गीतिका/ग़ज़ल

बहार नहीं है

सच का ये संसार नहीं है,खुशियों का व्यापार नहीं है। लोग यहाँ जो कसमें खाते,खाने को आहार नहीं है। सभी चाहते प्यारी दुल्हन ,पर बेटी स्वीकार नहीं है। ख़ुशी नहीं मिलती उस घर में ,जिस घर में मनुहार नहीं है। जहाँ खड़ी नफरत दीवारें,उस घर में अब प्यार नहीं है। राख के ढेर बहुत हैं […]

बाल कविता

मिलजुल के सीखो रहना जी

ये जीवन है एक लड़ाई,इसमें होती हाथापाई। जीतोगे तो ताज मिलेगा ,हारोगे तो मिलेगी खाई। वैसे तो मिलते कम मौके, पर जब पाओ करो भलाई। खुशियों के रंगीन चमन में,आग लगाती नफरत ताई। दुनिया के मेले में अक्सर,अच्छों में भी दिखी बुराई। मिलजुल के सीखो रहना जी,इसमें सबकी होय भलाई। — महेंद्र कुमार वर्मा

बाल कविता

बाल कविता – समोसे

गरम समोसे मुसकाते हैं ,मुँह में पानी वो लाते हैं। तीन नुकीले कोनों वाले ,सबके मन को ललचाते हैं। स्वाद चरपरा उसका होता ,चटनी साथ बहुत भाते हैं। चाय समोसे जब संग आते ,महफ़िल में रंग जमाते हैं। सुबह जलेबी और समोसे,जन जन पे ख़ुशी लुटाते हैं। — महेंद्र कुमार वर्मा

गीतिका/ग़ज़ल

तुम दीवानो

सही गलत अब तो पहचानो,किसको कब अपना तुम मानो। जीवन के इस आसमान में ,अपनी ख़ुशी पतंग तुम तानो। हार हार के थके नहीं क्या ,चलो सफलता की तुम ठानो। मीत तुम्हारे होंगे अनगिन ,कौन शत्रु है यह तुम जानो। गलत सही बातों को भाई , सच की छलनी में तुम छानो। जग को शक […]

बाल कविता

तीन बाल मुक्तक

ये दुनिया खुशियों का मेला ,इसमें भरना नहीं झमेला ,उससे मिलना ख़ुशी ख़ुशी से ,जो मानव होवे अलबेला। —जोर लगा के आगे बढ़ना ,सदा जीत की सीढ़ी चढ़ना,पथ में कांटे बहुत मिलेंगे ,पर तुम फूल महकते पढ़ना। —सच कहना औ सच ही सुनना ,अच्छी बातें मन में गुनना ,सच मिथ्या में जब चुनाव हो ,तुम […]

कुण्डली/छंद

डूबी सच नैया

सच नैया खेते रहे ,झूठ नदी पर यार,सच चप्पू करता रहा ,झूठ लहर से प्यार ,झूठ लहर से प्यार ,पवन उनको दुलरातीं ,जीवन के हर भेद ,पल पल उन्हें सिखातीं ,इक दिन टूटा प्यार ,दुखी हो गए खिवैया ,किया भंवर ने वार ,और डूबी सच नैया। — महेंद्र कुमार वर्मा

बाल कविता

रोना मत

रोना मत जी रोना मत ,किसी बात पे रोना मत। ख़ुशी मिले हंस देना जी ,दुख आए तो रोना मत। कठिन काम जब आए तो ,उसे देख के रोना मत। जब तुम रोओगे भाई,सब खुश होंगे रोना मत। जीत संग हार भी मिलते ,हार मिले तो रोना मत। दुख को तो चुप चुप पीना,ख़ुशी मिले […]

भाषा-साहित्य

लघुकथा

एक छोटी सी घटना जो दिल को झिंझोड़ कर रख दे और बहुत समय तक याद रहे ,उस पर लिखी लघुकथा कालजयी बन जाती है। कुछ लघुकथाएं बहुत लम्बी होकर अपने लघुकथा का दर्जा खो बैठती हैं। लघुकथा मानव मन के अनगिन रंगों को उजागर करता है। वास्तव में पूर्ण कथा होती है लघु कथा। […]

मुक्तक/दोहा

दोहे – झूठ

दुनिया सारी झूठ है ,झूठ सारा जहान,झूठ को सत्य मान ले,इसमें तेरी शान। —सच का इक दीपक जला,झूठ हुआ बेहाल,पर झूठ की आंधी ने,तोडा सच का जाल। —श्वेत झूठ इतना सबल,आए कभी न आँच.आज झूठ है जगत में,सबसे ताजा साँच। —शतरंजी ये जिन्दगी ,इसके चाल अजीब,चाल चलें जब सत्य की,पाते झूठ करीब। —जीवन के हर […]

बाल कविता

जंगल में चुनाव

जंगल मे चलने लगी,अब चुनाव की चाल ,झट से ओढ़ी शेर ने ,सज्जनता की खाल, सज्जनता की खाल, हुई बकरी मतवाली,हाथी हुआ शरीफ ,करे वन की रखवाली ,करे मुनादी ऊँट ,सभी कुछ होगा मंगल ,जीतेंगे फिर शेर ,हँसेगा फिर ये जंगल। — महेंद्र कुमार वर्मा