कविता

दोहा

“दोहा” उमड़ घुमड़ नभ छा रहे, ये ठंडी के मेह। रात गई बादल घिरे, दिन में ठिठुरे देह।।-1 बूँद बूँद में है अमिय, औ बादल में बूँद। धरती की अभ्यर्थना, भर दे गागर दूध।।-2 वरखा रानी आ तनिक, रख फसलों की चाह। बिनु पानी गुलशन नहीं, बिनु दरख़्त कब छाँह।।-3 ऋतु वर्षा की यह नहीं, […]

गीतिका/ग़ज़ल

दोहा गीतिका

“दोहा गीतिका” क्यों मानव से भी बड़ा, होता चला विकास कुछ सोएं मरुभूमि पर, कुछ का घर आकाश क्या गरीब खाता नहीं, पिचका उसका पेट कुछ क्यों होटल खेलते, बावन पता ताश।। बैंक व्याज देता नहीं, कर्ज है कमरतोड़ मध्यमवर्गी खिन्न है, क्या खाएं घर घास।। वोट बहुत है कीमती, सस्ता क्यों इंसान क्यों कुर्सी […]

कविता

कुंडलिया

“कुंडलिया” गुड़तिल मिलकर खाइये, सुंदर बने विचार स्वाद भरी खिचड़ी भली, मकर महा त्यौहार मकर महा त्यौहार, पतंगा उड़े गगन में क्यारी महके फूल, सुबासित पवन चमन में कह ‘गौतम’ कविराज, रहो रे घर में हिलमिल सीख दे रहे धान, मिलाकर रखना गुड़तिल।। महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

कविता

कुंडलिया

“कुंडलिया” हँसते कुछ कुछ रो रहे, हैं भावों के रूप ईमोजी के खेत में, चेहरे चर्चित चूप चेहरे चर्चित चूप, धूप में छाँव तलाशे बारिश की दीवार, कहाँ तक धरे दिलाशे कह गौतम कविराज, नींव दलदल में फँसते रिश्ता बिन महमान, देख सब यूँ ही हँसते।। महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

कविता

पिरामिड

“पिरामिड” जी स्वाद मन का लो खजूर पौष्टिक धारी प्रतिरोधकता रस में मादकता।। जी चखो हजूर खजूर है गर्म तासीर लाल गुच्छ धारी औषधि गुणकारी।। महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

हाइकु/सेदोका

हाइकु

कर दो दान है मकर संक्रांति मिटती भ्रांति।।-1 लो बधाई खिचड़ी खवाई शादी सवाई।।-2 तिल पापड़ी गर्म आग तापनी गुड़ के लड्डू।।-3 मधुर ख्वाब बसंत की सुमारी फूलों से यारी।।-4 हिन्दू त्यौहार सु स्नेह की बौछार श्रद्धा अपार।।-5 — महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

विश्व हिंदी दिवस पर दिली बधाई स्वीकारें मित्रों…..जय माँ शारदा! “गीतिका” हिंदी की पहचान पूछते, बिंदी का अपमान पूछते दशों दिशाओं में है चर्चित हिंदी का नुकशान पूछते लूटा है लोगों ने भारत बोली भाषा हुई नदारत अंग्रेजों ने बहुत सताया मुगल तुग़ल घमसान पूछते।। भारतीय भाषा न्यारी है फिर भी अंग्रेजी प्यारी है मन […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

हिंदी ही पहचान है, हिंदी ही अभिमान। कई सहेली बोलियाँ, मिलजुल करती गान। राग पंथ कितने यहाँ, फिर भी भारत एक- एक सूत्र मनके कई, हिंदी हुनर महान।।-1 एक वृक्ष है बाग का, डाल डाल फलदार। एक शब्द है ब्रम्ह का, पढ़ न सका संसार। पूजा तो सबने किया, लिए हाथ में फूल- किसी किसी […]

मुक्तक/दोहा

दोहा

“दोहा” पूण्य मास सावन सखी, देता बहुत सकून। देखो अपने बाग में, हिल-मिल खिले प्रसून।।-1 झूलूँ झूला सजन सह, कजरी गाएँ लोग। ढ़ोल मजीरा हाथ में, कथा श्रवण मनभोग।।-2 कदम डाल मिलती कहाँ, कहाँ खिले मधुमास। पवन बतकही में मगन, ऋतु करती आभास।।-3 धन्य शिवाला धाम में, फूलों की भरमार। दूध पूत अविरत बहे, पर […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

“मुक्तक” राखी में इसबार प्रिय, नहीं गलेगी दाल। जाऊँगी मयके सजन, लेकर राखी लाल। बना रखी हूँ राखियाँ, वीरों से है प्यार- चाल चीन की पातकी, फुला रहा है गाल।। सीमा पर भाई खड़े, घर में मातर धाम। वर्षा ऋतु राखी लिए, बुला रही ले नाम। भैया अपने हाथ से, बाँध रही हूँ स्नेह- क्या […]