गीतिका/ग़ज़ल

बोलेंगे जो भी हमसे वो हम ऐतवार कर लेगें

बोलेंगे जो भी हमसे वो हम ऐतवार कर लेगेंजो कुछ भी उनको प्यारा है हम उनसे प्यार कर लेगें वो मेरे पास आयेंगे ये सुनकर के ही सपनो मेंक़यामत से क़यामत तक हम इंतजार कर लेगें मेरे जो भी सपने है और सपनों में जो सूरत हैउसे दिल में हम सज़ा करके नजरें चार कर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है

दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है अपनों संग समय गुजरे इससे बेहतर क्या होगा कोई तन्हा रहना नहीं चाहें मजबूरी बनाती है किसी के हाल पर यारों,कौन कब आसूँ बहाता है बिना मेहनत के मंजिल कब किसके हाथ आती है क्यों हर कोई […]

गीतिका/ग़ज़ल

देखना है गर उन्हें ,साधारण दर्जें की रेल देखिये

साम्प्रदायिक कहकर जिससे दूर दूर रहते थे राजनीती में कोई अछूत नहीं ,ये खेल देखिये दूध मंहगा प्याज मंहगा और जीना मंहगा हो गया छोड़ दो गाड़ी से जाना ,मँहगा अब तेल देखिये कल तलक थे साथ जिसके, आज उससे दूर हैं सेक्युलर कम्युनल का ऐसा घालमेल देखिये हो गए कैसे चलन अब आजकल गुरूओं […]

गीतिका/ग़ज़ल

बँट गयी सारी जमी फिर बँट गया ये आसमान

प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हम दर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल से दर्द का तोहफा मिला हमको दोस्ती के नाम पर दोस्तों के बीच में हम जी रहे थे भूल से बँट गयी सारी जमी फिर बँट गया ये आसमान अब खुदा बँटने लगा है इस तरह […]

गीतिका/ग़ज़ल

क़यामत से क़यामत तक हम इन्तजार कर लेंगें

बोलेंगे जो भी हमसे वो हम ऐतवार कर लेगें जो कुछ भी उनको प्यारा है हम उनसे प्यार कर लेगें वो मेरे पास आयेंगे ये सुनकर के ही सपनो में क़यामत से क़यामत तक हम इंतजार कर लेगें मेरे जो भी सपने है और सपनों में जो सूरत है उसे दिल में हम सज़ा करके […]

गीतिका/ग़ज़ल

अब सन्नाटे के घेरे में ,जरुरत भर ही आबाजें

कंक्रीटों के जंगल में नहीं लगता है मन अपना जमीं भी हो गगन भी हो ऐसा घर बनाते हैं ना ही रोशनी आये ,ना खुशबु ही बिखर पाये हालत देखकर घर की पक्षी भी लजाते हैं दीबारें ही दीवारें नजर आये घरों में क्यों पड़ोसी से मिले नजरें तो कैसे मुहँ बनाते हैं मिलने का […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल (किस ज़माने की बात करते हो )

किस ज़माने की बात करते हो रिश्तें निभाने की बात करते हो अहसान ज़माने का है यार मुझ पर क्यों राय भुलाने की बात करते हो जिसे देखे हुए हो गया अर्सा मुझे दिल में समाने की बात करते हो तन्हा गुजरी है उम्र क्या कहिये जज़्बात दबाने की बात करते हो गर तेरा संग […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिसे देखिये चला रहा है सारे तीर अँधेरे में

क्या सच्चा है क्या है झूठा अंतर करना नामुमकिन है. हमने खुद को पाया है बस खुदगर्जी के घेरे में .. एक जमी वख्शी थी कुदरत ने हमको यारो लेकिन हमने सब कुछ बाट दिया है मेरे में और तेरे में आज नजर आती मायूसी मानबता के चहेरे पर अपराधी को शरण मिली है आज […]

गीतिका/ग़ज़ल

अमन चैन से रहने बाले दंगे से दो चार हुए

कुर्सी और वोट की खातिर काट काट के सूबे बनते नेताओं के जाने कैसे कैसे , अब ब्यबहार हुए दिल्ली में कोई भूखा बैठा, कोई अनशन पर बैठ गया भूख किसे कहतें हैं नेता उससे अब दो चार हुए नेता क्या अभिनेता क्या अफसर हो या साधू जी पग धरते ही जेल के अन्दर सब […]

गीतिका/ग़ज़ल

किस को गैर कहदे हम और किसको मान ले अपना

दुनिया में जिधर देखो हजारो रास्ते दीखते मंजिल जिनसे मिल जाए बह रास्ते नहीं मिलते किस को गैर कहदे हम और किसको मान ले अपना मिलते हाथ सबसे हैं दिल से दिल नहीं मिलते करी थी प्यार की बाते कभी हमने भी फूलो से शिकायत सबको उनसे है क़ी उनके लब नहीं हिलते ज़माने की […]