गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुम्हारी याद जब आती तो मिल जाती ख़ुशी हमको तुमको पास पायेंगे तो मेरा हाल क्या होगा तुमसे दूर रह करके तुम्हारी याद आती है मेरे पास तुम होगें तो यादों का फिर क्या होगा तुम्हारी मोहनी सूरत तो हर पल आँख में रहती दिल में जो बसी सूरत उस सूरत का फिर क्या होगा […]

गीतिका/ग़ज़ल

अच्छा है

चेहरे की हक़ीक़त को समझ जाओ तो अच्छा है तन्हाई के आलम में ये अक्सर बदल जाता है मिली दौलत ,मिली शोहरत,मिला है मान उसको क्यों मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है क्या बताये आपको हम अपने दिल की दास्ताँ किसी पत्थर की मूरत पर ये अक्सर मचल जाता है किसी का दर्द पाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल (शायद दर्द से अपने रिश्ते पुराने लगते हैं)

वो हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं जब हक़ीकत हम उनको समझाने लगते हैं जिस गलती पर हमको वो समझाने लगते है उस गलती को फिर क्यों दोहराने लगते हैं दर्द आज खिंच कर मेरे पास आने लगते हैं शायद दर्द से अपने रिश्ते पुराने लगते हैं क्यों मुहब्बत के गज़ब अब फ़साने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुशबुओं  की   बस्ती में  रहता  प्यार  मेरा  है आज प्यारे प्यारे सपनो ने आकर के मुझको घेरा है उनकी सूरत का आँखों में हर पल हुआ यूँ बसेरा है अब काली काली रातो में मुझको दीखता नहीं अँधेरा है जब जब देखा हमने दिल को ,ये लगता नहीं मेरा है प्यार पाया जब से उनका […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

क्या सच्चा है क्या है झूठा अंतर करना नामुमकिन है. हमने खुद को पाया है बस खुदगर्जी के घेरे में .. एक जमी बक्शी  थी कुदरत ने हमको यारो लेकिन हमने सब कुछ बाट दिया मेरे में और तेरे में आज नजर आती मायूसी मानाबता के चहेरे पर अपराधी को सरण मिली है आज पुलिस […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सुबह हुयी और बोर हो गए जीवन में अब सार नहीं है रिश्तें अपना मूल्य खो रहे अपनों में वो प्यार नहीं है जो दादा के दादा ने देखा अब बैसा संसार नहीं है खुद ही झेली मुश्किल सबने संकट में परिवार नहीं है सब सिस्टम का रोना रोते खुद बदलें ,तैयार नहीं है मेहनत […]

गीतिका/ग़ज़ल

बोलेंगे जो भी हमसे वो हम ऐतवार कर लेगें

बोलेंगे जो भी हमसे वो हम ऐतवार कर लेगेंजो कुछ भी उनको प्यारा है हम उनसे प्यार कर लेगें वो मेरे पास आयेंगे ये सुनकर के ही सपनो मेंक़यामत से क़यामत तक हम इंतजार कर लेगें मेरे जो भी सपने है और सपनों में जो सूरत हैउसे दिल में हम सज़ा करके नजरें चार कर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है

दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है अपनों संग समय गुजरे इससे बेहतर क्या होगा कोई तन्हा रहना नहीं चाहें मजबूरी बनाती है किसी के हाल पर यारों,कौन कब आसूँ बहाता है बिना मेहनत के मंजिल कब किसके हाथ आती है क्यों हर कोई […]

गीतिका/ग़ज़ल

देखना है गर उन्हें ,साधारण दर्जें की रेल देखिये

साम्प्रदायिक कहकर जिससे दूर दूर रहते थे राजनीती में कोई अछूत नहीं ,ये खेल देखिये दूध मंहगा प्याज मंहगा और जीना मंहगा हो गया छोड़ दो गाड़ी से जाना ,मँहगा अब तेल देखिये कल तलक थे साथ जिसके, आज उससे दूर हैं सेक्युलर कम्युनल का ऐसा घालमेल देखिये हो गए कैसे चलन अब आजकल गुरूओं […]

गीतिका/ग़ज़ल

बँट गयी सारी जमी फिर बँट गया ये आसमान

प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हम दर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल से दर्द का तोहफा मिला हमको दोस्ती के नाम पर दोस्तों के बीच में हम जी रहे थे भूल से बँट गयी सारी जमी फिर बँट गया ये आसमान अब खुदा बँटने लगा है इस तरह […]