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  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    विधाता छंद, मापनी- 1222 1222 1222 1222…… ॐ जय माँ शारदे…….! उठा कर गिन, रहे टुकड़े, जिसे तुमने, गिराया है तुम्ही जिसमें, ललक तकते, रहे किसने, डराया है छिटककर अब, पड़ें है जो, नुकीले हो, गए...

  • “कता/मुक्तक”

    “कता/मुक्तक”

    दिल की बातें कभी-कभी होंठों पर भी आ जाती है। मुस्कुराहट मन में खिल कभी लबो पर छा जाती है। गुजरे वक्त की नजाकत कभी गम गुदगुदा जाए तो- तन्हाई घिरी हँसी लपक सुर्ख चेहरे को...

  • “लंगोटिया यार” देश विदेश, न जाने मेरे लंगोटिया यार (आज के दौर में कहें तो डायपरिया यार) मित्र हीरालाल यादव जी, अपनी बिना सीट वाली सायकल से लगभग बीस वर्षों से यात्रा कर रहें हैं। परिचय...

  • “भाम छंद”

    “भाम छंद”

    विधान~[ भगण मगण सगण सगण सगण] ( *211 222 112*, 112 112) 15 वर्ण, *यति 9-6 वर्णों पर*, 4 चरणदो-दो चरण समतुकांत] सात पहाड़ा धाम शिवे, शिव का पहरा। पाल रहे आकार हरी, शुभदा भँवरा।। जो...

  • “दोहा-मुक्तक”

    “दोहा-मुक्तक”

    शीर्षक—अहंकार, दर्प, दंभ, अभिमान, मद, गर्व, घमण्ड ) नित मायावी खेत में, उग रहे अहंकार। पाल पोस हम खुद रहे, मानों है उपहार। पुलकित रहती डालियाँ, लेकर सुंदर फूल- रंग बिरंगे बाग से, कौन करे प्रतिकार॥-1...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

      बैठी क्यों उदास सखी, घिरी खुद के बिस्तर। सौंप हाथ को तूलिका, ताक रही है ब-ख्तर। ताक रही हैं ब-ख्तर, किससे तेरी लड़ाई। क्यूँ भागे तू दूर, परस्पर प्रीत लगाई। यह ‘गौतम’ अंजान, नहीं मन...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    ले रंग तिरंगा हरियाली केशर क्यारी शुभ्र नभ धानी लहराया बादल॥-1 वो उड़ा गगन प्यारा झंडा ध्वनि गुंजन चक्र सुदर्शन भारत उपवन॥-2 महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की...

  • चौपाई छंद मापनी पर, “गीतिका”

    चौपाई छंद मापनी पर, “गीतिका”

    पावन जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई, ॐ जय कन्हाई, जय हिंद, वंदेमातरम…….   बोलो सब जय हिंद शान से, शुभ गले लगाओ गैया रे वंदे मातरम जिह्वा बोले, मन हाथ मिलाओ भैया रे भारत...

  • “कता/मुक्तक”

    “कता/मुक्तक”

    सुन रे गुलाब मैं तुझसे मुहब्बत पेनाह करता हूँ। पर ये न समझना कि निरे काँटों में निर्वाह करता हूँ। आकर देख तो जा तनिक मेरे हाथ भर बगीचे को- बिछी है मखमली घास खिले फूल...

  • “हलषष्ठी/ललही छठ”

    “हलषष्ठी/ललही छठ”

    हलषष्ठी छठ जिसे ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। यह पुत्र पौत्रादि के कामना का पावन पर्व है। इस पूजन का आधार अति पुरातन है जो पूर्वांचल के साथ ही साथ अनेक जगहों...