मुक्तक/दोहा

एक मुक्तक

आवन कह गए अजहुँ न आए, कहाँ गए मोरे श्याम बाट निहारत थक गई अँखियाँ निशि दिन आठों याम सूना पनघट रीती गगरी, सांझ ढली साँवरिया जमुना के तट पर टेरत हारी, सुध लेलो घनश्याम — लता यादव

लघुकथा

लघु कथा : रण बाँकुरा

अगले दिन दीपावली थी लेकिन छावनी में कहीं भी चहल-पहल नहीं थी । 1987 में मेरे पति भी भारतीय शान्ति रक्षक सेना (IPKF) में थे ।पूरी पलटन श्री लंका में थी। यही सोचते हुए मासिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं जाँच रही थी कि दरवाजे पर दस्तक हुई। घड़ी रात के 11 बजा रही थी। एक […]

लघुकथा

लघुकथा : टूटे पंख

अनुभा धीरे धीरे न्यायालय के मुख्य द्वार से बाहर आई और अपने माथे पर छलक रहे स्वेद कणों को आँचल से पोंछा । एक लम्बा उच्छ्वास लेकर वह पार्किंग की ओर थके हुए कदमों से चल पड़ी। सहसा उसे अपने कंधे पर चिर परिचित कोमल स्पर्श का आभास हुआ, पिता के कमजोर बूढ़े हाथ उसे सांत्वना […]

कुण्डली/छंद

कुंडली : ओलों की बरसात

ओलों की बरसात से फसल हुई है नष्ट          देख फसल की दुर्दशा बहुत हुआ है कष्ट बहुत हुआ है कष्ट सोचता कृषक बिचारा , बिना कनक के भगवन कैसे होय गुजारा कुछ दमड़ी दे बैंक ने भेजी है सौगात कैसी दे गई टीस ये ओलों की बरसात   लता यादव

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

उठती गिरती सागर की लहरों लेजाओ मेरा पैगाम मन के मनके को छिपा सीप में ले जाओ प्रीतम के धाम ‘ प्रीत जता कर प्रीत निभाना जिनको कभी नहीं आया मर्यादा पुरुषोत्तम तुमको सिया पुकारे आठों याम             लता यादव

मुक्तक/दोहा

कुछ मुक्तक

भटके हुओं को राह दिखाती हैं पुस्तकें  अँधेरे मन में दीप जलाती हैं पुस्तकें मन में अगर लगन हो तो कुछ भी कठिन नहीं नव चेतना नव जागरण लाती हैं पुस्तकें     फूलों से लद गई है हर डालीगुलाब की महका रही चमन को हर डाली गुलाब की ऐ काश कोई देखता उसको भी […]

गीत/नवगीत

गीत : मन बावरा रे…

मन बावरा मेरा बावरा मन बावरा रे । मन माने ना माने ना मेरा बावरा रे ।। मन की बातें मन ही जाने , बात किसी की एक न माने , प्रीत जोड़ के मनमोहन से , ऊँच नीच कुछ ना पहचाने , मन का नहीं जाने दर्द मेरा साँवरा रे । मन माने ना […]

मुक्तक/दोहा

एक मुक्तक

जरा गौर से देखो कोई बुला रहा अनन्त की ओर कोमल काया इतनी सीढ़ी जिसका कोई ओर न छोर मन कितना मतवाला देखो फिर भी हार नही मानी भर उड़ान उड़ चला गगन में सोच कभी तो होगी भोर — लता यादव