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  • छ्न्द – हंसगति

    छ्न्द – हंसगति

    छ्न्द – हंसगति ( २0 मात्रा ) शिल्प विधान — 11,9= 20 प्रथम चरण ११ मात्रा ,चरणान्त २१ से अनिवार्य । जस वीणा रसधार, भरी है माता। कर शारद उपकार, भक्त का नाता।। नमन करूँ दिन-रात,...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक” परिणय की बेला मधुर, मधुर गीत संवाद। शोभा वरमाला मधुर, मधुर मेंहदी हाथ। सप्तपदी सुर साधना, फेरा जीवन चार- नवदंपति लाली मधुर, मधुर नगारा नाद॥-1 “मुक्तक” छंद मधुमालती, मापनी – 2212 2212 अहसान चित...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    पलड़ा जब समतल हुआ, न्याय तराजू तोल पहले अपने आप को, फिर दूजे को बोल फिर दूजे को बोल, खोल रे बंद किवाड़ी उछल न जाए देख, छुपी है चतुर बिलाड़ी कह गौतम कविराय, झपट्टा मारे...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    ये जग जीवन जनधन पशु व पंक्षी लगती है अच्छी सागर मिली नदी।।-1 है यह संसार उपहार वाणी विचार सुगमानुसार जीव जीव से प्यार।।-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम मिश्रा के...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    पर्दे में जा छुपे क्यों सुन चाँद कल थी पूनम। कैसे तुझे निकालूँ चिलमन उठाओ पूनम। इक बार तो दरश दो मिरे दूइज की चंदा- जुल्फें हटाओ कर से फिर खिलाओ पूनम।। हर रोज बढ़ते घटते...

  • “कता”

    “कता”

    दुनियाँ समाई अर्थ में कैसी समझ कहें। जब अर्थ का भी अर्थ है कैसी समझ कहें। चिपकाते ही जा रहे हैं द्विअर्थी दीवार पर- कहते सुनो जी अर्थ की कैसी समझ कहें।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी...


  • छंद – तमाल” (सम मात्रिक )

    छंद – तमाल” (सम मात्रिक )

    शिल्प विधान –चौपाई +गुरु लघु (16+3=19) अंत में यति गोकुल गलियाँ मोहन खेलें रास। बंसी बाजे मधुवन कोकिल वास॥ दूर नगर बरसाना राधे गाँव। कुंज गली में तुलसी श्यामा छाँव॥-1 नाचें गाएं झूमत ग्वाला बाल। दधि-मुख...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    पंक्षी अकेला उड़ा जा रहा है। आया अकेला कहाँ जा रहा है। दूरी सुहाती नहीं आँसुओं को- तारा अकेला हुआ जा रहा है।।-1 जाओ न राही अभी उस डगर पर। पूछो न चाहत बढ़ी है जिगर...

  • “हाइकु”

    “हाइकु”

    आज की गर्मी चलन बेरहमी जल की कमी॥-1 झुकी डाल है क्यों फल बीमार है जी अनार है॥-2 नर निर्वाह नव रोग निपाह रोके प्रवाह॥-3 कृत्रिम छाल मत रगड़ गाल हो जा निहाल॥-4 ये केला आम...