शिशुगीत

बुआ

बुआ जब भी आती हैं, खेल-खिलौने लाती हैं, टॉफी-बिस्कुट-कपड़े-मिठाई, चीजें ढेर-सी लाती हैं. ममी कहतीं, ”रोज बुआ से, चीजें लेना ठीक नहीं”, ”मैं मजबूर हूं पर्स बुआ का, चेक किए बिन चैन नहीं.”

शिशुगीत

क्रिकेट

पापा मुझको ला दो बल्ला, मुझे नहीं लेना है छल्ला, अच्छी-सी एक गेंद मंगा दो, क्रिकेट की कुछ बात सिखा दो. ममी जब फैंकेगी गेंद, बल्ले से मैं मारूंगा, आप पकड़ लेना जल्दी से, वरना छक्का कर डालूंगा.   (1978 में लिखी पुस्तक ‘शिशु गीत संग्रह’ से)

लघुकथा

परम संतुष्टि

आज ‘विश्व प्रवासी पक्षी दिवस 11 मई की चित्र क्लिक प्रतियोगिता’ का परिणाम घोषित हुआ था. किशोर के चित्र को प्रथम पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया था. टकटकी लगाकर किशोर अब भी चिड़ियों को खाना खिलाते हुए लोगों के उस चित्र को देखता जा रहा था. बचपन में ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले प्रवासी पक्षी […]

शिशुगीत

पापा का स्कूटर

पीं-पीं-पीं-पीं शोर मचाता, पापा का स्कूटर आया, अब तो खूब मजा आएगा,             सोनू सैर करने जाएगा. ”अभी नहीं उतरूंगा पापा, चक्कर एक और खिलवा दो, अच्छे-अच्छे काम करूंगा, एक बार बस और घुमा दो.”   1978 में लिखी पुस्तक शिशु गीत-संग्रह  से

शिशुगीत

आवाजों की दुनिया

झरना झरता कल-कल-कल-कल, तोपें करतीं गड़-गड़-गड़-गड़, फोन फुदकता टन-टन-टन-टन, जंजीरों की होती खन-खन. सांय-सांय है वायु करती, धम-धम कर बंदूक धमकती, टिक-टिक करती घड़ी हमारी, पौं-पौं-पौं-पौं मोटर करती. 1978 में लिखी पुस्तक शिशु गीत-संग्रह  से

अन्य पुस्तकें ई-बुक

कविता संग्रह- ई. बुक सदाबहार काव्यालय- 2

हमने फिर सदाबहार काव्यालय में प्रकाशन के लिए कविताएं आमंत्रित की थीं, जिसमें जय विजय के लेखकों ने भी अपनी कविताएं भेजी थीं. आज वह सदाबहार काव्यालय- 2 ई.बुक के रूप में प्रकाशित हो गई है. प्रस्तुत है उसका लिंक- ”ई. बुक सदाबहार काव्यालय- 2” का लिंक है-

शिशुगीत

जरूरी है

कोरोना और लॉकडाउन के चलते, अनुशासन का पालन करना जरूरी है, घर की सीमा में सुरक्षित रहना जरूरी है, बिना जरूरत के घर से बाहर न निकलना जरूरी है, दो गज दूरी रखना जरूरी है, मास्क लगाना जरूरी है, हाथों को सेनेटाइज करना जरूरी है, एक दूसरे का हालचाल पूछना जरूरी है, जरूरतमंदों की मदद […]

लघुकथा

चार्जिंग

उसकी अंतिम यात्रा की तैयारी हो रही थी. सभी भावभीनी विदाई दे रहे थे, पर आंटी का कलेजा मुंहं को आ रहा था. काश! उसने उसकी बात सुन-मान ली होती! आंटी ने कितना समझाया था- ”बेटा, चार्जिंग पर फोन लगाकर बात मत किया करो, यह बहुत हानिकारक होता है, मौत भी हो सकती है!” पर […]

शिशुगीत

मोटर कार

पापा ने ली मोटर कार, मोटर में हैं पहिए चार, मोटर की पौं-पौं को सुनकर, सैर को मैं होता तैयार. सड़कों पर चलती है मोटर, गियर से करती है काम, करके शान से इसमें सवारी, मिलता है मुझको आराम.

शिशुगीत

खरगोश

मैं सफेद हूं जैसे दूध, नरम-गुदगुदा जैसे दूब, हरी घास मैं खाता हूं, दाना भी चुग जाता हूं. आंखें लाल हैं मेरी देखो, खूब तेज मैं भगता हूं, जल्दी मेरा नाम बताओ, मैं तुमको क्या लगताहूं? (खरगोश)