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  • “दोहा”

    “दोहा”

    आप सभी आदरणीय मिनिषियों को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामना सह मंगल बधाई…….   इस पावन पर्व पर कुछ दोहे सादर प्रस्तुत है, हैपी क्रिसमस…..   युग युगों से प्रकट हुए, मानव महिमा भेष अम्बर जस छाए...

  • गजल

    गजल

    हम मुलाकात करने गए, पर तुम नाराज से दिखे तुम्हारी नज़रों से पूछा, तो तुम नासाज से दिखे आखिर क्या है तुम्हारी, जिंदगी सफर का मिजाज कभी-कभी तुम अपने आप में, खुशमिजाज से दिखे क्यूँ नहीं...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

      मैं कृष्ण का शंख हूँ शिव का शंखनाद हूँ विजय हुंकारती हुई महाभारत की याद हूँ समुन्द्र की तलहटी से धरा पर गूँजता मैं मुझमें स्वर ॐकार मैं देवों का प्रतिसाद हूँ — महातम मिश्र...

  • “मौसम है क्या”

    “मौसम है क्या”

    सादर सुप्रभात मित्रों, चेन्नई में बाढ़ का कहर देखकर मन द्रवित हुआ और आज उसी विषय पर युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा रचना प्रस्तुत करने का अवसर इस चित्र के माध्यम से प्राप्त हुआ। कलम चलती...

  • सादर शुभकामाएं

    सादर शुभकामाएं

    मित्रों सादर शुभ दिवस, आज युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा दिल्ली में वार्षिक सभा का आयोजन किया गया है जहाँ देश-विदेश से गणमान्य रचनाकारों के सानिध्य में मुझे भी दर्शन का अवसर मिला था पर अपने...

  • “वर्ण पिरामिड”

    “वर्ण पिरामिड”

    1. माँ मैनें माखन नत खायो पछतायो तो बहियन छोटो सीको हाथ न आयो 2. तूं मैया भोरी हो पतियायो इनकी बाते बाछा पिए दूध मोही लपटायो हो 3. ना बोलू तोसो मैं माँ तूं मोरी...

  • “कुंडलिया छंद”

    “कुंडलिया छंद”

    सादर सुप्रभात मित्रों, जय हों छठ मैया की, आप सभी को इस पावन पुनीत पर्व पर हार्दिक बधाई, छठ मैया जगत कल्याण करें……छठ मैया के पूजन पर एक कुंडलिया छंद समर्पित है ……. छठ मैया की...

  • पावन दीपावली

    पावन दीपावली

    सादर शुभप्रभात अग्रज-अनुज स्नेही मित्रों, सादर प्रणाम/आशीर्वाद…… प्रकाश के प्रकाशित पावन पर्व दीपावली पर हमारे पुरे परिवार के तरफ से आप को एवं आप सभी के पुरे परिवार को हृदयतल से बधाई, मंगल शुभकामना और हार्दिक...

  • दीपक एक जलाऊँ

    दीपक एक जलाऊँ

    मित्रों, प्रकाश पर्व दीपावली पर आप सभी को हार्दिक बधाई सह मंगल शुभकामना, “मैया मै नहीं माखन खायो” जैसी तर्ज पर आधारित रचना…… दीपक एक जलाऊँ जाऊं कहाँ मै किधर रोशनी, जाऊं प्रकाश खिलाऊं बोल सखी...

  • “पहचान”

    “पहचान”

    लौटी गीता अपने घर, है कितना सुन्दर अवसर उठों आज लौटा आये, जिसका सम्मान उसीके घर || लौटाने की होड़ लगी, कोई बचपन भी लौटाएगा लौटा दो माँ की ममता, जो टंगी हुयी है नभपर ||...