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  • “कुण्डलिया छंद”

    “कुण्डलिया छंद”

    काँटों भरी न जिंदगी, काँटों भरा न ताज माँ धीरज रख निकालूँ, पैरन तेरे आज पैरन तेरे आज , कभी नत पीड़ा होगी लूँ काँटों को साज, दुखों से दूर रहोगी कह गौतम कविराय, उम्मीदों को...

  • “जिंदगी भी अजीब है”

    “जिंदगी भी अजीब है”

    दिन गुजर होता है रात बसर होती है सुबह शाम हँसती है धूप में पिघलती है बारीश में बरसती है जिंदगी भी अजीब है खुसर पुसर चलती है॥ अरमानों का जखीरा गमों का पहाड़ खुशियों की...

  • “जय माँ”

    “जय माँ”

    “कुंडलिया” माँ तो माँ है मान मन, माँ ममता अनमोल देखी दुनियां माँ बिना, धन्य धन्य वह बोल।। धन्य धन्य वह बोल, शहद भी खट्टा लागे कहाँ गई तूं छोड़, देख हम हुए अभागे कह गौतम...

  • “बहाना मत बना देना”

    “बहाना मत बना देना”

    “गज़ल” बहर-1222 1222 1222 1222 मतला मिलो तुम आज मेले में बहाना मत बना देना किताबों में न खो जाना पहाड़ा मत गिना देना शेर कई सालों बिता डाले दशहरे में नहीं आए पुराने साथ के...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    13-12 पर यति……..   कलियों को देख भौंरा, फूला समा रहा है फूलों के संग माली, मनमन अघा रहा है कुदरत का ये करिश्मा, पराग पूष्प पल्लव नैना भिरामा दृश्यम, हेला जगा रहा है॥   महातम...

  • “किसकी छबी है ये”

    “किसकी छबी है ये”

    “गज़ल” किसने इसे फेंका यहाँ, रद्दी समझ कर के हाथों से उठा अपने, पड़ी किसकी छबी है ये यहाँ तो ढ़ेर कचरे का, इसे भी ला यहीं डाला महज कूड़ा समझ बैठा, बता किसकी छबी है...


  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    शीर्षक-मुक्तक, उपवन , बाग़, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन। पथिक भी अब बाग में रुकता नहीं छांव उपवन में कहीं दिखता नहीं उजड़ा हुआ गुलशन बिरानी वाटिका भौरा भी कलियाँ जबह करता नहीं॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी...

  • सुविचार

    सुविचार

    हिंदी में अपनी भावनाओं को एक बार कह के तो देखिये…….. परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल-...

  • “मुकरियां”

    “मुकरियां”

    मन मह छाए रहता नितप्रति बहुरि करूँगी उससे विनती कह सुन लूँगी उससे बाता है सखि साजन, नहि सखि दाता॥ रात सताए हाथ न आए इधर उधर जा गोता खाए रखूँ सम्हारी न धीरज धारे है...