लघुकथा

घंटी

आज ”श्वेता प्रकाशन” का शुभारंभ होने वाला था. तन से तो श्वेता सभी आवश्यक प्रबंध करने में लगी हुई थी, पर मन से वह सालों पुरानी स्मृति में खोई हुई थी. ”मैडम आप शाम को मेरे घर आ जाइएगा, उपन्यास-प्रकाशन से संबंधित सभी बातें वहीं आराम से हो जाएंगी.” एक प्रकाशक ने कहा था. श्वेता […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

विशेष सदाबहार कैलेंडर- 164

1.गुरु ज्ञान का द्वार है, गुरु प्रभु से मिला दे, मुक्ति का अनुभव करवा कर, भय-भ्रम-भेद का भाव मिटा दे. 2.जग को सुरभि दे खुश होना, सीखा हमने गुरुजन से, जैसे वे देते हैं शिक्षा, हमको पूरे तन-मन से. 3.मैं हूं सबकी सखी-सहेली, पुस्तक मेरा नाम है, जग में ज्ञान की ज्योत जलाना, मेरा पावन […]

लघुकथा

और संघर्ष चल पड़ा!

”संघर्ष, संघर्ष, संघर्ष—-जिधर नजर जाती है संघर्ष ही संघर्ष!” भयभीत श्यामली चिल्लाने लगी. ”संघर्ष कौन नहीं करता?” एक आवाज आई. श्यामली चौंक पड़ी. इधर-उधर देखने लगी. कोई दिखाई नहीं दिया, पर ध्वनि मुखर थी. ”संघर्ष के बिना जीना भी कोई जीना है! संघर्ष ही तो असली चुनौती है और आगे बढ़ने और जीतने का संबल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

रोड शो- 10 : बातें प्रेरक व रोचक सुर्खियों की

आज बातें प्रेरक व रोचक सुर्खियों की करते हैं. सबसे पहले पढ़ते हैं एक प्रेरक किस्सा- ”एक मंदिर था। उसमें सब लोग पगार पर काम करते थे। आरती वाला, पूजा कराने वाला आदमी, घंटा बजाने वाला भी पगार पर था… घंटा बजाने वाला आदमी आरती के समय भाव के साथ इतना मशगुल हो जाता था […]

लघुकथा

विजय

आज विजयदशमी का पावन पर्व है. चहुं ओर विजय पर्व का उत्साह है. विजय अंधकार पर प्रकाश की, असत्य पर सत्य की! बलबीर भी सदा से ही विजय का आकांक्षी रहा है और विजय के लिए भरसक प्रयास कर सफलता भी पाता रहा है. बलबीर ने गरीबी और मुफलिसी से लड़कर विजय श्री पाई है. […]

कविता

सदाबहार काव्यालय: तीसरा संकलन- 15

स्वर्णिम समय होता है यों तो हर वेला का अपना ही महत्त्व होता है, पर, कभी-कभी कोई समय इतना विशेष होता है कि स्वर्णिम समय होता है. यों तो मिलने को रोज़ कई लोग मिलते हैं, पर, किसी दिन किसी व्यक्ति विशेष से मिलना स्वर्णिम समय होता है. यों तो हर जन्मदिवस बहुत विशेष होता […]

बाल कविता

बाल गीत: आपके-हमारे- 10

1.टेलीफोन ”हैलो-हैलो, आप हैं कौन?  जल्दी बोलें, रहें न मौन, कैसे पता मुझे लग पाए, किसने किया है टेलीफोन.” ”मैं हूं तेरा नन्हा साथी, आओ खेलें मिल के खेल, मेरे पास है पीली जिप्सी, तुम ले आओ अपनी रेल.” -लीला तिवानी 2.कम्प्यूटर कम्प्यूटर मेरा कम्प्यूटर, करता टक-टक टिक-टिक टर, सबसे प्रमुख भाग जो इसका, कहलाता […]

लघुकथा

स्वाभिमान

”इतना शोर क्यों कर रही हो गौरैयाँ! मुझे वीडियो नहीं सुनाई दे रहा?” उसने कहा. ”तुम लोगों की नादानी के कारण कोरोना आया, लॉकडाउन लगा और बड़ी मुश्किल से हमें शुद्ध हवा में सांस लेने और गाने-गुनगुनाने का मौका मिल रहा है और तुम्हें यह शोर लग रहा है! हम शोर नहीं कर रही हैं, […]

अन्य लेख

विचार विमर्श- 1

आज से हम एक नई श्रंखला शुरु कर रहे हैं. इस श्रंखला में कुछ विचार होंगे और उन पर हमारा विमर्श होगा. आप भी कामेंट्स में अपनी राय लिख सकते हैं- 1.आज के युग में कोई सच्चाई का साथ देता है? सच्चाई का साथ देने के लिए किसी युग विशेष की आवश्यकता नहीं है. आज […]

लघुकथा

अवज्ञा

”मैं सारा दिन आपकी सेवा में मुस्तैद रहती हूं, अगर कभी आपकी आज्ञा नहीं मान पाती, तो इसे अपनी अवज्ञा मत समझिए, मेरी तकनीकी गड़बड़ी को ठीक करवाइए. मुझे अपने इशारों पर चलने वाली कठपुतली मत समझिए.” लिफ़्ट ने कहा. ”मैं अनवरत अपने ताप और प्रकाश का पुञ्ज लेकर आपकी हाजिरी बजाता हूं. अपना सर्वस्व […]