता बात॥ मिलता कोई काम तो, छुप जाता झट भाग। खाता सबके खेत से, चुरा-चुरा कर साग॥ बीवी लाती थी कमा, पड़ा उड़ाता मौज। बैठाये रखता सदा, लफंदरों की फौज॥ इक दिन का किस्सा सुनो, बीवी थी बाजार। मटकू था घर में पड़ा, आदत […]

बाल कविता

ढीट भालू

  बोला भालू शेर से – “शेरू मेरे यार”। काफी दिन हैं हो गये, चलो आज बाजार॥ चलो आज बाजार, घूम-फिर कर घर आयें, पिक्चर-विक्चर देख, समोसे-लड्डू खायें। सुना बिका कल खूब, बर्फ का मीठा गोला, हम भी तो लें स्वाद, ठुमकता भालू बोला॥ सुनकर शेरू क्रोध में झपटा – “सुन रे ढीट”। भालू के […]

बाल कविता

चुमकी चिड़िया – बाल कविता

  भोर खिली, सूरज मुस्काया देख-देख अंबर हर्षाया चुमकी चिड़िया जाग गयी है सारी सुस्ती भाग गयी है उसकी माँ ने बोला था कल अब तू भी दाने चुगने चल सो चुमकी करती तैयारी उड़ने की आई है बारी

बाल कविता

चिड़िया रानी

  चिड़िया रानी, चिड़िया रानी, तुम तो निकली बड़ी सयानी। मेरी बगिया में तुम आई, एक पेड़पर जगह बनाई। मिहनत से मुँह कभी न मोड़ा, तिनका-तिनका तुमने जोड़ा। एक घोंसला वहाँ बनाया, जो हमसब के मन को भाया। कभी न की तुमने शैतानी, तुम तो निकली बड़ी सयानी। बच्चे आये वहाँ तुम्हारे, छोटे-छोटे, प्यारे-प्यारे। दाने […]

बाल कविता

गप्पू बंदर – बाल कविता (चौपई छंद)

गप्पू बंदर था बदमाश काम एक था उसका खास चुरा-चुरा के खाता आम करता औरों को बदनाम सब पशुओं ने की तब राय मिलकर सोचा एक उपाय गधा कैमरा लाया भाग उसे लगाया फल के बाग गप्पू जब आया उस रात उसको पता न थी ये बात हुई रिकॉर्डिंग, गप्पू चोर कह दौड़े सब उसकी […]