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  • “जुदाई”

    “जुदाई”

    वाह रे जिंदगी तुं भी कितनी अजीब है रहने को दूर दूर पर कहने को करीब है | पल-पल सरकती हुयी अंतिम पड़ाव तक बेबस है दुनियां, कहने को यही नशीब है || कम नही, बिन...

  • पैसा और इंसान

    पैसा और इंसान

    गर्मी का महीना था | बाग में कुछ बच्चे और बडे तिलमिलाती गर्मी से बचने के लिए पेड़ों की छाँव में दोपहरी बिता रहे थे | बच्चे अपने खेलों में मशगूल थे तो बडे-बूढे लाचारी में...

  • “खर-पतवार”

    “खर-पतवार”

    रोज-रोज ना होय रे मुरख, तेरा मन मुझसे मनुहार मेरे अंदर भी एक आदम, खुद झिझके ना करे गुहार | बहुत मनाया नहीं पिघलता, पत्थर सा दिल है मानों दिख जाता गर बाहर होता, चीखें धांय...

  • अन्नदाता

    अन्नदाता

    एक आदमी अपने रास्ते से गुजर रहा था | सड़क के दोनों किनारों पर आम के बहुत से बाग   फलों से लदकर जमीन को छू रहें थे |   फल के बावजूद बागों में चहल-पहल...

  • मधुशाला

    मधुशाला

    ना जाने कब क्या कर बैठे, अपने मन की है ज्वाला यारों देखों शान्त न होती, पी पी कर इसकी हाला हवस हंसीली नारी नठीली, पिए अमृत भरि-भरि प्याला चितवन चटकाय कलंकन बिच, नाचे नचवाये मधुशाला...

  • माँ तेरा दर्शन

    माँ तेरा दर्शन

    खुली आँख से जग को देखा, जब बंद हुई तो आई माँ | सूरज  की पहली किरणों में, देखी  तेरी परछाई माँ || रिश्ते-नाते सब बदल रहे, अब घर भी बदला लगता है | हर मूरत बदली बिन...

  • “धरती पुत्र”

    “धरती पुत्र”

    हल नित कहें किसान से, हलधर मेरे मित्र धरती को मै चिरता, अरु धरा बिखेरे इत्र || कलम कहें कविराय से, मुझे लगाओ हाथ ज्ञानपिपासु शब्द तुम, रहों श्रृष्टि के साथ || हल और कलम समान...

  • बेजुबान घुटन

    बेजुबान घुटन

    आदमी में हलकी सी मुस्कान देखीं मैंने परायों संग उभरी हुयी पहचान देखीं मैंने | अपनों से तनिक कटके महफ़िल क्या बैठी खूब गैरों की मीठी जुबान देखी मैंने || मन, मन की चाहत जाने है...

  • एक मुट्ठी बीडी

    एक मुट्ठी बीडी

    मानू और छानू दोनों बचपन के मित्र हैं | लेकिन दोनों की सोंच और विचारधाराओं में जमीन-आसमान का अंतर है | मानू हर बात को गंभीरता से सकारात्मक रूप में लेता है तो छानू नकारात्मक व...