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  • “ग़ज़ल, दर्द दामन”

    “ग़ज़ल, दर्द दामन”

      तुम्ही ने चैन चुराना, हमें सिखाया था प्यार मैंने भी किया, तुम्हें बताया था तेरा वो वक्त जमाना दिखाया तुमने दिल से पुछो दिल किसने लगाया था॥ सुबह की शाम हुई चाहतें परवान हुई धूप...

  • कुंडली

    कुंडली

    मन कहता काला करूँ, काले धन की बात पर कितना काला करूँ, किससे किससे घात किससे किससे घात, कहाँ छूपाऊँ बाला हर महफिल की शान, सराहूँ कैसे हाला कह गौतम कविराय, कलंकित है काला धन जल्दी...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

      मन कहता काला करूँ, काले धन की बात पर कितना काला करूँ, किससे किससे घात किससे किससे घात, कहाँ छूपाऊँ बाला हर महफिल की शान, सराहूँ कैसे हाला कह गौतम कविराय, कलंकित है काला धन...

  • “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक”

    किस्मत बहुत महान है, पुलक न आए हाथ कर्म फलित होता सदा, अधिक निभाए साथ न बैठो मन भाग्य पर, कर्म करो चितलाय लिखा लिलार मिटे नहीं, दुर्गुन किसका नाथ॥ महातम मिश्र, गौतम परिचय - महातम...

  • “हाइकू”

    “हाइकू”

    नाम भकोल दुलहा बकलोल घोड़ी चढ़ा है॥-1 धनी है बाप खूब सजी दुकान झूमें बाराती॥– 2 कन्या की शादी वारीश की मुनादी आई बारात॥ -3 सुहागिन है वर बड़ भाग्य है ले सात फेरा॥ -4 शहनाई...

  • कहानी : झबरी और मतेल्हु

    कहानी : झबरी और मतेल्हु

    समय बीत जाता है यादें रह जाती हैं। आज उन्हीं यादों की फहरिस्त में से झबरी की याद आ गई, जो हर वक्त छोटकी काकी के आस-पास घूमा करती थी। कितना भी डाटों-मारों चिपकी रहती थी,...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    “कुंडलिया” चला लक्ष्य नभ तीर है, अर्जुन का अंदाज समझ गया है सारथी, देखा वीर मिजाज देखा वीर मिजाज, दिशाएं रथ की मोड़ी लिए सत्य आवाज, द्रोपदी बेवस दौड़ी कह गौतम कविराय, काहि महाभारत भला घर...

  • “चइता गीत”

    “चइता गीत”

      “चइता- गीत सखी मन साधि पुरइबे हो रामा, चइत पिया अइहें ननद जेठानी के ताना मेंहणा नाहीं पिया भेद बतईबे हो रामा। चइत पिया अइहें….. अनिवन बरन जेवनार बनईबे, सोनवा की थाल जिमइबे हो रामा॥...

  • “दोहा”

    “दोहा”

      “दोहा” विक्रम संवत वर्ष पर, वर्षाभिनंदन भाय शुक्ल प्रतिपदा चैत्र से, माँ वंदन शोभाय॥ नवरात्रि श्रद्धा सुमन, कंकू चंदन छाय जय हो रामनवमी की, दशरथ नंदन राय॥ महातम मिश्र (गौतम) परिचय - महातम मिश्र शीर्षक-...

  • “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक” आँसू सूखे नभ गगन, धरती है बेचैन कब ले आएगा पवन, मेरी रातें चैन खिलूंगी मैं पोर पोर, डाली मेरे बौर छम-छम गाऊँगी सखी, लहरी कोयल बैन॥ महातम मिश्र (गौतम) परिचय - महातम मिश्र...