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  • मदिरा सवैया

    मदिरा सवैया

    मदिरा सवैया … ७ भगण एक गुरू 211 211 211 211 211 211 211 2 (1) लेप दियो वृषभान सुता ,नवनीत मनोहर गाल सखी रूठ गये नटनागर ली पग -धूरि उछालत ग्वाल सखी खोंस लई मटकी...

  • गीत : नेता सब गूंगे बहरे हैं …

    गीत : नेता सब गूंगे बहरे हैं …

    लहू लुहान है माँ का आँचल ,दाग बड़े ही गहरे हैं किससे अब फरियाद करें? नेता सब गूंगे बहरे हैं … जैड सुरक्षा, एसी -कारें,महल चाहिये जीवन भर. रोज हवाई दौरा करते ,पैर न रक्खें धरती...


  • कविता

    कविता

    केसर की क्यारी से आई सोंधी बयार , महक उठा सखी मेरा सूना आगार है! अलसाई ऊषा ने खोल दिये मुंदे नयन, सूरज की किरणों ने किया श्रंगार है! विरहन के होठों पर सजे सखी प्रेम...

  • गीत: मैं भी पंछी बन जाऊं

    गीत: मैं भी पंछी बन जाऊं

    उन्मुक्त गगन में उड़ते पंछी क्या कहते हैं सुना कभी आओ मिल कर सब एक साथ क्षितिज पार उड़ चलें सभी l1l कम्पित काया को संयत कर घर की देहरी पर धरे पांव दो कदम बढ़े...

  • लघु कथा : रिश्तों का दर्द

    लघु कथा : रिश्तों का दर्द

    मित्रो, आप सब के स्नेह का प्रतिदान तो नहीं कर सकती,… पर कुछ है जो भीतर ही भीतर रिसता रहता है… औरत होने का दर्द.. बरसों से मुझे सालता रहा है पर आज कल कुछ ज्यादा...

  • घनाक्षरी छंद

    घनाक्षरी छंद

    नयनों में प्यास लिए, मुख मृदु हास लिए चहकत झूम झूम जैसे हो कजरिया । मधुमाती अबला सी, रसवंती सबला सी ,चलती है चपला सी जैसे हो बिजुरिया । इठलाती इतराती, प्रेम सुधा बरसाती , बलखायी...

  • वीर सपूत के नाम एक पत्र

    वीर सपूत के नाम एक पत्र

      अहो भाग्य !हे वीर पुरुष !इस धरती पर जो तुम आये। देश प्रेम से ओत प्रोत नव गीत तुम्ही ने तो गाये । मरता है केवल शरीर पर सैनिक नहीं मरा करते । बलिदानी की...

  • ठिठुरती गीतिका

    ठिठुरती गीतिका

    सबको मुबारक सुबह का उजाला। ठिठुरन भरा दिन यहाँ पर निकाला । अभी सांझ की सरसराती हवा है , हमारे यहाँ का चलन है निराला ।। घिरा है यहाँ पर अँधेरे में सूरज, रजाई से मुँह...

  • कुण्डलियाँ

    कुण्डलियाँ

      राम राम मन में बसे, राम नाम में लीन । और कछु सूझत नहीं, मन प्रभु के आधीन ।। मन प्रभु के आधीन, राम को नित ही ध्याऊं । राम बिना जीवन जीने की सोच...