लघुकथा

सहारा!

मीनल बहुत खुश थी. उसके बच्चे भी स्कूल में अच्छी तरह पढ़ाई कर रहे थे और खाने-पीने की दिक्कत भी खत्म हो गई थी. सिलाई करते-करते उसके सामने पुराने चित्र घुमड़ने लगते थे. “मैडम जी, मधु कल से स्कूल नहीं आएगी.” स्कूल की आधी छुट्टी में स्टाफ रूम में जाकर मैंने उसकी कक्षाध्यापिका नीलम को […]

लघुकथा

संभ्रम

मनीषा लैपटॉप पर लघुकथा लिखने में व्यस्त थी. यह व्यस्तता शारीरिक भी थी और मानसिक भी. ऐसे में किसी तरह की आवाज तथाकथित एकाग्रता में खलल डालने जैसी होती है. सहसा एक मधुर-मधुर घंटी की आवाज ने उसका ध्यान भंग किया. “कहां से आ रही है यह आवाज!” वह हैरान थी. घर में कोई छोटा […]

कविता

प्रेम

प्रेम प्रेम शब्द है, जिसमें मिठास है, प्रेम दीप है, जिसमें उजास है, प्रेम और कुछ नहीं, बस मधुरिम एहसास है. प्रेम दिखता नहीं, प्रेम छिपता भी नहीं, प्रेम वह नशा है, जो उतरना भी नहीं. प्रेम तृप्ति है, प्रेम प्यास है, प्रेम धरती है, आकाश है, प्रेम कहां नहीं, उसका कण-कण में निवास है. […]

लघुकथा

कोशिश

कोशिश एक कशिश है. हर कोई कोशिश की कशिक को अनुभूत करना चाहता है. प्रातःकाल की सैर इसके लिए अत्यंत मुफ़ीद समय है. सुबह की सुखद-सुरभित बेला में चिड़ियों की चहक की कोशिश मन को कोशिश करने के लिए प्रेरित करती है. चलते-चलते अनेक परिचित-अपरिचित चेहरे दिख जाते हैं. बातें होती हैं, सुख-दुःख बांटे जाते […]

बाल कविता शिशुगीत

गुलाब की चाहत

बच्चे और गुलाब एक जैसे, जैसे पालो बन जाएं वैसे, बच्चे गुलाब की तरह महकें और जग को महकाएं, खिलखिलाती खुशी से चहकें और सबको चहकाएं, आशा की किरण बनकर चमकें और जग को चमकाएं, यह मेरी चाहत है, यही चाहत मेरी राहत है.

लघुकथा

घंटी

वह किसी को मारने-मूरने के हिसाब से तो आया नहीं था, पर भुखमरी के कारण चोरी-लूट करने को उसने अपना धर्म मान लिया था. दीवार फांदकर वह घर में घुसा था और आगे-पीछे के दरवाजे पर ताला न लगा देखकर बाहर निकलने के बारे में निश्चिंत था. वैसे तो वह बहुत बहादुर था, पर न […]

क्षणिका

घेरा

घेरा तो आखिर घेरा है, हसरत का या बेरुखी का, वफा का या बेखुदी का, प्यार का या तिरस्कार का, तकरार का या इंकार का, काम का या व्यापार का, आहट के इंतजार का, पुष्पों का या कंटकों का, खुशियों का या गमों का, कोशिश का या नाकामयाबी के रंज का, हार-जीत तो होनी ही […]

क्षणिका

संध्या-बेला

संध्या की बेला है या रंगों का मेला है नभ ने बनाई है रंगोली या खेल रहे हैं बादल होली बादल हैं मोहन लिए पिचकारी बदरिया है राधा लिए कटि में कमोरी गगन बना है वृंदावन, गोप-गोपियां प्यारे चंदा है मनभावन रसिया रास रचा रहे तारे

गीत/नवगीत

हसरतों की शामें जवां हो गईं

हसरतों की शामें जवां हो गईं, शायद कोई हसरत रवां हो गई! मौजें तरंगित थीं होने लगीं, प्रीति हिलोरें-सी लेने लगी, तनहा थी मैं कारवां हो गई- हवा ने छेड़े रंगीं तराने, बनने लगे अब हसीं फसाने, मुखरित थी मैं बेजुबां हो गई- तमन्ना नहीं थी चांद-तारे पाने की, हसरत नहीं थी नया सूरज उगाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

खुद पर कृपा कीजिए

प्रभु की कृपा पाने के लिए प्रार्थना कीजिए, लेकिन, सबसे पहले खुद पर कृपा कीजिए. सफलता पाने के लिए प्रभु से प्रार्थना कीजिए, लगन और मेहनत से प्रयास भी कीजिए, सबसे पहले खुद पर कृपा कीजिए. सपने पूरे करने के लिए प्रभु से प्रार्थना कीजिए, सपनों को उड़ान देने के लिए पंख भी खोलिए, सबसे […]