कुण्डली/छंद

मदिरा सवैया

मदिरा सवैया … ७ भगण एक गुरू 211 211 211 211 211 211 211 2 (1) लेप दियो वृषभान सुता ,नवनीत मनोहर गाल सखी रूठ गये नटनागर ली पग -धूरि उछालत ग्वाल सखी खोंस लई मटकी पटकी दधि ,लेप दियो सब बाल सखी लोट गये धरती पर मोहन , ढाँप लियो मुख भाल सखी (2) […]

गीत/नवगीत

गीत : नेता सब गूंगे बहरे हैं …

लहू लुहान है माँ का आँचल ,दाग बड़े ही गहरे हैं किससे अब फरियाद करें? नेता सब गूंगे बहरे हैं … जैड सुरक्षा, एसी -कारें,महल चाहिये जीवन भर. रोज हवाई दौरा करते ,पैर न रक्खें धरती पर. नई नई चालें चलके नित, करते माल तिजोरी में टैक्स लगा कर नये नये, सबका जीना करते दूभर. […]

कविता

कविता : मैंने लिखना छोड़ दिया

मैंने लिखना छोड़ दिया, भला लिखे या बुरा लिखे छुट पुट मुक्तक खूब लिखे, मुख पोथी पर बड़े जतन से भाव नदी में डूब लिखे , फिर भी कोई उन्हें न भाया, नन्हा सा दिल तोड़ दिया मैंने लिखना छोड़ दिया मैंने लिखना छोड़ दिया (1) मुक्तक में संगीत बसा, सुंदर छोटा गीत बसा छोटी […]

कविता

कविता

केसर की क्यारी से आई सोंधी बयार , महक उठा सखी मेरा सूना आगार है! अलसाई ऊषा ने खोल दिये मुंदे नयन, सूरज की किरणों ने किया श्रंगार है! विरहन के होठों पर सजे सखी प्रेम गीत , मन के उपवन में अब छाई बहार है! भीत पर जड़ी छवि मुस्काती मंद मंद, भेज दिया […]

गीत/नवगीत

गीत: मैं भी पंछी बन जाऊं

उन्मुक्त गगन में उड़ते पंछी क्या कहते हैं सुना कभी आओ मिल कर सब एक साथ क्षितिज पार उड़ चलें सभी l1l कम्पित काया को संयत कर घर की देहरी पर धरे पांव दो कदम बढ़े पगडंडी पर छूटा पीछे अब मेरा गांव ।२। अनजान डगर पर निकल पड़ी हूं जिसका कोइ छोर नहीं पग […]

लघुकथा

लघु कथा : रिश्तों का दर्द

मित्रो, आप सब के स्नेह का प्रतिदान तो नहीं कर सकती,… पर कुछ है जो भीतर ही भीतर रिसता रहता है… औरत होने का दर्द.. बरसों से मुझे सालता रहा है पर आज कल कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है…. दोस्ती का चोला पहने बहुत लोग हैं जो सिर्फ नोचना खसोटना जानते हैं… पर यह […]

कुण्डली/छंद

घनाक्षरी छंद

नयनों में प्यास लिए, मुख मृदु हास लिए चहकत झूम झूम जैसे हो कजरिया । मधुमाती अबला सी, रसवंती सबला सी ,चलती है चपला सी जैसे हो बिजुरिया । इठलाती इतराती, प्रेम सुधा बरसाती , बलखायी हिरणी सी लचके कमरिया । वासन्ती चुनर औ धानी परिधान सजे , ठुमक ठुमक चले अल्हड़ गुजरिया । — […]

गीत/नवगीत

वीर सपूत के नाम एक पत्र

  अहो भाग्य !हे वीर पुरुष !इस धरती पर जो तुम आये। देश प्रेम से ओत प्रोत नव गीत तुम्ही ने तो गाये । मरता है केवल शरीर पर सैनिक नहीं मरा करते । बलिदानी की शौर्य कथा पर आंसू नहीं बहा करते । नहीं समय है, कहीं बैठ कर रोकर शोक मनाने का । […]

गीतिका/ग़ज़ल

ठिठुरती गीतिका

सबको मुबारक सुबह का उजाला। ठिठुरन भरा दिन यहाँ पर निकाला । अभी सांझ की सरसराती हवा है , हमारे यहाँ का चलन है निराला ।। घिरा है यहाँ पर अँधेरे में सूरज, रजाई से मुँह तक न बाहर निकाला ।। बरसता रहा सारे दिन आज पानी बच्चों की मस्ती का निकला दिवाला ।। हरी […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलियाँ

  राम राम मन में बसे, राम नाम में लीन । और कछु सूझत नहीं, मन प्रभु के आधीन ।। मन प्रभु के आधीन, राम को नित ही ध्याऊं । राम बिना जीवन जीने की सोच न पाऊं ।। छोड़ दिये बांधव सभी, छाड़ दिए सब काम । निशिदिन मन भजता रहे राम राम श्री […]