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  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    पाया प्रिय नवजात शिशु, अपनी माँ का साथ। है कुदरत की देन यह, लालन-पालन हाथ।। लालन-पालन हाथ, साथ में खुशियाँ आए। घर-घर का उत्साह, गाय निज बछड़ा धाए।। कह गौतम कविराय, ठुमुक जब लल्ला आया। हरी...

  • छंदमुक्त काव्य

    छंदमुक्त काव्य

    कूप में धूप मौसम का रूप चिलमिलाती सुबह ठिठुरती शाम है सिकुड़ते खेत, भटकती नौकरी कर्ज, कुर्सी, माफ़ी एक नया सरजाम है सिर चढ़े पानी का यह कैसा पैगाम है।। तलाश है बाली की झुके धान...

  • गीतिका

    गीतिका

    छा रही कैसी बलाएँ क्या बताएँ साथियो द्वंद के बाजार में क्या क्या सुनाएँ साथियो क्यों तराजू को झुकाते बाट हैं बेमाप के तौलना तो देखना पाला उठाएँ साथियो।। क्यों गली में शोर है आया कहाँ...

  • गज़ल

    गज़ल

    अजी यह इस डगर का दायरा है सहज होता नहीं यह रास्ता है कभी खाते कदम बल चल जमीं पर हक़ीकत से हुआ जब फासला है।। उठाकर पाँव चलती है गरज बहुत जाना पिछाना फैसला है।।...

  • छंद मदिरा सवैया

    छंद मदिरा सवैया

    वाद हुआ न विवाद हुआ, सखि गाल फुला फिरती अँगना। मादक नैन चुराय रहीं, दिखलावत तैं हँसती कँगना।। नाचत गावत लाल लली, छुपि पाँव महावर का रँगना। भूलत भान बुझावत हौ, कस नारि दुलारि रह ना...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    हार-जीत के द्वंद में, लड़ते रहे अनेक। किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक। बर्छी भाला फेंक दो, विषधर हुई उड़ान- महँगे खर्च सता रहे, छोड़ो युद्ध विवेक।।-1 हार-जीत किसको फली, ऊसर हुई जमीन। युग बीता...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    चादर ओढ़े सो रहा, कुदरत का खलिहान। सूरज चंदा से कहे, ठिठुरा सकल जहान।। ठिठुरा सकल जहान, गिरी है बर्फ चमन में। घाँटी की पहचान, खलल मत डाल अमन में।। कह गौतम कविराय, करो ऋतुओं का...

  • हाइकु

    हाइकु

    ठंडी की ऋतु घर घर अलाव बुझती आग।।-1 गैस का चूल्हा न आग न अलाव ठिठुरे हाथ।।-2 नया जमाना सुलगता हीटर धुआँ अलाव।।-3 नोटा का कोटा असर दिखलाया मुरझा फूल।।-4 खिला गुलाब उलझा हुआ काँटा मूर्छित...

  • गीतिका

    गीतिका

    पाँव के संग पायल खनकती सखी देख नथ मोर घायल सुलगती सखी आज तड़के सवेरे नजर लड़ गयी होठ लाली लुभायल ललकती सखी।। काश होते सजन घर अंगना मिरे साध मन की पुरायल सँवरती सखी।। हाथ...

  • गज़ल

    गज़ल

    सखा साया पुराना छोड़ आये वसूलों का ठिकाना छोड़ आये न जाने कब मिले थे हम पलों से नजारों को खजाना छोड़ आये।। सुना है गरजता बादल तड़ककर छतों पर धूप खाना छोड़ आये।। बहाना था...