लघुकथा

लघुकथा — प्रकृति का नियम

सदाशिव जी कह रहे थे कि जितनी भी शारीरिक व्याधियां और बीमारियों होती है, उनके लिए कोई और नही, स्वयं इन्सान ही जिम्मेदार है । रामकेश ने पूछा – “सदाशिव जी, कोरोना जैसी महामारी या सूखा और बाढ़ जैसी प्राक्रतिक आपदाओं से लाखों लोग मर रहें हैं, इसमें इंसान का क्या दोष है ?” सदाशिव […]

लघुकथा

स्वास्थ्य का टॉनिक (लघुकथा)

फोन की घंटी बजी तो तिवारी जी पत्नी ने फोन उठाया और बोली – “बहुत बहुत धन्यवाद भाई साहब दुर्गेश जी, ये आजकल पुस्तकें पढ़ने में समय व्यतीत करते खुश नजर आते है । बच्चो को डाँटना और चिड़चिड़ापन भी बहुत कम हो गया” तभी वहा बैठे पड़ोसी ने पूछा – भाभी जी, ये जादू […]

गीत/नवगीत

ताकत का आभास

बँधी बुहारी से हो हमको, शक्ति भरा अहसास । मिलकर रहते वे ही करते, ताकत का आभास ।। सबने मिलकर ही सागर पर, किया सेतु निर्माण । ऐसे ही सन्देश बताते, हमको वेद पुराण ।। रहते जो संयुक्त रूप से, भरे आत्म विश्वास । मिलकर रहते वे ही करते, ताकत का आभास ।। सदा आत्मबल […]

गीत/नवगीत

दिल थामे चलता रहे

पाँव झूठ के जिनको सोहे, हृदय झूठ सजता रहे | मिथ्या बोले शान बघारे, दिल थामे चलता रहे ।। कई तरह से ठेस लगाकर, झूठ सदा ही साधते । साँसों की गति बोझिल होती,किन्तु सत्य से भागते झूठ भरी कल्पित गाथाएं, सबके मन भरता रहे । मिथ्या बोले शान बघारे, दिल थामे चलता रहे ।। […]

गीत/नवगीत

गीत – वही दोष में भागीदार

क्यों गंगा को मैली करते, इस पर करना हमें विचार । नीर प्रदूषित करते जो भी, वही दोष में भागीदार ।। गंगा अपनी मैली करते, जाकर खुद के धोने पाप । पावन नदियाँ मैली होकर, शायद देती होगी श्राप।। दूषित जल से बोलो कैसे, जनता का होगा उद्धार । नीर प्रदूषित करते जो भी, वही […]

लघुकथा

लघु कथा – जेंडर समानता

कमलाकर – “मानवाधिकारों की पैरोकार संस्था विश्व आर्थिक संगठन के अनुसार दुनियाभर की महिलाएं करोड़ों घंटे बिना पैसों के घर का काम-काज करती है । उनके काम का योगदान भारत के शिक्षा बजट से 20 गुना से भी अधिक है श्री मानवेन्द्र जी।” मानवेन्द्र- इसके लिए हमारी शैक्षणिक व्यवस्था दोषी है श्री कमलाकर जी । […]

गीत/नवगीत

गीत – हृदय चेतना लायें

नीर झील का हुआ विषैला, किसको अपनी व्यथा सुनाएं।। यहाँ विदेशी सुंदर पक्षी, आकर सबका मन बहलायें। मीठा खारा नीर झील का, खग वृन्दों को खूब रिझायें ।। मरें परिन्दें यहाँ हजारों, “जल ही जीवन” को झुठलायें । अखबारों में पढ़ीं वेदना, नयन अश्क सबने छलकायें ।। राजनीति के गलियारों में, क्यों सब व्यर्थ विवाद […]

गीत/नवगीत

गीत – जीने का आधार मिले

सतत कर्म करने पर मानव, सफल बने सत्कार मिले भूप भगीरथ गंगा लाये, जप तप से अधिकार मिले । बहती सरिता कहती हमसे, रुकने से सड़ता पानी । चलते रहतें तभी जिंदगी, साँस रुके मरता प्राणी ।। पावन नदियों से ही हमको,जीने का आधार मिले उत्तर से दक्षिण तक विस्तृत, नदियों से मैदान मिले । […]

गीत/नवगीत

नया नया कुछ काम करें

क्षण भंगुर ये जीवन अपना, नया नया कुछ काम करें। प्रेम-प्रीति के सम्बन्धों को, आज हृदय के नाम करें ।। भीतर का ये अफसाना भी, बाहर जरा उजागर हो । मुक्त कंठ से कहें सभी ये, तुम तो दिल के सागर हो ।। प्यास दबाये बैठे कब से, साँझ जाम के नाम करें । क्षण-भंगुर […]

गीत/नवगीत

गीत

हवा में विष नही घोलो, हमें ये घर चलाना है । सजन रे झूठ मत बोलो, हमें रिश्ता निभाना है ।। छुपाना क्या तुम्ही से अब, रहना जब तुम्हारें संग । ऐसी बात करें क्यों हम, दिल में हो हमारे जंग ।। रहे उलझन कभी मन में, हमको ही सुलझाना है । सजन रे झूठ […]