Author :

  • सत्य की जय हो

    सत्य की जय हो

    “सत्य की जय हो” विनम्रता से सुख को भोगा जा सकता है। धैर्य से दुख को मात दिया जा सकता है। अध्ययन करके विद्या अर्जित की जा सकती है। सम्मान देकर सम्मान पाया जा सकता है।...

  • हास्य व्यंग्य

    हास्य व्यंग्य

    हास्य व्यंग्य आधारित सृजन “चमचा भाई” काहो चमचा भाई कैसे कटी रात हरजाई भोरे मुर्गा बोले कूँ कूँह ठंडी की ऋतु आई हाथ पाँव में ठारी मोरे साजन की बीमारी सूरज ओस हवाई घिरि बदरी दाँत...

  • बाल गीत

    बाल गीत

      “बाल गीत” चंदा मामा आ भी जाओ, लेकर अपना प्यार मेरी माँ के भाई हो तुम, तारों के सरदार बहुत खिलाया माँ ने कहकर, लाएंगे चंदा मामा दूध-भात से भरा कटोरा, रहते घिर बादल श्यामा...

  • मुक्तकाव्य

    मुक्तकाव्य

    “मुक्तकाव्य” कुछ कहना चाहता है गगन बिजली की अदा में है मगन उमड़ता है घुमड़ता भी है टपकता और तड़फता भी है लगता है रो रहा है अपनी अस्मिता खो रहा है सुनते सभी हैं पर...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    शीर्षक -दीवार,भीत,दीवाल “मुक्तक” किधर बनी दीवार है खोद रहे क्यूँ भीत। बहुत पुरानी नीव है, मिली जुली है रीत। छत छप्पर चित एक सा, एक सरीखा सोच- कलह सुलह सर्वत्र सम, घर साधक मनमीत।। नई नई...

  • गीतिका

    गीतिका

    मापनी- 2222 2222 2222, समान्त- अन, पदांत- में “गीतिका” बरसोगे घनश्याम कभी तुम मेरे वन में दिल दे बैठी श्याम सखा अब तेरे घन में बोले कोयल रोज तड़फती है क्यूँ राधा कह दो मेरे कान्ह...

  • दोहा

    दोहा

    कुछ दोहे दिया हाथ में हाथ है, दिल भी इसके साथ। करना दिल से जतन तुम, मेरे कोमल हाथ।।-1 दिल की गागर कोमली, रखना अपने पास। छूट न जाये हाथ से, अति सुन्दर अहसास।।-2 कभी छोड़...

  • गीत

    गीत

    “गीत” आंचलिक पुट मोरे अँगने में है तुलसी का चौरा एक पेड़ नीम संग आम खूब बौरा अड़हुल का फूल लाल केसर कियारी मगही के पतवा तुराये भरि दौरा…..मोरे अँगने में गाय संग कुकुरा के रोज...

  • मुक्त काव्य

    मुक्त काव्य

    “मुक्त काव्य” न बैठ के लिखा, न सोच के लिखा तुझे देखा तो रहा न गया और खत लिखा जब लिखने लगा तो पढ़ना मुश्किल हो गया अब पढ़ने लगा हूँ तो लिखना मुश्किल है अजीब...

  • गीतिका

    गीतिका

    मापनी -2212 122 2212 122, समांत- अना, स्वर, पदांत- कठिन लगा था….. ॐ जय माँ शारदा! “गीतिका” अंजान रास्तों पर चलना कठिन लगा था थे सब नए मुसाफिर मिलना कठिन लगा था सबके निगाह में थी...