गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

किसी के दिल में चुपके से रह लेना तो जायज है मगर आने से पहले कुछ इशारे भी किये होते नज़रों से मिली नजरे तो नज़रों में बसी सूरत काश हमको उस खुदाई के नज़ारे भी दिए होते अपना हमसफ़र जाना ,इबादत भी करी जिनकी चलतें दो कदम संग में ,सहारे भी दिए होते जीने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – ये कैसा परिवार

मेरे जिस टुकड़े को दो पल की दूरी बहुत सताती थी जीवन के चौथेपन में अब ,बह सात समन्दर पार हुआ . रिश्तें नातें -प्यार की बातें , इनकी परबाह कौन करें सब कुछ पैसा ले डूबा ,अब जाने क्या ब्यबहार हुआ .. दिल में दर्द नहीं उठता है भूख गरीबी की बातों से धर्म […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वक़्त की साजिश नहीं तो और किया बोले इसे पलकों में सजे सपने ,जब गिरकर चूर हो जाये अक्सर रोशनी में खोटे सिक्के भी चला करते न जाने कब खुदा को क्या मंजूर हो जाए भरोसा है हमें यारो की कल तस्बीर बदलेगी गलतफमी जो अपनी है बह सबकी दूर हो जाये लहू से फिर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जीना अब दुश्बार हुआ अज़ब गज़ब सँसार हुआ रिश्तें नातें प्यार बफ़ा से सबको अब इन्कार हुआ बंगला ,गाड़ी ,बैंक तिजोरी इनसे सबको प्यार हुआ जिनकी ज़िम्मेदारी घर की वह सात समुन्द्र पार हुआ इक घर में दस दस घर देखें अज़ब गज़ब सँसार हुआ मिलने की है आशा जिससे उस से सब को प्यार […]

सामाजिक

स्वाद

उम्र के एक खास पड़ाव तक तो खाने में नए-नए ट्विस्ट चाहिए होते हैं न ! जैसे साऊथ इंडियन, नार्थ इंडियन, चाईनीज़, ये तड़का, वो तड़का, इसका कांबो उसके साथ, टेस्ट के लिए नार्थ इंडियन डिश में साऊथ इंडियन ट्विस्ट, कभी महाराष्ट्रियन तो कभी दाल बाटी, कभी झींगा का कुरकुरापन तो कभी तंदूरी चिकन, कभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर लम्हा तन्हाई का एहसास मुझको होता है जबकि दोस्तों के बीच अपनी गुज़री जिंदगानी है क्यों अपने जिस्म में केवल ,रंगत खून की दिखती औरों का लहू बहता , तो सबके लिए पानी है खुद को भूल जाने की ग़लती सबने कर दी है हर इन्सान की दुनिया में इक जैसी कहानी है दौलत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुम्हारी याद जब आती तो मिल जाती ख़ुशी हमको तुमको पास पायेंगे तो मेरा हाल क्या होगा तुमसे दूर रह करके तुम्हारी याद आती है मेरे पास तुम होगें तो यादों का फिर क्या होगा तुम्हारी मोहनी सूरत तो हर पल आँख में रहती दिल में जो बसी सूरत उस सूरत का फिर क्या होगा […]

गीतिका/ग़ज़ल

अच्छा है

चेहरे की हक़ीक़त को समझ जाओ तो अच्छा है तन्हाई के आलम में ये अक्सर बदल जाता है मिली दौलत ,मिली शोहरत,मिला है मान उसको क्यों मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है क्या बताये आपको हम अपने दिल की दास्ताँ किसी पत्थर की मूरत पर ये अक्सर मचल जाता है किसी का दर्द पाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल (शायद दर्द से अपने रिश्ते पुराने लगते हैं)

वो हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं जब हक़ीकत हम उनको समझाने लगते हैं जिस गलती पर हमको वो समझाने लगते है उस गलती को फिर क्यों दोहराने लगते हैं दर्द आज खिंच कर मेरे पास आने लगते हैं शायद दर्द से अपने रिश्ते पुराने लगते हैं क्यों मुहब्बत के गज़ब अब फ़साने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुशबुओं  की   बस्ती में  रहता  प्यार  मेरा  है आज प्यारे प्यारे सपनो ने आकर के मुझको घेरा है उनकी सूरत का आँखों में हर पल हुआ यूँ बसेरा है अब काली काली रातो में मुझको दीखता नहीं अँधेरा है जब जब देखा हमने दिल को ,ये लगता नहीं मेरा है प्यार पाया जब से उनका […]