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  • “मुक्त काव्य”

    “मुक्त काव्य”

    “छंद मुक्त गीतात्मक काव्य” जी करता है जाकर जी लू बोल सखी क्या यह विष पी लू होठ गुलाबी अपना सी लू ताल तलैया झील विहार किस्मत का है घर परिवार साजन से रूठा संवाद आतंक...

  • गीत, सरसी छंद

    गीत, सरसी छंद

    आधार छंद – सरसी (अर्द्ध सम मात्रिक) शिल्प विधान सरसी छंद- चौपाई + दोहे का सम चरण मिलकर बनता है। मात्रिक भार- 16, 11 = 27 चौपाई के आरम्भ में द्विकल+त्रिकल +त्रिकल वर्जित है। अंत में...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    बह्र 2122, 2122 212, काफ़िया, आ स्वर, रदीफ़- जाएगा “गज़ल” हाथ कोई हाथ में आ जाएगा मान लो जी साथियाँ भा जाएगा लो लगा लो प्यार की है मेंहदी करतली में साहिबा छा जाएगा।। मत कहो...


  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    “कुंडलिया” वीरा की तलवार अरु, माथे पगड़ी शान। वाहेगुरु दी लाड़िली, हरियाली पहचान।। हरियाली पहचान, कड़ा किरपाण विराजे। कैसी यह दीवार, बनाई घर-घर राजे।। कह गौतम कविराय, नशा मत करना हीरा। मत हो कुड़ी निराश, कलाई...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    “पिरामिड” क्या हुआ सहारा बेसहारा भूख का मारा लालायित आँख निकलता पसीना।।-1 हाँ चोर सिपाही सहायता पक्ष- विपक्ष अपना करम बेरहम मलम।।-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की...

  • “गीत”

    “गीत”

    मापनी- 2222 2222 2212 121, मुखडा समान्त- अर, पदांत- आस “गीत” चल री सजनी दीपक लेकर भर दे डगर उजास आगे-आगे दिन चलता है अवनी नजर आकाश गिन दश दिन तक राम लड़े थे रावण हुआ...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    वज़्न – 122 122 122 122, अर्कान – फऊलुन फऊलुन फऊलुन फऊलुन, बह्र – बह्रे मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम, काफ़िया – आएँ स्वर, रदीफ- जाएँ “गज़ल” बहुत सावधानी से आएँ व जाएँ डगर पर कभी भी न...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    बाल-दिवस पर प्रस्तुति “मुक्तक” काश आज मन बच्चा होता खूब मनाता बाल दिवस। पटरी लेकर पढ़ने जाता और नहाता ताल दिवस। राह खेत के फूले सरसों चना मटर विच खो जाता- बूढ़ी दादी के आँचल में...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    छठ मैया की अर्चना आस्था, श्रद्धा, अर्घ्य और विश्वास का अर्चन पर्व है, इस पर्व का महात्म्य अनुपम है, इसमें उगते व डूबते हुए सूर्य की जल में खड़े रहकर पूजा की जाती है और प्रकृति...