Author :

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    गर्मी की छुट्टी का कुछ तो प्लान बनाएं चलो इसबार सपरिवार लातूर हो आएं सुना है पानी को भी अब प्यास लगी है मौका है सुनहरा उसकी प्यास बुझाएं।। रखो दश बीस बोतल फ्रिज से निकालों...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    पौध पेड़ होता नहीं, जबतक लगे न हाथ अंकुर होता बीज है, पाकर माटी साथ पाकर माटी साथ, पल्लवित होता है तरु दाना दाना बीज, किसान रोपता है धरु कह गौतम कविराय, ना पेड़ों को अब...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

    जिंदगी ख्वाब अपनी सजाती रही वो इधर से उधर गुनगुनाती रही पास आती गई मयकसी रात में नींद जगती रही वो जागती रही॥ पास आने की जुर्रत न जेहन हुई दूर दर घर दीपावली जलाती रही॥...

  • “दोहा”

    “दोहा”

      कटिया लगभग हो गई, खेत हुए वीरान जूंझ रहा किसान है, सन्न हुआ खलिहान।।-1 नौ मन ना गेहूं हुआ, ना राधा कर नाच कर्जे वाले आ गए, लिए लकुड़िया साच।।-2 मरता कहाँ किसान है, मरता...

  • “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक”

    शीर्षक- उल्हास, आनन्द, उत्सव उल्हास अतिरेक लिए, शादी में धक धाँय आनंद का विनाश है, बंदुक बरात जाय खुशी को भी मातम में, बदलते क्यों लोग कैसी शहनाई आज, बजती उत्सव आय॥ महातम मिश्रा, गौतम गोरखपुरी...

  • “हाइकु”

    “हाइकु”

    वो पहाड़ है तमतमाया हुआ मानों हिला है॥ धूल उडी है आस पास बिखरी हवा चली है॥ हलचल है अंदर ही अंदर शुष्क नमी है॥ सड़क पर औंधे मुंह गिरा है जहां जमीं है॥ निकलेगा वो...

  • गोलू

    गोलू

    गोलू अपने माँ बाप का इकलौता दुलारा बेटा है। बहुत लाड़ प्यार में शरारती होना लाजमी है और बचपन का यह गुण सराहना का पात्र भी है । धीरे धीरे गोलू बढ़ने लगा उसके साथ ही...

  • “ग़ज़ल”

    “ग़ज़ल”

    पाकिस्तान को सन्देश…..भाई मेरे…….. भटके को राह मिल जाती डूबते को थाह मिल जाती कदम एक नहीं चला पाए कैसे तुम्हें पनाह मिल जाती।। तजुर्बा कहता है पूछो जरा किसे मुफ़्त सलाह मिल जाती।। कब गुनाह...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      मिलेगा मौका कब राजनीती से अमलदारों अब तो तनिक पानी अपना चेहरा निहारो बूंद बूंद जी रहा है लातूर का हर निवाला क्रिकेट के मैदान से उसे अब तो उबारो।। सनक की भी अपनी एक...

  • “स्तुति”

    “स्तुति”

    दशरथ नन्दन अवध बिहारी, आय गए प्रभु लंका जारी धन्य धन्य है मातु कोसल्या, सीता सहित आरती उतारी॥ कोशल कवन भांति दुलराऊँ, हनुमत हिय सिय ढिग बैठारी लहेऊ लखन कर चूमत माथा, साधि पुरावति सब महतारी॥...