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  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    चैत्री नव रात्रि परम, परम मातु नवरूप। एक्कम से नवमी सुदी, दर्शन दिव्य अनूप।। दर्शन दिव्य अनूप, आरती संध्या पावन। स्वागत पुष्प शृंगार, धार सर्वत्र सुहावन।। कह गौतम कविराय, धर्म से कर नर मैत्री। नव ऋतु...

  • छंदमुक्त काव्य

    छंदमुक्त काव्य

    “विधा-छंदमुक्त” रूठकर चाँदनी कुछ स्याह सी लगी बादल श्वेत से श्याम हो चला है क्या पता बरसेगा या सुखा देगा है सिकुड़े हुए धान के पत्तों सी जिंदगी उम्मीद और आशा से हो रही है वन्दगी...

  • छंदमुक्त काव्य

    छंदमुक्त काव्य

    “छंद मुक्त काव्य” अनवरत जलती है समय बेसमय जलती है आँधी व तूफान से लड़ती घनघोर अंधेरों से भिड़ती है दिन दोपहर आते जाते है प्रतिदिन शाम घिर आती है झिलमिलाती है टिमटिमाती है बैठ जाती...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    समांत- आम, पदांत- को, मापनी- 2122 2122 1222 12 “गीतिका” डोलती है यह पवन हर घड़ी बस नाम को नींद आती है सखे दोपहर में आम को तास के पत्ते कभी थे पुराने हाथ में आज...

  • कुछ शेर

    कुछ शेर

    “कुछ शेर” बहुत गुमराह करती हैं फिजाएँ जानकर जानम आसान मंजिल थी हम थे अजनवी की तरह।। तिरे आने से हवावों का रुख भी बदला शायद लोग तो कहते थे कि तुम हुए मजहबी की तरह।।...

  • वागीश्वरी सवैया

    वागीश्वरी सवैया

    वागीश्वरी (सात यगण+लघु गुरु) सरल मापनी — 122/122/122/122/122/122/122/12, 23 वर्ण “वागीश्वरी सवैया” उठो जी सवेरे सवेरे उठो जी, उगी लालिमा को निहारो उठो। नहा लो अभी भाप पानी लिए है, बड़े आलसी हो विचारो उठो। कहानी...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    “मुक्तक” चढ़ा धनुष पर बाण धनुर्धर, धरा धन्य हरियाली है। इंच इंच पर उगे धुरंधर, करती माँ रखवाली है। मुंड लिए माँ काली दौड़ी, शिव की महिमा है न्यारी नित्य प्रचंड विक्षिप्त समंदर, गुफा गुफा विकराली...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    “कुंडलिया” परचम लहराता चला, भारत देश महान। अंतरिक्ष में उड़ रहा, शक्ति साक्ष्य विमान। शक्ति साक्ष्य विमान, देख ले दुनिया सारी। वीरों की यह भूमि, रही सतयुग से न्यारी। कह गौतम कविराय, तिरंगा चमके चमचम। सात्विक...

  • तांका

    तांका

    तांका विधा की जानकारी — तांका का शाब्दिक अर्थ हैं – *लघु गीत* या *छोटी कविता* जो मात्र 31 वर्ण में सम्पूर्ण हो जाती है। यह जापानी विधा 05, 07, 05, 07, 07 के वर्णानुशासन से...

  • चतुष्पदी (मुक्तक)

    चतुष्पदी (मुक्तक)

    बहुत याद आओगे तुम प्यारे गुलशन। बहारों की बगिया खुश्बुओं के मधुबन। कभी भूल मत जाना प्यारी सी चितवन। माफ करना ख़ता तुम हो न्यारे उपवन।।-1 याद आएगी कल प्यारी पनघट सखी। खुश्बुओं से महकता ये...