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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ख्वाहिशों के इन परिन्दों को उड़ाने दे जरा अपनी आभा आसमानों तक बढ़ाने दे जरा मुश्किलों का दौर गर आए तो आने उसे उनको भी अपने इरादों को चढ़ाने दे जरा राह हो कांटों भरी या...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    किसी की याद में अक्सर तड़पना ठीक लगता है कोई जब दूर जाये तो तरसना ठीक लगता है परिन्दों को कफ़स की तीलियों से दूर ही रखना खुले आकाश में इनका चहकना ठीक लगता है तुम्हें...

  • सीख

    सीख

    चींटी से सीखी हैं मैंने निरन्तर बढ़ने की कला गिर के संभलना संभल कर फिर चढ़ना धैर्य के साथ चलते रहना और बार बार संभलने की कला राह में अवरोध भले हो चाहे हो डगर कांटों...

  • पलों का खेल

    पलों का खेल

    पल-पल मे बदले जिंदगानी पल मे मिले खुशियां अपार पल मे बिखर जाता संसार पलों का अद्भुत खेल ये देखा पलों पर टिका जिंदगी का मेला पल में  तोला पल मे माशा हैं अजब जीवन का...

  • सूरज

    सूरज

    प्रगाढ़ प्रेम के परिचायक हो भानु तुम सदियों से धरा का आंचल स्नेह की हरियाली से भरते आये हो कण कण पुलकित तुमसे हर जीव के तुम सरमाये हो रश्मियों का पहरा भोर में हर कली...

  • नैना

    नैना

    कभी उठती-कभी झुकती शर्म से सराबोर ये नैना कभी जलती कभी बुझती दीये की कोर ये नैना कभी चलती कभी थमती नदी का छोर ये नैना कभी जगती कभी सोती बड़े चितचोर ये नैना कभी इत...

  • मुखौटा

    मुखौटा

    मुखौटा तूने ओढा है मुखौटा मैंने ओढा है मगर नजरें तो सारे भेद जानती हैं सुन हंसी तेरी भी मुखरती हैं हंसी मेरी मुखरती हैं दिलों की चोट से हमदम कहां अनजान हैं हम सुन पिघलति...

  • कलम कोई थमा दे आज

    कलम कोई थमा दे आज

    मेरे इन नन्हें हाथों में कलम कोई थमा दे आज मुझे भी शिक्षा का पावन मार्ग कोई बतलादे आज जो हैं सौदागर इस जग के जिनकी सब जयकार करें हाथ रखे सर पर हमारे कुछ तो स्नेह...

  • मेरे घर का किवाड़

    मेरे घर का किवाड़

    मेरे घर का किवाड़ आज भी बुला रहा है मुझे अपनी चरमराहट से बैचेन होकर देख रहा है किसी न किसी आहट पे बचपन सारा बीत गया उसकी ओट मे लुक छिपकर कभी हंसती हुई कनखियों...