कविता

हमारी रसिकता रीत न जाए

मन्दिर में बड़ का वृक्ष वृक्ष पर बैठा था तोतों का एक जोड़ा जोड़ा मन से तो जवान था तन से भले ही अधेड़ था थोड़ा-थोड़ा तोता तोती से चोंच लड़ाने को था आतुर तोती थी ज़माने की व्यथा से व्याकुल बोली, “तुझको चोंच लड़ाने की पड़ी है इधर सारा संसार है भ्रष्टाचार से व्याकुल […]

कविता

प्रकृति का हर रंग निराला है

प्रकृति का हर रंग निराला है जिसने इनका आनंद लिया वह सचमुच किस्मतवाला है. नभ में है सूरज का वास देता है जो ताप-उजास स्वास्थ्य का अनमोल ख़जाना कीटों का करता है नाश. नभ में चंदा भी रहता है देता चांदी-सी चंदनिया का निखार बरसाता मधुरस और शीतलता रोशनी ले सूरज से उधार. नभ में […]

बाल कविता बाल कहानी

दो बाल काव्यमय कथाएं

 1. कर भला तो हो भला एक गुलाम भागकर पहुंचा, एक घने जंगल में, कोई शेर कराह रहा था, जाने क्या था पग में! पैर उठा देखा गुलाम ने, कांटा एक गड़ा था, खून बह रह टप-टप-टप-टप, उसको दर्द बड़ा था. बड़े प्रेम से उस गुलाम ने, कांटा निकाला शेर का, ‘धन्यवाद’ कह शेर चल […]

लघुकथा

अहंकार

सभी विकास करने के इच्छुक होते हैं. मानव ने भी विकास की सीढ़ी पर बराबर पैर बढ़ाया. अमूमन विकास के साथ अहंकार भी बढ़ता जाता है. चार पैर वाला मानव सीधा होते-होते डिजिटल होता गया. विकास करते-करते वह करोड़पति भी बन गया. ”मैंने रोशनी के लिए बिजली का आविष्कार किया है. अब गैस, वाशिंग मशीन, […]

अन्य लेख

अजीब दास्तां

”अजीब दास्तां है ये कहाँ शुरू कहाँ खतम ये मंज़िलें हैं कौन सी न वो समझ सके न हम.” यह गीत है फिल्म दिल अपना और प्रीत पराई का, जिसकी गायिका हैं स्वर-कोकिला लता मंगेशकर. यहां हम आपको बताते चलें, कि स्वर-कोकिला लता मंगेशकर तो खुद ही अजीब दास्तां की जीवंत मिसाल हैं! विवेकानंद की अजीब दास्तां कभी-कभी […]

अन्य लेख

सींग

अक्सर किसी व्यक्ति के मूर्खतापूर्ण कार्य करने पर कहा जाता है- ”गधे के सिर पर सींग नहीं होते.” आप समझ ही गए होंगे, कि व्यक्ति को अपरोक्ष रूप से क्या कहा गया है! अब गधे के या मूर्ख व्यक्ति के सींग होते हैं या नहीं, पर ये सींग होते बड़े काम के हैं. अब देखिए […]

कविता

खुद से ही मुलाकात नहीं हो पाती

सुधीजनों का कहना है सबसे बात करो मुलाकात करो पर कभी तो तनिक समय निकालकर खुद से भी बात करो मुलाकात करो विडंबना यह है कि हमारी सबसे बात हो जाती है मुलाकात हो जाती है खुद से ही बात नहीं हो पाती खुद से ही मुलाकात नहीं हो पाती. सुधीजनों का कहना है अपने […]

बाल कहानी

इबादत

अक्सर इबादत अपने इष्टदेव की ही की जाती है. नरेंद्र ने किसकी इबादत की! छोटा-सा बालक नरेंद्र पार्क में सी-सॉ झूला झूलने गया था. सी-सॉ झूला झूलने के लिए उसे किसी साथी की जरूरत थी, पर कोई मिल नहीं रहा था. अकेले कैसे सी-सॉ झूला झूलता वह! ”कोई नहीं आ रहा मेरे साथ सी-सॉ झूला […]

बाल कविता

झूठी प्रशंसा से बचो

रोटी एक मिली कौए को, मन में बहुत-बहुत हर्षाया, उसे देखकर एक लोमड़ी, का भी मन था ललचाया. ”कौए भाई, तुम हो अच्छे, कितना मीठा गाते हो! अपनी मीठी तान सुना दो, क्यों इतना शर्माते हो!” इतना सुनकर खुश हो कौआ, लगा छेड़ने जैसे तान, रोटी गिरी चोंच से नीचे, कौआ भूला अपना गान. रोटी […]

बाल कविता

मेहनत से ही सफलता मिलती है

कौआ एक बड़ा प्यासा था, उड़कर पहुंचा एक बाग में, जहां पड़ा था एक घड़ा पर, पानी था थोड़ा-सा उसमें. खूब निराश हुआ पर फिर भी, हिम्मत को न जवाब दिया, आसपास पड़े थे कंकड़, एक उठाकर डाल दिया. जैसे-जैसे कंकड़ डाले, पानी ऊपर को था आया, पानी ऊपर आते देखकर, कौआ मन-ही-मन हर्षाया. आखिर […]