कविता

औरत के ख्वाब 

यकीनन तेरे भी तो ख्वाब होंगे, तेरी उम्मीदें हिमालय से बड़ी होंगीं, कहीं ये रस्म-ओ-रिवाज अड़े होंगे, कहीं तेरी सामने उम्मीदें खड़ी होंगीं। उम्मीद एक माँ की , मेरी बेटी अपने पँख नोच लेगी, उम्मीदें एक बाप की , मेरी बेटी आगे की सोच लेगी, उम्मीदें एक भाई की , मेरी बहन मुझसे ऊंचा कद […]

कविता

आँखों को और ख्व़ाब मत दिखाओ 

इन आँखों को और ख्व़ाब मत दिखाओ, तल्ख ही सही इन्हें हकीकत तो बताओ । ये मुल्क अब चंद लोगो की मिलकियत है, गरीबों को मुल्क का मालिक तो न बताओ। तुम जितने चाहे और झूठ बहकाओ, हमारे घर-बार खेत-खलिहान लूट के ले जाओ, हम मुंह खोलें तो गोलियां चलवाओ, हमारी इज्जत से खेलो,गांवों को […]

कविता

औरत की अंतर्कथा 

तुम गाते रहते हो गीत, बताते रहते हो आफताब मुझे, दर-हकीकत तुम्हारे लिए क्या हूँ, बस इतना दो जवाब मुझे। तुम मेरे जिस्म से भीतर, झांकते तो हो, पर थक कर रुक जाते हो, ऊपरी सतह पर। कभी अन्दर तक उतरो तो सही, मेरे भीतर डरी सहमी उम्मीदों के, रास्ते से कभी गुजरो तो सही, […]

कविता

तेरी आवाज

आज मुद्दतों के बाद, तेरी आवाज सुनी, कितनी अजनबी सी लगी, बड़ी गैर की सी लगी. तेरी आवाज जिसे सुनके, दिल में खुशी की लहर आती थी, तेरी आवाज जिन्दगी भरी, आँखों में सपने दिया करती थी, तेरी आवाज खनक भरी, मेरी उम्मीदों को नगमें दिया करती थी, पर आज मुद्दतों के बाद, तेरी आवाज […]