हाइकु/सेदोका

“हाइकु”

चुनावी जोश खोता जा रहा होश है अफसोस।।-1 नेता जी आए वादे गुनगुनाए क्या मन भाए।।-2 फ्री का राशन इतराए शाशन भरा वासन।।-3 हिंदू हिंदुत्व जानी मानी आकृत छद्मि प्रवृत्ति।।-4 वोट के लाले मतलबी निवाले हैं दिलवाले।।-5 महातम मिश्र “गौतम” गोरखपुरी

मुक्तक/दोहा

“दोहा”

गन्ने में गुण बहुत है, पत्ता जिसका ढीठ। तना तृप्त अमृत लिए, बरसाए रस मीठ।।-1 कटहल के जड़ मूल में, फल आता है खूब। दोष मगर मीठा बहुत, दर पर हितकर दूब।।-2 आम काम का पेड़ है, फल से करे निहाल। रूप रंग अति शोभनम, परमारथ हित लाल।।-3 नीम भीम सी है बली, फल तीखा […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

राजनीति पर क्या कहें, उलझी है चहुँ ओर। है चुनाव अति कीमती, सस्ती वाणी शोर। भाड़े की जिस भीड़ पर, ठोंक रहे सब ताल- उ न्हें समझ पाना भला, किसके बस में मोर।। मृग मरीचिका जानते, रजनेता बड़ तेज। सभी सुनाते मंच से, दे दो कुर्सी मेज। ले लो पुड़िया हींग की, देती बढ़िया स्वाद- […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

नशा नाश करता भवन, और जलाता खून। बिनु इसके जी देखिए, स्वाद बढ़ाता नून। आदत भली कभी नहीं, रुक रुक पीजै दूध- मदिरा थी औषधि कभी, पान बिना विष चून।।-1 अब शराब में दम कहाँ, खौल रहा है खून। दुबला पतला आदमी, पानी पीता भून। नशा दशा से कह रही, पी मत प्यारे मूल- गल […]

कुण्डली/छंद

कुंडलिया

आते जाते राह में, मिलते बहुत निशान। आँगन घर दालान में, संस्कार सम्मान।। संस्कार सम्मान, छाप पद चिन्हों की नित। मातु पिता के गीत, रीति कुल की सबके हित।। सुन ले ‘गौतम’ सार, प्यार कर गाते गाते। छोड़ दिलों पर छाप, डगर पर आते जाते।। महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

आज के सुख सेज से सहमत नहीं हैं हम। मुफ्त में मिलती नियामत खुश नही है हम। कुंद है अहसास दुखदायी वसीयत है- घास उगती है कहाँ हकुमत नहीं हैं हम।। पास मेरे क्या रहा गुमनाम जिंदगी। हास औ परिहास में मतलब नहीं हैं हम।। प्यास जिह्वा को लगी पर होठ सूखते। क्यों न कर […]

मुक्तक/दोहा

दोहा

हिम्मत से दरिया तरें, कठिन समय का दौर। राम विवश वन वन फिरे, मर्यादा शिरमौर।।-1 हाथ जोड़कर दूर से, करते रहें प्रणाम। लक्ष्मण रेखा में रहे, घर मंदिर चित राम।।-2 समय न रुकता है कभी, अच्छा हो या क्रूर दिन के ढलते रात है, रात ढले पर नूर।।-3 हिम्मत से ही आदमी, चढ़ता कठिन पहाड़। […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

“गीतिका” दरवाजे पर ओस गिरी थी खलिहानों में कोश गिरी थी दिल्ली की सड़कों पर रेला आंदोलन की धौस गिरी थी।। बहुत मनाया सबने मन को उठा पटक में रोष गिरी थी।। कसक मसक कर रात गुजरती दिन निकला पर जोश गिरी थी।। गरम रजाई और दुशाला ब्रेड बटर पर सोस गिरी थी।। धन सबका […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

“गीतिका” देख रहे सब नित एक ख्वाब मैं माली और मेरा गुलाब हाथों में जहमत का प्याला मर्म सुकर्म पै चढ़ी शराब।। देखो कितने पेड़ धरा पर जश्न जतन बिन हुए खराब।। नहीं नाचते मोर वनों में कौन बाँचता खुली किताब।। सेल फोन पर सुबह सुहानी शाम थिरकती लिए ख़िताब।। नई फसल जल राख हो […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

“मुक्तक” सु-लोहड़ी खिचड़ी गई, अब शुभ प्रयाग स्नान। गंगा जी के धाम में, बिन आधार न दान। बिनु कोरोना जाँच के, सुखी न संगम द्वार- रोज सभाएँ हो रहीं, धरना धर्म किसान।।-1 बंधन हिंदू धर्म पर, लगता है चहुँ ओर। बिनु मुर्गे की बाग के, कहाँ द्वार पर भोर। पौराणिक मेला स्वयं, भरता है प्रति […]