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  • यही हम बोलेंगे

    यही हम बोलेंगे

    इक बोगी में भर लो कई हजार। यही,हम बोलेंगे। जीवन जबकि,फंसा हुआ मजधार। यही,हम बोलेंगे। पटना जैसे स्टेशन पर। भीड़ लगी है भारी। मुंबई नगरी जाने वाले। जुटे हुए नर-नारी। इधर पसीने से भीगे,  सरकार। यही,हम...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    पढ़ो लिखो,खुद आगे आओ तभी सही है। जीवन को खुशहाल बनाओ तभी सही है।। तेरे हिस्से की रोटी कोई न देगा। अपने हाथों तुम्हीं उठाओ तभी सही है।। जीवन में खुशियों के दीपक तभी जलेंगे। शिक्षा...

  • दिया की रोशनी सी

    दिया की रोशनी सी

    दिया की रोशनी सी जल उठी हो तुम। कभी अर्धांगिनी बन चल उठी हो तुम। कभी माँ-बाप के नयनों में बस करके। कभी ससुराल जाकर छल उठी हो तुम।। कहीं भर शिशकियाँ,दम तोड़ देती हो। कहीं...

  • गीत – हम रोते हैं

    गीत – हम रोते हैं

    दान मतों के अपने करके । हम रोते हैं। मन में जो विश्वास बचा था, उसको भी हम खो देते हैं। घर पर आकर वादे करते। चरणों में तुम सजदे करते। आशाओं के मोती यूँ ही।...

  • आज के दोहे

    आज के दोहे

    प्रेम, दया, करुणा सभी, मानव के श्रृंगार। मिल-जुलकर जो रह गये, हो जाये उद्धार। जीवन का दर्शन यही, यही समूचा सार। कहते वेद, पुराण सब सुंदर रखो विचार। जन्म सफल होगा तभी, जीवन सुखमय होय। आस-पास...


  • मेरी करवा चौथ

    मेरी करवा चौथ

    वो था कितना सुंदरतम पल। जब तुम हो मेरे घर आयी। मेरे जीवन में खुशियों से। तुम भरा कटोरा ले आयी। जब मृदुल वचन तुम बोली थी। प्रभु आप हमारे प्रियतम हैं। ये वचन लगे थे...

  • पार कर दूं मैं

    पार कर दूं मैं

    कल्पना को किस तरह साकार कर दूं मैं। किस तरह तीरे नज़र के पार कर दूं मैं। मर रहा  हर साल रावण ,राम लीला में। किस तरह रावण का बंटाधार कर दूं मैं। जिंदगी मजलूम लोगों...

  • दिया जलाने हम आये हैं

    दिया जलाने हम आये हैं

    अपनी धरती की रक्षा को। आगे बढ़े कदम आये हैं। दिया जलाने हम आये हैं। माँ सीता को हरने वाले। स्वर्ण महल में रहने वाले। राम प्रभु की प्रत्यंचा से। दशकंधर वध कर आये हैं। दिया...

  • हे माँ गंगे

    हे माँ गंगे

    हे देवसरी, हे देवनदी। हे देवपगा, हे ध्रुवनन्दा। करती पितरों का तुम तारन। कहलाती हो तुम माँ गंगा।। गंगोत्री हिमनद से निकली। हिमगिरि के चरणों से फिसली। करती कल-कल, छल-छल निकली। उन्मत्त यूँ लहराकर निकली। करती...