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  • हाकलि छंद

    हाकलि छंद

    –हाकलि छंद – हाकलि छंद में प्रत्येक चरण में तीन चौकल अंत में एक गुरु के संयोग से १४ मात्राएँ होती है l चरणान्त में s, ss ,।। एवं सगण l ls आदि हो सकते हैं...

  • हाकलि  छंद

    हाकलि छंद

    पितृ दिवस पर प्रस्तुत है हाकलि छंद, आदणीय पिता श्री को सादर प्रणाम एवं सभी मित्रों को हर्षित बधाई, ॐ जय माँ शारदा! हाकलि छंद पिता दिवस पर प्रण करें, पीर पराई मिल हरें। कष्ट न...

  • मुक्त काव्य

    मुक्त काव्य

    “मुक्त काव्य” दिन से दिन की बात है किसकी अपनी रात है बिना मांगे यह कैसी सौगात है इक दिन वह भी था जब धूप में नहा लिए आज घने छाए में भी बिन चाहत भीगती...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    मुक्तक मेरे ख्याल की मखमली चादर पर आएं तो कभी सुकून प्रेम का गहना है रहबर आजमाएं तो कभी इंतजार पर मौन रहता है दिल आँखें झूठ न बोले मौसम की हवा में मौसमी लाकर इतराएं...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    “मुक्तक” बहुत मजे से हो रहे, घृणित कर्म दुष्कर्म। करने वाले पातकी, जान न पाते मर्म। दुनिया कहती है इसे, बहुत बड़ा अपराध- संत पुजारी कह गए, पापी का क्या धर्म।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी परिचय...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    ‘”कुंडलिया” बालक नन्हा धूल में, जीने को मजबूर लाचारी से जूझता, इसका कहाँ कसूर इसका कहाँ कसूर, हुजूर वस्र नहिं दाना माता-पिता गरीब, रहा नहिं काना नाना कह गौतम कविराय, प्रभो तुम सबके पालक बचपन वृद्ध...

  • गीतिका

    गीतिका

    “दोहा गीतिका” बहुत दिनों के बाद अब, हुई कलम से प्रीति माँ शारद अनुनय करूँ, भर दे गागर गीत स्वस्थ रहें सुर शब्द सब, स्वस्थ ताल त्यौहार मातु भावना हो मधुर, पनपे मन मह नीति।। कर्म...

  • छंद मुक्त काव्य

    छंद मुक्त काव्य

    “छंदमुक्त काव्य” गुबार मन का ढ़हने लगा है नदी में द्वंद मल बहने लगा है माँझी की पतवार या पतवार का माँझी घर-घर जलने लगा चूल्हा साँझी दिखने लगी सड़कें बल्ब की रोशनी में पारा चढ़ने...

  • भोजपुरी गीत

    भोजपुरी गीत

    “भोजपुरी गीत” चल चली वोट देवे रीति बड़ पुरानी नीति संग प्रीति नौटंकी भई कहानी……. लागता न लूह, न शरम कौनो बाति के घूमताटें नेता लोग दिन अउर राति के केके देई वोट केकरा के गरिआईं...

  • दोहा

    दोहा

    “दोहा” व्यंग बुझौनी बतकही, कर देती लाचार समझ गए तो जीत है, बरना दिल बेजार।। हँस के मत विसराइये, कड़वी होती बात। व्यंग वाण बिन तीर के, भर देता आघात।। सहज भाव मृदुभासिनी, करती है जब...