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  • दोहा-मुक्तक

    दोहा-मुक्तक

    मुश्किल तो होती डगर, चली हुई आसान कठिन मान लेते जिसे, आलस में नादान बड़ी चूक करते सदा, अपनी मंजिल दूर पाँव पसारे सो रहे, वे बिस्तर पादान॥-1 कठिन मानकर जूझते, शेर बहादुर बीर रण में...


  • “ॐ जय बाबा बद्री विशाल की”

    “ॐ जय बाबा बद्री विशाल की”

    “दोहे” गंगोत्री यमुनोत्री, बद्रीनाथ केदार चारोधाम विराजते, महिमा शिव साकार॥-1 माँ पार्वती ने दिया, अपना घर उपहार इस बैकुंठ विराजिए, ममता विष्णु दुलार॥-2 स्वर्गलोक की छावनी, देव भूमि यह धाम ब्रम्हा विष्णु महेश को, बारंबार प्रणाम॥-3...

  • घरौंदे/घोसले

    घरौंदे/घोसले

    उड़ा दिए उन परिंदों को उनकी ही डाल से एक छोटे से कंकर देकर झूलते थे जो घोसले बहुत पुराने होकर गंदे, जीर्ण-सिर्ण, खरबचड़े लटके थे बचपन से घेरे हमारे बंकर॥ उड़ा दिए उन खर पतवारों...

  • “चौपाई छंद”

    “चौपाई छंद”

    विनय करूँ कर जोरि मुरारी, पाँव पखारो जमुन कछारी नैना तरसे दरस तिहारी, गोकुल आय फिरो बनवारी॥-1 ग्वाल बाल सब नगर नगारी, सूनी यह यशुमती अटारी गिरिवर गोवर्धन हितकारी, जल दूषित पथ विकल करारी॥-2 कलश किलोल...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    सुना है सुरत ए गैर भी अपनों के जैसी ही भली लगती है फर्क सिर्फ इतना ही है कि वह बिना नाकाब लगाए चलती है तादात गैरों की कभी कम नहीं हुई अपनों के बूते रहकर...


  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    यही परिवार है अपना यही दरबारे दर हमारा है यहीं हिलती मिलती हैं खुशियाँ यही संसार हमारा है इसे जन्नत कहो मन्नत कहो या बागवन ही कह लेना मगर खुदगर्जी का दामन मत कहो निस्बत हमारा...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    शिकायत हिमायत भरी है हिया में लगी आग जलती कवायत हिया में हृदय वेदना में तड़फता विलखता विरह वदगुबानी बढ़ाए हिया में॥-1 संगदिल दिल में सजाते न पत्थर तंगदिल दिल से उड़ा देते पत्थर पत्थर की...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    माता नमन करूँ तुझे, कहलाऊँ मैं पूत पीड़ा प्रतिपल दे रहा, जैसे एक कपूत जैसे एक कपूत, रूप प्रति हर ले जाए नाता के अनुरूप, नक्श नयन छवि छाए कह गौतम कविराय, दुष्ट दुराग्रह भाता करहु...