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  • छंदमुक्त काव्य

    छंदमुक्त काव्य

    रंगोत्सव पर प्रस्तुत छंदमुक्त काव्य…… ॐ जय माँ शारदा……! “छंदमुक्त काव्य” मेरे आँगन की चहकती बुलबुल मेरे बैठक की महकती खुश्बू मेरे ड्योढ़ी की खनकती झूमर आ तनिक नजदीक तो बैठ देख! तेरे गजरे के फूल...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    आप व आप के पूरे परिवार को मुबारक हो फागुन की होली……. मुक्तक मुरली की बोली और राधा की झोली। गोपी का झुंड और ग्वाला की टोली। कान्हा की अदाएं व नंद जी का द्वार- पनघट...

  • अरविंद सवैया

    अरविंद सवैया

    अरविंद सवैया[ सगण ११२ x ८ +लघु ] सरल मापनी — 112/112/112/112/112/112/112/112/1 “अरविंद सवैया” ऋतुराज मिला मधुमास खिला मिल ले सजनी सजना फगुहार। प्रति डाल झुकी कलियाँ कुमली प्रिय फूल फुले महके कचनार। रसना मधुरी मधुपान...

  • छंदमुक्त काव्य

    छंदमुक्त काव्य

    फागुनी बहार “छंदमुक्त काव्य” मटर की फली सी चने की लदी डली सी कोमल मुलायम पंखुड़ी लिए तू रंग लगाती हुई चुलबुली है फागुन के अबीर सी भली है।। होली की धूल सी गुलाब के फूल...

  • गीतिका

    गीतिका

    मापनी -1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना   “गीतिका”   अजी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जाना घुमाओ मत हवाओं को सुनो किरदार हो जाना वहाँ देखों गिरे हैं...

  • मदिरा सवैया

    मदिरा सवैया

    “छंद मदिरा सवैया” वाद हुआ न विवाद हुआ, सखि गाल फुला फिरती अँगना। मादक नैन चुराय रहीं, दिखलावत तैं हँसती कँगना।। नाचत गावत लाल लली, छुपि पाँव महावर का रँगना। भूलत भान बुझावत हौ, कस नारि...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    “मुक्तक” हार-जीत के द्वंद में, लड़ते रहे अनेक। किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक। बर्छी भाला फेंक दो, विषधर हुई उड़ान- महँगे खर्च सता रहे, छोड़ो युद्ध विवेक।।-1 हार-जीत किसको फली, ऊसर हुई जमीन। युग...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    चादर ओढ़े सो रहा, कुदरत का खलिहान। सूरज चंदा से कहे, ठिठुरा सकल जहान।। ठिठुरा सकल जहान, गिरी है बर्फ चमन में। घाटी की पहचान, खलल मत डाल अमन में।। कह गौतम कविराय, करो ऋतुओं का...

  • हाइकु

    हाइकु

    ठंडी की ऋतु घर घर अलाव बुझती आग।।-1 गैस का चूल्हा न आग न अलाव ठिठुरे हाथ।।-2 नया जमाना सुलगता हीटर धुआँ अलाव।।-3 नोटा का कोटा असर दिखलाया मुरझा फूल।।-4 खिला गुलाब उलझा हुआ काँटा मूर्छित...

  • गीतिका

    गीतिका

    “गीतिका” पाँव के संग पायल खनकती सखी देख नथ मोर घायल सुलगती सखी आज तड़के सवेरे नजर लड़ गयी होठ लाली लुभायल ललकती सखी।। काश होते सजन घर अंगना मिरे साध मन की पुरायल सँवरती सखी।।...