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  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    छंद – दिग्पाल /मृदुगति (मापनी युक्त मात्रिक छंद )मापनी -221 2122 , 221 2122 मौसम बहुत सुहाना, मन को लुभा रहा है डाली झुकी लचककर, फल फूल छा रहा है मानों गरम हवा यह, गेसू सुखा...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    छंद ‘’वाचिक स्रिग्वणी’’ मापनी- 212 212 212 212,पदांत- लिए, समांत- आरे जा रहे हो किधर दर्द सारे लिए छोड़ जाओ दवा है हमारे लिए सह न पाती सहुलियत इस मर्ज को खिल सकी क्या शमा भग्न...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    मौसम होता प्रौढ़ है, कर लेता पहचान चलती पथ पर सायकल, डगर कहाँ अनजान डगर कहां अनजान, बचपनी साथी राहें संग मुलायम भाव, लौह से लड़ती चाहें कह गौतम कविराय, प्यार तो जीवन सौ सम चक्र...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    सुधबुध वापस आय, करो कुछ मनन निराला। जीत गई है हार, भार किसके शिर डाला। मीठी लगती खीर, उबल चावल पक जाता- रहा दूध का दूध, सत्य शिव विजय विशाला॥-1 हम बचपन के साथी क्या डगर...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    देखों वो जा रहें हैं लगते नहा नहा के आँचल उठाए कर से पानी बहा बहा के फैली हुई हैं बूँदें लट गेशू भिगा रही है उठते हैं पाँव पानी चले मानों थहा थहा के॥ अरमान...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    है सुख नगर बिनाघर किरायेदार आनंदातिरेक प्रलोभन प्रत्येक॥-1 है छद्म छलावा हर्षोत्कर्ष कल उत्कर्ष हृदय कस्तुरी वन नाचे मयूरी॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख-...

  •  “गीतिका”

     “गीतिका”

    छंद – आनंदवर्धक,मापनी- 2122 2122 212,पदांत- नहीं,समांत- अहरी रात की यह कालिमा प्रहरी नहीं दिन उजाले में डगर ठहरी नहीं आज वो भी छुप गए सुबहा हुई जो जगाते समय को पहरी नहीं॥ रोशनी है ले...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    रे माँ तेरे आँचल का जब कोई पारावार नहीं जननी तेरी यादों बिन अब कोई शाम सवार नहीं जब तक थी तू माँ आँगन में तबतक ही तो बचपन था देकर गई आशीष अनेका पर अब...

  • “रोला छंद”

    “रोला छंद”

    जय जय सीताराम, नाम जप लो अनुसारी। रटती रसना नाम, सियापति अवध बिहारी।। राधे राधे श्याम, गीर धरि नख गिरधारी। भाग कालिया भाग, नाग नथ नथें मुरारी।।-1 गौरी पति महादेव, आप शिव गौरीशंकर। देवों के प्रभु...