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  • लघुकथा

    लघुकथा

    सखी रे, मोरा नैहर छूटा जाए फूल लोढ़ने की डलिया हर सुबह, बसंती के हाथों में उछल- ककूदकर अपने आप ही आ जाती है मानों उसके नित्य के दैनिक कर्म में यह एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर...

  • “त्रिभंगी छंद”

    “त्रिभंगी छंद”

    हे नयना नागर, सब गुन आगर गिरिवर धारक, खल हंता।। हे नियति नियंता, अति बलवंता छमहु महंता, सुख कंता।। प्रभु विरल मनोरम, गँवई गमनम अपलक चितवन, छवि न्यारी।। हे राधा रमणम, मम चित शरणम कोमल चरणम,...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    खुशी मिलती कहाँ कोई बता तो दे ठिकाने को सजा लू ढूंढकर उसको पता तो दे बिराने को उसी की ताक में रहते उसी से दिल लगा बैठे कहाँ रहती प्रसन्ना वह मुकामे खिल खिलाने को॥...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    वरगद अब बूढ़ा हुआ, हो गइ बूढ़ी छांव गलियाँ सूनी हो गई, बिन चौपाली गाँव बिन चौपाली गाँव, घोसले शहर सरकते बित्ते भर के पाँव, घाव ले दर्द भटकते गौतम किधर मचान, कहाँ है वर तर...

  • “हाइकू”

    “हाइकू”

    जुते हुए हैं गज भर जमीन खुदी धरती॥-1 काली घटा है छाँव छत छप्पर मन आतुर॥-2 बढ़ती गर्मी वर्फ पिघलते हैं सूखते होठ॥-3 सिकुड़े नैन आस आसमान है बूंद टपके ॥-4 नाचने मोर पहली बरसात दिखे...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    देख रहा हूँ आज तुझे मैं अपने उन निगाहों में छोड़ गए तुम अंगुली को छिछले मन प्रवाहों में याद करो न थी कोई खींचातानी मयखानों की थी न कोई वला गिला नाहीं शिकन परवाहों में॥...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    आप की आज छवि देखता रह गया उन निगाहों में हवि फेंकता रह गया जो दिखा देखने की न आदत रही फिर फिरा के नयन पोछता रह गया॥ ले उड़ी शौक रंगत नयी रोशनी उस दिशा...

  • लघु कथा…….

    लघु कथा…….

    “हीत मीत नात घर जोहा, तब खेतन में मुजहँन शोहा” मटका का कुर्ता और परमसुख की धोती झहरा के झिनकू भैया, पान दबाये, मुस्की मारते हुए खूब झलक रहे थे। बहुत दिनों बाद नबाबी लिवास में...

  • “मकरंद छंद”

    “मकरंद छंद”

    नयन सुखारे, वचन विचारे बुधि सुधि सब सुख, हरि चित लाए। लय बिन रागा, विचलित कागा चरन कमल प्रभु, रिधि सिधि छाए।। विनय विशाला, नयन रसाला अधरन मृदु रस, मन मन भाए। पुलक शरीरा, रमत फकीरा...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    यहीं पर था सरोवर एक पानी पी गए कौए नए जोड़े मिले थे दो किनारे खो गए हौए बड़े पोखर मिला करते लिए अपनी तलैया को अभी की हाल देखो तो सुराही पी गए पौए॥ बहुत...