इतिहास

जैन कुबेर की एक मात्र अद्भुत प्राचीन प्रतिमा

वैदिक संस्कृति में कुबेर का अत्यधिक महत्व है। उसी तरह जैन संस्कृति में भी कुबेर को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। जैन पुराणों के अनुसार तीर्थंकर का जब जन्म होता है उसके छह माह पूर्व से ही कुबेर रत्नों की वर्षा करता है, जिससे उनके निश्चित क्षेत्र की जनता निर्धन और दुखी नहीं रहती। रत्नों की […]

इतिहास

नैनागिरि की आदिजिन पंचतीर्थी पुरातन प्रतिमा

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिलान्तर्गत नैनागिरि-रेसिन्दीगिरि अतिशय-सिद्ध क्षेत्र है। बाईसवें तीर्थंकर नेमिनाथ के काल से  इस तीर्थ का संबंध है। उस समय यहां से वरदत्त, सायरदत्त, गुणदत्त और मुनीन्द्रदत्त मुनि मोक्ष पधारे, लगभग दो हजार वर्ष पहले की रचना णिव्वाणभत्ति में इसका उल्लेख है। यह महान तीर्थ क्षेत्र तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की उपदेश भूमि- जिसे […]

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वास्तु के एक सुधार से हो सकती है करोड़ों की बचत

कुछ लोग वास्तुशास्त्र को बहुत हल्के में लेते हैं। ऐसे लोग कहते हैं वास्तु फालतू की चीज है, कुछ कहेंगे लोग अपना वास्तु का धंधा चमकाने के लिए इसे महत्व देते हैं। किन्तु वास्तुशास्त्र स्वयं में एक विज्ञान है। जो मकान वास्तुशास्त्रानुसार बने होते हैं उनमें प्रवेश करते ही एक अलग सी ऊर्जा अनुभूत होती […]

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भवन निर्माण में सीढ़ियों का महत्व

भवन में सीढ़ियां आवश्यक हैं, क्योंकि यह वास्तु के अनुसार विभिन्न मंजिलों की ऊर्जा के बीच एक कड़ी के रूप में काम करती हैं। सीढ़ी घर में अहम बिंदु हैं जो मजबूत ऊर्जा बनातीं हैं और अगर इन्हें सही तरीके से रखा जाए, तो ये परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि में योगदान दे सकती […]

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वास्तु अनुसार घर का मुख्य द्वार

कभी कभी वास्तु के दो-चार टिप्स जानकर लोग स्वयं को वास्तुविद् घोषित कर देते हैं और किसी के भी मकान या  दुकान में बिना जिज्ञासा के भी सलाह देने लगते हैं। ऐसे लोग प्रायः दोष ही गिनाते हैं। जिस मकान या दुकान में बदलाव संभव ही नहीं है, उसमें दोष बता देने से गृहस्वामी उद्विग्न […]

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घर में शौचालय किस दिशा में बनवाना चाहिए

वास्तु शास्त्र का बहुत महत्व है। वास्तु अर्थात् जमीन पर कोई भी निर्मिति- निर्माण। आज कोई कोई व्यक्ति यह भी कहते पाये जाते हैं कि वास्तु पहले नहीं था, तो क्या लोग ठीक से रहते नहीं थे? वास्तु पुरातन समय से विद्यमान है और जो मंदिर, किला, मकान बनवाये जाते थे वे सब वास्तुशास्त्र के […]

इतिहास

नौ युवतिओं की भावभंगिमाओं से हाथी का शिल्पन

हाथी को शिल्प कला में बहुत महत्व दिया गया है। प्राचीन वास्तु शिल्प चाहे वे देवालय हों, आवीसीय अट्टालिकाएँ हों या किले-बुर्ज, उनमें गज का अंकन एक तरह से अनिवार्य ही रहा है। मंदिरों के बाह्य भाग में तो हाथी का विभिन्न मुद्राओं में पंक्तिबद्ध शिल्पन अनेकानेक प्राचीन व अर्वाचीन मंदिरों की सुन्दरता व आर्षक […]

राजनीति

युद्ध कोई लड़े, वह हमारे विरुद्ध है

जब युद्ध दो देशों के मध्य चल रहा होता है तब उससे अप्रभावित देशों की जनता सोचती है कि उन्हें क्या लेना-देना, उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। तो यह गलत सोचते हैं लोग। कोई भी आधुनिक युद्ध प्रत्येक मानव या कहें प्रत्येक जीवन के विरुद्ध होता है। युद्ध में कोई भी अस्त्र […]

इतिहास

अरसीकेरे कर्नाटक का भव्य प्राचीन सहस्रकूट मंदिर

कर्नाटक का अरसीकेरे एक प्रमुख जैन केंद्र था। कहा जाता है कि यहाँ होयसलाओं के दौरान कई जैन मंदिर थे। अरसीकेरे शहर न केवल राजा वीरा बल्लाला-द्वितीय द्वारा निर्मित शिवालय है, बल्कि वह जगह भी है जहां कम विख्यात सहस्रकूट जिनालय, उसी काल की एक जैन बसदी अभी भी बुलंदी पर है। माना जाता है […]

इतिहास

नैनागिरि शिल्पकला में आभरण

नैनागिरि शिल्पकला में देवी-देवताओं व परिकर के पात्रों को बहुत सूक्ष्मता और उत्कृष्टता से आभरणों से अलंकृत किया गया है। देवों ही नहीं गजों को भी विविध अलंकरणों से भूषित किया है। नैनागिरि की मूर्तियों से ही लेकर यहाँ कुछ आभरणों का विवरण इस प्रकारा है- नूपुर- नूपुर पैरों का आभूषण है। यह विशेष रूप […]