लघुकथा

लघुकथा : आत्ममंथन

“सम्पूर्ण विश्व में मेरा ही वर्चस्व है,” भूख ने भयानक स्वर में गर्जना की। “मै कुछ समझी नहीं,” प्यास बोली। “मुझसे व्याकुल होकर ही लोग नाना प्रकार के उद्योग करते हैं। यहाँ तक की कुछ अपना ईमान तक बेच देते हैं, ” भूख ने उसी घमंड में चूर होकर पुन: हुंकार भरी, “निर्धनों को तो मै […]