मुक्तक/दोहा

मुक्तक

 हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई ( “हिंदी है पहचान हमारी” शब्द साधना सबसे न्यारी” “मुक्तक” हिंदी ही पहचान है, हिंदी ही अभिमान। कई सहेली बोलियाँ, मिलजुल करती गान। राग पंथ कितने यहाँ, फिर भी भारत एक- एक सूत्र मनके कई, हिंदी हुनर महान।।-1 एक वृक्ष है बाग का, डाल डाल फलदार। एक शब्द है ब्रम्ह […]

मुक्तक/दोहा

दोहा

“दोहा” पूण्य मास सावन सखी, देता बहुत सकून। देखो अपने बाग में, हिल-मिल खिले प्रसून।।-1 झूलूँ झूला सजन सह, कजरी गाएँ लोग। ढ़ोल मजीरा हाथ में, कथा श्रवण मनभोग।।-2 कदम डाल मिलती कहाँ, कहाँ खिले मधुमास। पवन बतकही में मगन, ऋतु करती आभास।।-3 धन्य शिवाला धाम में, फूलों की भरमार। दूध पूत अविरत बहे, पर […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

“मुक्तक” राखी में इसबार प्रिय, नहीं गलेगी दाल। जाऊँगी मयके सजन, लेकर राखी लाल। बना रखी हूँ राखियाँ, वीरों से है प्यार- चाल चीन की पातकी, फुला रहा है गाल।। सीमा पर भाई खड़े, घर में मातर धाम। वर्षा ऋतु राखी लिए, बुला रही ले नाम। भैया अपने हाथ से, बाँध रही हूँ स्नेह- क्या […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

“मुक्तक” चलो अब जा मिलें उनसे जो यादों में विचरते हैं। कभी अपने रहें होंगे तभी दर पर भटकते हैं। सुना है वक्त अपने आप भर देता है जख्मों को- मगर निशान हैं अपने जो उड़ उड़ कर दहकते हैं।। गर्वित है यह दिन सखे, गर्वित है यह रात। इसी निशा के गर्भ में, थी […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

“मुक्तक” बादल वर्षा ले गया, हर्षित लाली व्योम। रविकर की अद्भुत छटा, चिपका तन में रोम। हरियाली गदगद हुई, आयी भाद्री तीज- राधे चित मुस्कान मुख, ऋतु अनुलोम विलोम।। सजनी साजन के लिए, है निर्जल उपवास। प्यास लगी मन जोर की, पति पूजा है खास। बिन साजन पावस कहाँ, पत्नी बिनु कहँ चैन- माँ भारत […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

आज गर्मी ने किया बेहाल है। रे कोरोना अब तेरा क्या हाल है। घूम आया विश्व में कुंहराम कर- देख भारत में रुकी वह चाल है।। सिर झुका कर जा जहाँ से आया था। रे कोरोना जा जहाँ तू जाया था। आदमी को आश्रय देता भारत है- चीन बौना है तुझे भरमाया था।। महातम मिश्र, […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

कोरोना है साहब,  दो मीटर की दूरी बनाएं रखें और मास्क पहनना न भूलें। “गीतिका” सोचता हूँ क्या जमाना फिर नगर को जाएगा जिस जगह से भिनभिनाया उस डगर को जाएगा चल पड़े कितने मुसाफिर पाँव लेकर गांवों में क्या मिला मरहम घरों से जो शहर को जाएगा।। रोज रोटी की कवायत भूख पर पैबंदियाँ जल […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

“गीतिका” नदियों में वो धार कहाँ से लाऊँ राधा जैसा प्यार कहाँ से लाऊँ कैसे कैसे मिलती मन की मंजिल आँगन में परिवार कहाँ से लाऊँ।। सबका घर है मंदिर कहते सारे मंदिर में करतार कहाँ से लाऊँ।। छूना है आकाश सभी को पल में चेतक सी रफ्तार कहाँ से लाऊँ।। सपने सुंदर आँखों में […]

कविता

दोहा

तेरे बहिष्कार का आगाज़ भारत की जनता व सरकार दोनों ने कर दिया है रे पापी चीन, अब तेरा क्या होगा कालिया…….धाँय धाँय धाँय…….? “दोहा” उतर गया तू नजर से, औने बौने चीन। फेंक दिया भारत तुझे, जैसे खाली टीन।। नजर नहीं तेरी सही, घटिया तेरा माल। सुन ले ड्रेगन कान से, बिगड़ी तेरी चाल।। […]

कविता

कुंडलिया

“कुंडलिया” मधुवन में हैं गोपियाँ, गोकुल वाले श्याम। रास रचाने के लिए, है बरसाने ग्राम।। है बरसाने ग्राम, नाम राधिका कुमारी। डाल कदम की डाल, झूलती झूला प्यारी।। कह गौतम कविराय, बजा दो वंशी उपवन। गोवर्धन गिरिराज, आज फिर आओ मधुवन।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी