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  • “जन्मभूमि की रोशनी”

    “जन्मभूमि की रोशनी”

    “जन्मभूमि की रोशनी” हरिया की हक़ीक़त से यूँ तो गाँव का बच्चा-बच्चा वाकिफ़ है। एक रात कोई अन्जान आदमी पूरब वाली बाग में अपनी खूबसूरत पत्नी रज्जो के साथ खुले आसमान के नीचे, घास-फूस वाली जमीन...

  • छंद पंचचामर

    छंद पंचचामर

    शिल्प विधान- ज र ज र ज ग, मापनी- 121 212 121 212 121 2 वाचिक मापनी- 12 12 12 12 12 12 12 12 “छंद पंचचामर” सुकोमली सुहागिनी प्रिया पुकारती रही। अनामिका विहारिणी हिया विचारती...

  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    सब के सब देख रहे थे लगी हुई थी आग जलता हुआ रावण दर्शनार्थी अस्त ब्यस्त ट्रेन की डरावनी चिंघाड़ दौड़ती हुई उतावली रफ्तार धुँआँ उड़ा आँखों के सामने शायद ही कोई देख रहा था।।-1 जमीन...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    रूप चौदस/छोटी दीपावली की सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगल शुभकामना “मुक्तक” जलाते दीप हैं मिलकर भगाने के लिए तामस। बनाते बातियाँ हम सब जलाने के लिए तामस। सजाते दीप मालिका दिखाने के लिए ताकत- मगर...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    , आधार छंद–विधाता, मापनी- 1222 1222 1222 1222 समांत – आस, पदांत – होता है “गीतिका” उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता है हवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता है जहाँ भी आँधियाँ आती...

  • गज़ल

    गज़ल

    वज़्न– 1222 1222 122 अर्कान– मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन, क़ाफ़िया— वास्ता (आ स्वर की बंदिश) रदीफ़ – है कहो जी आप से क्या वास्ता है सुनाओ क्या हुआ क्या दास्तां है समझ लेकर बता देना मुझे भी...

  • “पुत्र-प्रेम”

    “पुत्र-प्रेम”

    “पुत्र- प्रेम” अरमानों की बारात आयी और सगुन की शादी सिद्धार्थ के साथ बहुत ही छोटी उम्र में हो गई, जब वह इक्कीसवें बसंत पर कदम रखी तो उसका गौना हुआ और वह अपने सिद्धार्थ को...

  • “छंद चामर”

    “छंद चामर”

    छंद – चामर, शिल्प विधान- र ज र ज र, मापनी – 212 121 212 121 212 वाचिक मापनी – 21 21 21 21 21 21 21 2 “चामर छंद” राम- राम बोलिए जुबान मीठ पाइकै।...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    “मुक्तक” दीपक दीपक से कहे, कैसे हो तुम दीप। माटी तो सबकी सगी, तुम क्यों जुदा प्रदीप। रोज रोज मैं भी जलूँ, आज जले तुम साथ- क्या जानू क्या राज है, क्यों तुम हुए समीप।।-1 धूमधाम...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    “कुंडलिया” पावन गुर्जर भूमि पर, हुआ सत्य सम्मान। भारत ने सरदार का, किया दिली बहुमान।। किया दिली बहुमान, अनेकों राज्य जुड़े थे। बल्लभ भाइ पटेल, हृदय को लिए खड़े थे।। कह गौतम कविराय, धन्य गुजराती सावन।...