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  • “मिलन मुक्तक”

    “मिलन मुक्तक”

    5-8-18 मित्र दिवस के अनुपम अवसर पर आप सभी मित्रों को इस मुक्तक के माध्यम से स्नेहल मिलन व दिली बधाई, भोर आज की अधिक निराली ढूँढ़ मित्र को ले आई। सुबह आँख जब खुली पवाली...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    पकड़ो साथी हाथ यह, हाथ-हाथ का साथ। उम्मीदों की है प्रभा, निकले सूरज नाथ।। निकले सूरज नाथ, कट गई घोर निराशा। हुई गुफा आबाद, जिलाए थी मन आशा॥ कह गौतम कविराय, कुदरती महिमा जकड़ो। प्रभु के...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    तर्क तौलते हैं सभी, लिए तराजू हाथ। उचित नीति कहती सदा, मिलों गले प्रिय साथ। माँ शारद कहती नहीं, रख जिह्वा पर झूठ- ज्ञान-ध्यान गुरुदेव चित, अर्चन दीनानाथ॥-1 प्रथम न्याय सम्मान घर, दूजा सकल समाज। तीजा...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    इनका यह संसार सुख, भीग रहा फल-फूल। क्या खरीद सकता कभी, पैसा इनकी धूल॥ पैसा इनसे धूल, फूल खिल रिमझिम पानी। हँसता हुआ गरीब, हुआ है कितना दानी॥ कह गौतम कविराय, प्याज औ लहसुन भिनका। ऐ...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    रे हवा बदरी आसमान साँझ विहान पावस रुझान घटता तापमान॥-1 री बाढ़ निगोरी भीगी ओरी रूप अघोरी पागल बदरी गिरा गई बखरी॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की...

  • “देशज गीत”

    “देशज गीत”

    जिनगी में आइके दुलार कइले बाट गज़ब राग गाइके सुमार कइले बाट नीक लागे हमरा के अजबे ई छाँव बा कस बगिया खिलाइ के बहार कइले बाट॥……जिनगी में आइके दुलार कइले बाट फुलाइल विरान वन चम्पा...

  •  “गज़ल”

     “गज़ल”

    वज़्न- 221 1222 221 1222, काफ़िया- अ, रदीफ़ आओगे आकाश उठाकर तुम जब वापस आओगे अनुमान लगा लो रुक फिर से पछताओगे हर जगह नहीं मिलती मदिरालय की महफिल ख़्वाहिश के जनाजे को तकते रह जाओगे॥...

  • “छंद, रोला मुक्तक”

    “छंद, रोला मुक्तक”

    पहली-पहली रात, निकट बैठे जब साजन। घूँघट था अंजान, नैन का कोरा आँजन। वाणी बहकी जाय, होठ बेचैन हो गए- मिली पास को आस, पलंग बिराजे राजन।।-1 खूब हुई बरसात, छमा छम बूँदा बाँदी छलक गए...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    माँ शारदे को नमन करते हुए समस्त मंच के गुणीजनों को मेरा वंदन अभिनंदन। आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई। सौंप दिया माँ-बाप ने, गुरु को अपना लाल। विनय शारदा मातु से, साधक शिक्षक...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    बदला हुआ मौसम, बहक बरसात हो जाए। उड़ता हुआ बादल, ठहर कुछ बात हो जाए। क्यों जा रहे चंदा , गगन पर किस लिए बोलो- कर दो खबर सबको, ठहर दिन रात हो जाए॥-1 अच्छी नहीं...