लघुकथा

सौभाग्य (लघुकथा)

यों ही कभी-कभी मन में जिज्ञासा की लहर उठती है. उस दिन भी ऐसा ही हुआ. मन में प्रश्न उठा- ”कन्‍हैया अपने शीश पर मोरपंख क्यों सजाते हैं?” श्री कृष्ण जन्माष्टमी जो आने वाली थी! ”मैं बताता हूं, कि श्रीकृष्ण को मोरपंख क्यों इतना प्यारा लगता है.”मोरपंख ने शायद मेरे मन की बात जान ली थी. […]

भजन/भावगीत

फूलों-कलियों ने महफिल सजाई (जन्मदिन-गीत)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष- फूलों-कलियों ने महफिल सजाई, जन्मदिन तेरा है सारी सृष्टि आज महकाई, जन्मदिन तेरा है- अंबर में फैले उजियारे, सूरज चंदा नजर उतारें आज तारों ने महफिल सजाई, जन्मदिन तेरा है फूलों-कलियों ने महफिल सजाई जन्मदिन तेरा है- खुशियों की बारात सजी ऐ शहनाई भी गूंज उठी है आज दीपों […]

बाल कविता

मेरा प्यारा भारत देश

भारत प्यारा देश हमारा, हम सबकी आंखों का तारा, प्यार इसे हम करते हैं, इसकी रक्षा करते हैं. यहां हुए हैं राम-कृष्ण भी, गांधी और बुद्ध यहां हुए, तिलक-गोखले यहां हुए हैं, शास्त्री जी भी यहां हुए. हम सब छोटे बालक हैं पर, प्यार देश को करते हैं, तुम्हीं हो माता-पिता तुम्हीं हो, ऐसा निशिदिन […]

बाल कविता

चार बाल गीत- 2

1.कृष्ण बना दे मां मुझको तू कृष्ण बना दे, देश प्रेम की लगन लगा दे, छोटा-सा पीताम्बर पहना, छोटी-सी वंशी दिलवादे. मोरपंख का मुकुट सजीला, मेरे शीश पे आज सजा दे, माखन-मिश्री खूब खिलाकर, मुझको शक्तिवान बना दे. 2.समय समय बहुत ही है अनमोल देता अनगिन रस्ते खोल समय की सीमा को पहचानो कभी न […]

लघुकथा

सलीका

फूल जानते हैं- कैसे खामोशी-आनंद से खिलना है. नदी समझती है- कैसे भरी बरसात को सहेजना है. सागर को ज्ञात है- कैसे नदियों के असीम प्यार को समेटना है, फिर कभी ज्वार से तो कभी भाटे से सूर्य और चन्द्रमा के आकर्षण बल को संतुलित करना है. सूर्य जानता है- कैसे स्वयं असहनीय तपिश को […]

कविता

सदाबहार काव्यालय: तीसरा संकलन- 4

शिक्षण क्रांति (कविता) जब तक न हुई थी हरित क्रांति, सर्वत्र व्याप्त थी विपदा-भ्रांति, हरित क्रांति से मिली हरीतिमा, अब करनी हमको शिक्षण क्रांति. भटक रहे हैं छात्र हमारे, अनुशासन का काम नहीं है, सभ्यता को भूल गए वे, आदर का तो नाम नहीं है. छात्र पूछ रहे, ”शिक्षा क्या है?” अध्यापक भी समझ न […]

लघुकथा

पंजीरी

”हंसता हुआ नूरानी चेहरा, काली जुल्फें रंग सुनहरा——” शादी वाला घर था, इसलिए थिरकने वाले खुशनुमा गाने बज रहे थे. ”पापा आपकी पसंद का गाना लगा दिया है, आप खुश हो ना!” महेश ने कान से डोरे निरंजन जी से ऊंची आवाज में कहा. ”अच्छा!” निरंजन जी का ध्यान अब गाने की ओर गया. एक […]

हास्य व्यंग्य

बेसन

कोई तीर से घायल होता है कोई तलवार से, हम तो मारे गए चिकने-मुलायम बेसन की मार से. ”वो कैसे?” ”मत पूछिए जनाब!” ”फिर भी बात निकली है तो दूर तलक जाने ही दो!” ”तो सुनो. बेसन की धार को हमने ही आमंत्रित किया था. हुआ यह कि हमेशा की तरह हमने- ”बड़े चाव से […]

लघुकथा

साहस चक्र

बहुत दिनों से दीदी की कमर में दर्द हो रहा था. कुछ सहकर, कुछ हंसकर वे टालती जा रही थीं. ”पैर पर रखकर बैठना न केवल अशोभनीय है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी है. इससे कमर में दर्द की शिकायत हो सकती है.” उसके सामने एक लेख आ गया. दीदी ने तुरंत अपने साहस […]

बाल कविता

बाल गीत: आपके-हमारे- 6

1.तिरंगा तीन रंग का अपना तिरंगा, शान से देखो लहराता, जल-थल-नभ के वीरों से है, इस का अति गहरा नाता.  भारत मां को प्यारा है यह, देती इस को अपना दुलार. बच्चो तुम भी सजगता से, करना तिरंगे का सत्कार तिरंगा अपने देश का मान. खूब है इसकी आन-बान औ’ शान, रखना इसको ऊंचा हरदम, […]