गीत/नवगीत

सनम का दीदार

सर्द-सर्द ‌रातें हों और सनम का दीदार हो, लब रहें खामोश भले बस नैनों से इजहार हो, जनवरी की लंबी रातें बौनी-सी हो जाएंगी, प्यार के आगोश में जब प्यार का ही प्यार हो. कौन पहुंचाए पिया तक सर्द रातों का संदेश, चांद बैरी छिप ही गया है, नैना भये चकोर, बादलों ने फेर लिया […]

गीतिका/ग़ज़ल

नशा नाश का कारण

नशा नाश का कारण होता, तन-मन-धन का करता नाश, आत्मा तक भी बिक जाती है, परिवार का सत्यानाश! मोबाइल भी एक नशा है, सीमित हो इसका उपयोग, आंखें भी धोखा दे जातीं, लग सकते हैं और भी रोग. खुद भी समझें बात पते की, नशा बड़ों का भी छुड़वाएं, नशा मुक्त भारत बनाएं, आओ यह […]

गीतिका/ग़ज़ल

कभी-न-कभी

मुगालते में ही जिंदगी गुजर जाती है, शायद मिल जाओ कभी-न-कभी तुम्हारे आने की कोई आहट ही मिल जाए, शायद मेहरबां हो जाओ कभी-न-कभी गहन अंधकार के बाद उजाला आ ही जाता है, शायद प्रकाश बनकर आओ कभी-न-कभी शायद मेहरबां हो जाओ कभी-न-कभी शायद मेहरबां हो जाओ कभी-न-कभी

गीत/नवगीत

नई शुरुआत

जिंदगी की नई शुरुआत की जाय, की थी जो उम्मीद औरों से वो अब खुद से की जाय! विश्वास औरों पर क्यों करना मुनासिब? विश्वास खुद और खुदी पर करने की पहल की जाय! रिश्तों की पाठशाला बनाई रखी जाय, अर्थशास्त्र के अनेक गुणों-सूत्रों को अनदेखा किया जाय! आनंद की दरकार किसे नहीं है! आनंद […]

लघुकथा

इज्जत का फलूदा (विजेता लघुकथा)

साहित्यिक मंच “लघुकथालोक” पर विजेता लघुकथा नेहा के साथ मैं अपने अपार्टमेंट में ही रहने वाले एक दंपति की बेटी की छठी पर गई थी. छठी की रस्म में महिलाओं को अन्दर बुलाया गया था, जहां हम बच्ची को देख सकें और गिफ्ट देनी हो वो भी दे सकें. हम दोनों अंदर गईं और गिफ्ट […]

गीतिका/ग़ज़ल

सकारात्मकता

सकारात्मकता गगन में सूर्य है धरती में धैर्य है जीवन में औदार्य है वाणी में माधुर्य है. सकारात्मकता सराहनीय गुण है, सीखने योग्य गुर है, सच्ची इंसानियत के लिए अपनाने योग्य हुनर है, सकारात्मकता मन के लिए दवाई है, मुख के लिए मिठाई है, अपनाए रखो तो सबके लिए भलाई है. सकारात्मकता प्रगति के लिए […]

गीतिका/ग़ज़ल

न जाने कब!

बिंब से प्रतिबिंब हो गए, न जाने कब! हम तुम्हारे हो गए, न जाने कब! छंद सब स्वच्छंद हो गए, न जाने कब! प्रीत पे प्रतिबंध हो गए, न जाने कब! द्वंद्व सब निर्द्वंद्व हो गए, न जाने कब! न जाने कब! न जाने कब!

कविता

अलविदा सखे!

अलविदा- 2022 स्वागतम- 2023 अलविदा सखे! अलविदा सखे! अलविदा साल 2022 सखे! जो आता है, वह जाता सखे! तुमको भी तो अब जाना सखे! होनी है विदाई इक दिन तो, खुश होके लेना विदाई सखे! अलविदा सखे! अलविदा सखे! हर साल सिखा कुछ जाता है, कुछ लाता, कुछ ले जाता है, तुम भी तो उसी […]

कविता

पक्की सनातन सोच

अलविदा- 2022 स्वागतम- 2023 समय बदलता है, दिन बदलता है, रात बदलती है, हर बात बदलती है, बड़ा शोर मचता है साल बदलने का, फ़िज़ा में चारों ओर रवानी रहती है. साल की संख्या में इजाफा होता है, सदा की भांति एक अंक आगे बढ़ जाता है, रात के बारह बजे घंटे बजते हैं, नया […]

गीतिका/ग़ज़ल

छोटी-छोटी

छोटी-छोटी खुशी से ही ‘गर हम खुश हो जाएं, खुशियों का भंडार भर जाए, जीवन संवर जाए! छोटी-छोटी बातों-मुलाकातों पर ग़ौर किया जाए, शायद वो ही कभी बड़ी उपलब्धि बन जाएं! छोटी-छोटी हार से निराश क्यों हुआ जाए, शायद किसी दिन आशा का सूर्य चमक जाए! छोटी-छोटी उलझन को साहस से सुलझाया जाए, शायद यही […]