Author :

  • धराशायी

    धराशायी

    तारिका और तारकेश्वर आज फिर एक हो गए थे और अभी-अभी जश्न मनाकर वापिस आए थे. तारकेश्वर अभी भी तारिका के निर्मल सौंदर्य को मुग्ध-सा निहार रहा था, ठीक वैसे ही जैसे बहुत साल पहले जब...

  • संयोग पर संयोग-7

    संयोग पर संयोग-7

    रविंदर भाई से मुलाकात रविंदर भाई, एक जाने-पहचाने आध्यात्मिक व्यक्तित्व का नाम है, जो सभी के दोस्त हैं. उनसे मुलाकात होना भी एक अद्भुत संयोग है, जिसने हमारे आध्यात्मिकता के दीप को और भी प्रज्वलित कर...

  • मनु-मंथन

    मनु-मंथन

    जब भी नारी के सम्मान की बात की जाती है, अनायास ही मनुस्मृति का यह कथन याद आ जाता है- ”यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः.” तब के मनु ने मनुस्मृति में न जाने कितने समय...

  • फिर सदाबहार काव्यालय-3

    फिर सदाबहार काव्यालय-3

    इन्तजार हर पल उसका इन्तजार रहता है, दिल उसके लिए बेकरार रहता है, इन्तजार कभी खत्म न हो, इस बात का हमेशा ख्याल रहता है. हालत कह रहे हैं मुलाक़ात नहीं मुमकिन उम्मीद कह रही है...

  • निष्कर्ष

    निष्कर्ष

    ”तुमने मेरा दामन छोड़ दिया क्या?” भेजे हुए संदेश से उम्मीद तनिक नाउम्मीद दिख रही थी. ”ऐसा कैसे हो सकता है, उम्मीद का दामन छोड़कर तो विश्वास के अस्तित्व की संकल्पना भी नहीं की जा सकती.”...

  • दिलखुश जुगलबंदी

    दिलखुश जुगलबंदी

    गुलिस्तां मेरी सल्तनत है इस सल्तनत के हैं हम बादशाह गुंचे भी मिलेंगे हज़ारों यहां ज़र्रा ज़र्रा घूम के तो देख रात के अंधियारे में तारे भी उतरते हैं हमारी सल्तनत में करते हैं गुफ्तगू चले...

  • खुशी की बरसात

    खुशी की बरसात

    दादा जी की उंगली थामे मोनू घिसटता हुआ बेमन से सैर पर चला जा रहा था. दादा जी ने उसे चुस्ती से चलने को कहा, तो मोनू का गुस्सा फूट पड़ा- ”दादू, यह भी कोई जिंदगी...

  • फिर सदाबहार काव्यालय-2

    फिर सदाबहार काव्यालय-2

    पुस्तकें पुस्तकें पढ़ने के सुख का कोई जवाब नहीं जो कुछ भी न सिखा सके ऐसी कोई किताब नहीं महान लेखकों व महान विचारकों की रचनाएं हम तक पहुंचाती हैं पुस्तकें सही समझ बनाती हैं समझदारी...

  • कमाल के किस्से-15

    कमाल के किस्से-15

    ये कमाल क्या है? कमाल क्यों होता है? कमाल कब होता है? कुछ पता नहीं, पर हो जाता है. चलिए आज हम फिर कमाल की ही बात कर लेते हैं. पहले प्रस्तुत हैं कमाल के किस्से...

  • खामोशी का राज

    खामोशी का राज

    जन्मदिन मनाकर आने के बाद अनिल जी के बेटे-बहू-बच्चों ने जिस तरह से अपनी खुशियों का इज़हार किया था, उससे अनिल जी के मन में अभी भी उत्साह हिलोरें ले रहा था. वे अपने मित्र की योजना...