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  • रश्मियों का राग दरबारी

    रश्मियों का राग दरबारी

    नोटबंदी का दुःखदाई माहौल चल रहा था. जिनके पास खरीदारी के लिए वाजिब धन का अभाव था, वे तो नोट बदलवाने की लाइन में लगकर भी विवशता से ही एक-दूसरे को देखकर सांत्वना देने के लिए...

  • फिर सदाबहार काव्यालय- 45

    फिर सदाबहार काव्यालय- 45

    “एक नन्ही-मुन्नी के प्रश्न ” मैं जब पैदा हुई थी मम्मी, तब क्या लड्डू बांटे थे? मेरे पापा खुश हो कर, क्या झूम-झूम कर नाचे थे? दादी-नानी ने क्या मुझको, प्यार से गोद खिलाया था? भैया...

  • सरसराहट

    सरसराहट

    ”मेरी आहट सुन पा रहे हो क्या?” एक आवाज आई. ”तुम कौन हो?” ”मैं हूं कल की आहट.” ”कौन सा कल? बीता कल या आने वाला कल?” सोमेश ने पूछा. ”जो भी तुम समझो.” ”ऐसा है...

  • उत्सव: एक काव्य रूपक

    उत्सव: एक काव्य रूपक

    ”हम कांटों से नहीं डरते, इसलिए गुलाब लगाते हैं, हम गमों से नहीं डरते, इसलिए उत्सव मनाते हैं.” उत्सवों में उत्सव है दिवाली, लेकिन दिवाली मनाने में आईं दिक्कतें- पटाखे कोर्ट ने बंद कर दिए, साउंड...

  • शांतता! यह डॉक्टर-कक्ष है

    शांतता! यह डॉक्टर-कक्ष है

    अभी-अभी मेहुल का मैसेज आया है- ”नानी-नानू, अभी-अभी यूनिवर्सिटी से मेरे रिजल्ट का मैसेज आया, मैं डॉक्टर बन गया.” ”देखते-देखते समय पंख लगाकर उड़ गया!” मुझे लगा और मेरी मधुर स्मृतियों में 23 साल पहले के नजारे नजर...

  • सतरंगी समाचार कुञ्ज-3

    सतरंगी समाचार कुञ्ज-3

    आप लोग जानते ही हैं, कि ‘सतरंगी समाचार कुञ्ज’ में सात रंगों के समाचार हम लिखते हैं, शेष रंगों के समाचार कामेंट्स में आपकी-हमारी लेखनी से लिखे जाएंगे. आइए देखते हैं इस कड़ी के सात रंग...

  • क्रंदन

    क्रंदन

    कई दिनों से रोज सुरभि को सपने में एक छायाचित्र दिखाई दे रहा था, जिसमें माइक के पीछे से निकलते हुए दो हाथ मानो बचाने के लिए गुहार करते लग रहे थे. कौन हो सकता है...


  • बोलती खामोशियां

    बोलती खामोशियां

    मुशायरा चल रहा था. एक-से-एक बेमिसाल शायर अपनी शायरी का जलवा दिखाकर सबको मदहोश किए जा रहे थे. सुलेखा भी मदहोशी में शायरी का लुत्फ़ उठा रही थी, तभी मंच से एक शेर पढ़ा गया- ”उसे...