कविता

दिलखुश जुगलबंदी- 23

कोरोना न बने विकराल! जय भारत मैं गाऊं, इस मिट्टी की कसम में खाऊँ, जिस मिट्टी में बड़ा हुआ, उसकी महिमा के गीत सदा गुनगुनाऊँ, -रविंदर सूदन यही तो सच्ची देशभक्ति है, यही देश की शक्ति है, इस मिट्टी की कसम भी खाओ, यही तो प्रेम-अनुरक्ति है. -लीला तिवानी छोटे हैं हम फिर भी जग […]

लघुकथा

नमन!

घड़ी समय है या समय घड़ी यह तो नहीं पता, पर इतना अवश्य पता है कि घड़ी और समय का चोली दामन का साथ है. एक-एक पल से सैकिंड, एक-एक सैकिंड से मिनट, एक-एक मिनट से घंटा, एक-एक घंटे से दिन, एक-एक दिन से सप्ताह, एक-एक सप्ताह से महीना और एक-एक महीने से साल, दशाब्दी, […]

कविता

दिलखुश जुगलबंदी- 22

खुश होकर खुशियां बांटो और खुशियां बढ़ाओ आओ, बनाये रखें फासले अपने लिये, अपनों के लिये धैर्य और धीरज से फासले बनाए रखना मेरे हमराही, फासलों ने थामी, जीवन डोर है रिश्तों में मधुरता भर दिलों को लाया और करीब है -चंचल जैन ये फासले ही हमारी राहत हैं, ये फासले ही हमारी राहत बनेंगे, […]

लघुकथा

तपस्या (लघुकथा)

21 दिन के बाद! 21 दिन के बाद, कोरोना का लगभग खात्मा हो गया था, दुकानें भी सब खुल गई थीं, सिगरेट का खोखा भी खुल गया था. ऑफिस जाते समय मानव ने सिगरेट के खोखे की तरफ देखा भी नहीं, आगे बढ़ गया. ”बाबू सिगरेट तो लेते जाओ!” खोखे के मालिक रतन ने आवाज […]

गीत/नवगीत

कोशिशें

खुशी की बात है खुशियां दूर तक महक लुटाती हैं कि बुलबुल आशियां से आसमां तक उड़ती जाती है- किरण दीपक की कहती है पतंगों से चले आओ किरण सूरज की चुपके-से चमक छितराती जाती है- महक फूलों की कहती है ये भौंरों से चले आओ महक बगिया की चुपके-से महक बिखराती जाती है- ललक […]

लघुकथा

संकट

”संकट जल का हो या सेनेटाइजर का, हैं दोनों ही आत्मघाती!” मोबाइल पर सुबोध ने कोरोना वायरस के कारण मॉल्स में सेनेटाइजर की लगी लंबी लाइन का चित्र भेजते हुए लिखा था. ”दोस्त, अगर हम सचेत नहीं हुए तो एक दिन यही लंबी लाइन पानी के लिए भी लगनी है!” सुकांत ने जवाब में एक […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

खुशी की बात है खुशियां दूर तक महक लुटाती हैं कि बुलबुल आशियां से आसमां तक उड़ती जाती हैं किरण दीपक की कहती है पतंगों से चले आओ किरण सूरज की चुपके-से चमक छितराती जाती हैं महक फूलों की कहती है ये मोरों चले आओ महक बगिया की चुपके-से महक बिखराती जाती है ललक बदरी […]

गीतिका/ग़ज़ल

दिलखुश जुगलबंदी- 21

बैठे-ठाले, दिलखुश जुगलबंदी की महफिल सजा ले 1.कोई हाथ भी ना मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से, यह नये मिज़ाज़ का शहर है, जरा फासले से मिला करो. (बशीर बद्र) इस नये मिज़ाज़ के शहर ने ही तो फासले बना दिए हैं, वरना हमने कब फासलों को दावत दी थी 2.तेरे मेरे दरमियाँ जो फासला […]

लघुकथा

बहाने

जाने कब-कहां-कैसे कोरोना वायरस पनपा, सक्रिय हुआ और फिर प्रदूषण का अनुकूल परिवेश पाकर भगवतीचरण वर्मा की सुप्रसिद्ध कहानी ‘मुगलों ने सल्तनत बख्श दी’ के रबर के तंबू की तरह अपने तंबू को को फैलाता ही गया. महामारी के रूप में अनेक देशों की सैर करता हुआ भारत में भी आ पहुंचा है. कोरोना को […]

कविता

खुश रहने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो!

खुश रहना एक कला है, जो चाहे खुश रह सकता है, जहां चाहे खुश रह सकता है, जैसे चाहे खुश रह सकता है, इसके लिए कोई बहाना नहीं ढूंढना पड़ता, फिर भी जरूरत पड़े तो, खुश रहने का कोई बहाना ढूंढो प्यारो! क्या कहा? सोशल डिस्टेंसिंग से दुःखी हो? अकेलापन महसूस करते हो? सोशल डिस्टेंसिंग […]