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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      खो चुका जो वो सुहाना था बताती है मुझे याद की खुशबू पहाड़ों से बुलाती है मुझे शिल्पकारी से सजे सुंदर शिकारे खो गये पीर अपनों से बिछडने की रुलाती है मुझे पीर भोगी है...