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  • कुंडलिया छंद : तुलसी

    कुंडलिया छंद : तुलसी

    तुलसी आँगन में रहें, सदा करे कल्याण दूध पूत स्वस्थ रहें , रोग करे प्रयाण रोग करे प्रयाण, सुन्दर चेहरा दमके रख विवाह की साध, महीना कातिक चमके कह गौतम कविराय, अलौकिक महिमा तुलसी विष्णु प्रिया...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    चाहतें चाह बन जाती, अजनवी राह बन जाती मिली ये जिंदगी कैसी, मुकद्दर छांह बन जाती पारस ढूँढने निकला, उठा बोझा पहाड़ों का बांधे पाँव की बेंड़ी, कनक री, राह बन जाती॥ मगर देखों ये भटकन,...

  • कुंडलिया छंद

    कुंडलिया छंद

    गर्व सखा कर देश पर, मतरख वृथा विचार माटी सबकी एक है, क्यों खोदें पहार क्यों खोदें पहार, कांकरा इतर न जाए किसका कैसा भार, तनिक इसपर तो आएं कह गौतम कविराय, फलित नहीं दोषित पर्व...


  • “कंहरवा तर्ज”

    “कंहरवा तर्ज”

    मंच को सादर प्रस्तुत है एक शिवमय रचना, आप सभी पावन शिवरात्री पर मंगल शुभकामना, ॐ नमः शिवाय “कंहरवा तर्ज पर एक प्रयास” डम डम डमरू बजाएं, भूत प्रेत मिली गाएं चली शिव की बारात, बड़...

  • “उलारा गीत”

    “उलारा गीत”

    सादर निवेदित एक भोजपुरी उलारा जो रंग फ़ाग चौताल इत्यादि के बाद लटका के रूप में गाया जाता है। कल मैनें इसी के अनुरूप एक चौताल पोस्ट किया था जिसका उलारा आज आप सभी मनीषियों को...

  • चौताल

    चौताल

      फागुन को रंग लगाय गई, पनघट पट आई पनिहारिन रंग रसियन चाह बढ़ाय गई, गागरिया लाई पनिहारिन निहुरि घड़ा अस भरति छबीली…………………………… मानहु मन बसंत डोलाय गई, पनघट पट आई पनिहारिन।।-1 अधखिली कली भरमाय गई,...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    शुक्रवार,चित्र,अभिव्यक्ति-आयोजन आप सभी के सम्मान में प्रस्तुत है एक मुक्तक……. उखाड़ों मत मुझे फेकों, अरे मैं रेल की पटरी न गुस्सा आग बरसाओ, उठाती हूँ तेरी गठरी। जरा सोचो निहारो देख लो मंजिल कहाँ जाती मंजिल...