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  • सदाबहार काव्यालय-45

    सदाबहार काव्यालय-45

    कविता   पल्स पोलियो रविवार   पल्स पोलियो का अभियान, क्यों न बने अपना अभिमान. अगर सफल हो यह अभियान, बने देश के हित वरदान. आज की आवाज़, पोलियो रहित समाज. पोलियो हटाएं, देश को बचाएं....

  • चाहो जो देश का हित

    चाहो जो देश का हित

    मिट्टी की सौंधी खुशबू, जो गीत गा रही है, उस गीत से वतन की, मृदु गंध आ रही है. मिट्टी के इन कणों से, केवल बना न तन है, सुख-दुख मिले इसी से, इस से तरंगित...

  • सीढ़ियां

    सीढ़ियां

    कई दिनों से चाणक्य अपार्टमेंट में रिपेयरिंग का काम चल रहा था. आज वह काम समेट लिया गया. सीढ़ियों का ढेर पड़ा हुआ था. उमेश को उन सीढ़ियों के ढेर की हर सीढ़ी में अपना अतीत...

  • आज के बच्चे कल के नेता

    आज के बच्चे कल के नेता

    आज के बच्चे कल के नेता, आगे बढ़ते जाएंगे देश की सेवा करने हेतु, मिलकर कदम बढ़ाएंगे-   मत समझो हम नन्हे बालक, हम हैं जलती चिनगारी हम ही गगन गुंजा सकते हैं, आज जो भरते...

  • सदाबहार काव्यालय-43

    सदाबहार काव्यालय-43

    गीत   मुक्ति में है मौज बड़ी   मुक्ति में है मौज बड़ी लाती है खुशियों की झड़ी, मुक्ति ही अनमोल रतन है, क्या सुख दे हीरों की लड़ी!     मुक्ति का सुख वह ही...

  • वतन को नमन

    वतन को नमन

    तुझको नमन ऐ मेरे वतन, महिमा तेरी मैं क्या कहूं? तेरे गुणों का गान मैं, हरदम यों ही करती रहूं.   जन्मी यहीं, पली यहीं, खाया यहीं, खेली यहीं, तेरी शरण को छोड़कर, किसकी शरण मैं...

  • चटक वासंती रंग

    चटक वासंती रंग

    केकड़े पकड़कर जीविकोपार्जन करने वाले देवव्रत के हाथ पर मरहम पट्टी हो गई थी और अब डॉक्टर उसके सिर के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश कर रहे थे. अपने शरीर के जख्मों की टीस को...

  • शेर और खरगोश

    शेर और खरगोश

    जंगल एक घना था जिसमें, बब्बर शेर रहा करता था, नित्य जानवरों को खाकर वह, अपना पेट भरा करता था. सभी दुःखी थे उसके डर से, लगे सोचने कोई उपाय, अपना-अपना राग अलापा, अपने-अपने रखे सुझाव....

  • सदाबहार काव्यालय-41

    सदाबहार काव्यालय-41

    गीत   क्यों देश बेचते हो?   ओ देशद्रोही क्यों तुम, अपनों से खेलते हो? क्यों देशद्रोह करके, मानवता बेचते हो?   जिस पर जन्म लिया है, जिसका हो पीते पानी, उस मातृभूमि को तुम, क्या...

  • एक मुट्ठी आसमान

    एक मुट्ठी आसमान

    आज धावक रोजर बैनिस्टर के पास था एक मुट्ठी आसमान और उगते सूरज की लालिमा का मनोरम दृश्य. उसका सपना था-   ”हर कोई चाहता है एक मुट्ठी आसमान, चाहता है मुट्ठी में हो सारा जहान.”...