Author :

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    ये ड्रामा देख लो रोती आँख हँसता दिल खेल रहे मिल सजी है महफ़िल॥-1 क्या हुआ पुराना अभिनय प्रेम विनय यादों को जगाता कला मंच लुभाता॥-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    छंद- लीला, समांत- इया, अपदांत, विधान- 24 मात्रा के इस छंद में 14,10 पर यति तथा पदांत में सगण (112) का विधान है भोर हुई निकलो साजन, महके री बगिया हाथ पाँव भी झटकारो, आलस क्यों...


  • “दुर्मिल सवैया”

    “दुर्मिल सवैया”

    छंद- दुर्मिल सवैया (वर्णिक ) शिल्प – आठ सगण, सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा , 112 112 112 112 112 112 112 112 हिलती डुलती चलती नवका, ठहरे विच में डरि जा जियरा।...

  • “चतुष्पदी”

    “चतुष्पदी”

    सादर नमन साहित्य के महान सपूत गोपाल दास ‘नीरज’ जी को। ॐ शांति। सुना था कल की नीरज नहीं रहे। अजी साहित्य के धीरज नहीं रहे। गोपाल कभी छोड़ते क्या दास को- रस छंद गीत के...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    शांति का प्रतीक लिए उड़ता रहता हूँ। कबूतर हूँ न इसी लिए कुढ़ता रहता हूँ। कितने आए-गए सर के ऊपर से मेरे- गुटरगूं कर-करके दाना चुँगता रहता हूँ॥-1 संदेश वाहक थे पूर्वज मेरे सुनता रहता हूँ।...


  • “हाइकु”

    “हाइकु”

    कुछ तो बोलो अपनी मन बात कैसी है रात॥ सुबह देखो अब आँखें भी खोलो चींखती रात॥ जागते रहो करवट बदलो ये काली रात॥ टपके बूंद छत छाया वजूद भीगती रात॥ दिल बेचैन फिर आएगी रैन...

  •  “गीतिका”

     “गीतिका”

    समांत- अही, पदांत- है मात्रा भार-29,  16, 13 पर यति हर मौसम के सुबह शाम से, इक मुलाक़ात रही है सूरज अपनी चाल चले तो, दिन और रात सही है भोर कभी जल्दी आ जाती, तब...

  • “छंद मुक्तामणि, मुक्तक”

    “छंद मुक्तामणि, मुक्तक”

    विधान – 25 मात्रा, 13,12 पर यति, यति से पूर्व वाचिक 12/लगा, अंत में वाचिक 22/गागा, क्रमागत दो-दो चरण तुकान्त, कुल चार चरण, पर मुक्तक में तीसरा चरण का तुक विषम अतिशय चतुर सुजान का, छद्मी...