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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गुलशन का आज कैसा मंजर है जरा हट के दिखता कली के हाथ में पत्थर है जरा हट के इक आग़ सी लगी है दोनों तरफ ऐ ज़ानिब इक ज़ख्म है इधर तो कुछ दर्द जरा...

  • लघु कथा – ‘शक़’

    लघु कथा – ‘शक़’

    ”आ गए गुलछर्रे उड़ा कर” दरवाज़ा खोलते ही रूचि ने व्यंग्य से रोहन को बोला”. ”ये क्या कह रही हो ?” ”ठीक ही तो कह रही हूँ। मिस्टर रोहन, बहुत हो चुका अब चुप चाप बता दो की...