कविता

दूसरे किनारेपर………..

समंदर में उठती कुछ तरंगें मानों करती हैं प्रयास एक किनारे का संदेश दूसरे तक पहुँचाने का सफल भी होती हैं कई बार सह-संबंधों के माध्यम से किन्तु टूट जाती हैं अधिकतर बीच में कहीं तुम भी तो खड़े हो उसी दूसरे किनारेपर संभवतः किसी जन्म में तुम्हें सताया होगा तुम्हारा दिल दुखाया होगा दंड […]

कविता

कुछ मुक्तक

1. परिंदों को चिढाने की, किसी को आजमाने की। नहीं ख्वाहिश रही अपनी जमीं से दूर जाने की। इधर पर चाँद लगने है लगा हमको बड़ा प्यारा, इसी खातिर जगी है चाह नभ को आज पाने की॥   2. पथपर अपलक ताकते, व्याकुलता से नैन। पता नहीं कब दिन ढले, कब घिर आए रैन। पहुँच […]

लघुकथा

बदनामी – लघुकथा

“देखिए जी, ऐसा करके आप हमारी बेटी की जिन्दगी ही तो बरबाद कर रहे हैं, छोड़ दीजिए न ये जिद” “तुम चुप रहो, समाज में मुझे मुँह दिखाना है। उस आवारा लड़के को अपनी बेटी नहीं दे सकता मैं, कुँवारी बैठी रहे सारी उम्र वो मंजूर है” “वो लड़का आवारा है? डॉक्टरी की पढ़ाई की […]

कहानी

आधा-अधूरा हक – कहानी

गिरिधर बाबू के यहाँ पँचायत बैठी थी। उनके और उनके भाइयों के बीच पैतृक संपत्ति के बँटवारे का फैसला होना था। दोनों छोटे भाई नृपेंद्र और जगतेश्वर आये हुए थे। सौतेला होने के बावजूद गिरिधर बाबू ने कभी अपने दोनों भाइयों को खुद से अलग नहीं समझा। सदा उनको अपने बेटे नवीन के बराबर मानते […]