कुण्डली/छंद

कुण्डलिया छंद

(1) वृन्दावन अरु अवध में, ऐसे संत विरक्त, उनके चरण सरोज रज, मस्तक धारे भक्त | मस्तक धारे भक्त, भेद कबहू मत करिये दिन अरु रात ख़याल, ईष्ट अपने का रखिये कह लक्ष्मण कविराय,ह्रदय को रखना पावन बसे अवध में राम. कृष्ण बसते वृंदावन (2) कामी को प्रिय कामिनी, लोभ मोह के दाम, रसिक प्रिय […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलिया

(1) अमुआ तेरे बाग़ में, खुशियों की बौछार, झूला डाले डार पर, उमड़ रहा है प्यार | उमड़ रहा है प्यार, झूलने सखियाँ आती बारिश की बौछार, सभी का तन महकाती कह लक्ष्मण कविराय,हवा जब बहती पछुआ झूला देते डाल, डार पर तेरी अमुआ | (2) झूला झूले सब सखी, कर सोलह शृंगार, पावस ऋतु […]

मुक्तक/दोहा

दोहे : करती खूब कलोल

सावन की बौछार में, भीगा है संसार सखियाँ झूला झूलती,सुने मेघ मल्हार | सजधज सखियाँ आ रही,कर सोलह शृंगार, सावन की बौछार में, मने तीज त्यौहार | मचकाती झूले सदा, करती खूब कलोल, साजन आते याद है,सुन पक्षी के बोल | बूंद बूंद बरसा रही, कुदरत करे कलोल, सावन की बौछार में, भीगे खूब कपोल […]

कविता

दोहे : करते शब्द प्रहार

प्रेम पूर्ण व्यवहार से, बढ़ता प्यार अपार, मधुर वचन से आदमी, जीत सके संसार | शब्दों के क्या अर्थ हैं, पहले करे विचार, संबंधों की डोर पर, करते शब्द प्रहार | नैतिकता बेजार है, भारी अब बाजार, लेन-देन हावी हुआ, कमतर है व्यवहार | घोर प्रदूषण खा रहा, उगतें सुंदर फूल, मानवता की राह में, […]

कविता

कल होगा फिर उजियारा (कुकुभ छंद)

  कूद रहा हूँ , गिर न पडूँ मैं , मुझे पकड़ना पापाजी ऊपर से मैं कूद रहा हूँ मुझे लपकना पापाजी | डरने की कुछ बात नहीं है,इतना बल है बाहों में राज दुलारा है तू मेरा, आ जा अभी पनाहों में || सूरज सा मन आज खिला है, देख होंसला ये तेरा नाज […]

कविता

कुण्डलिया छंद

(1) मंगलमय हो आपका, आया फिर नव वर्ष अच्छे दिन आये तभी, जीवन में उत्कर्ष | जीवन में उत्कर्ष, कर्म यदि अच्छे साधे करे काम को पूर्ण, रहे न अधूरे आधे लक्षमण साधे कर्म, करे नित होकर तन्मय खुशिया मिले हजार, वर्ष हो शुभ मंगलमय || (2) अवसर की सत्ता करे, संसद तक षड्यंत्र संसद तो चलती […]

कविता

कुण्डलिया छंद

(1) गंगा मात्र नदी नहीं, समझे इसका सार गंगा माँ को मानते जीवन का आधार | जीवन का आधार, इसी से भाग्य जगा है कूड़ा कचरा डाल, मनुज ने किया दगा है कह लक्ष्मण कविराय, रहोगे तन से चंगा धोते सारे पाप, रखे क्यों मैली गंगा || (2) गंगा तट निर्मल करों,,भली करेंगे नाथ, स्वच्छ […]