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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    खुद मुझको ही लुभाती रही रात भर ज़िंदगी मुझे… सिखाती रही रात भर अहमियत समझाने को मिठास की घूंट कड़वा भी पिलाती रही रात भर दिन बीत गया सारा खारे मिजाज़ में नग्मे खुशी के…..सुनाती रही...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    आईने को कभी अपनी अदा बताते रहिए सीरत और सूरत भी खुद आजमाते रहिए है तुम्हारा दुनिया से बस इतना राबता वो जलती है जितनी उसे जलाते रहिए मुखौटे बहुत सजे हैं चेहरे पर इंसान के...

  • एक साथ

    एक साथ

    एक दरिया एक कश्ती एक लहर एक साथ एक आरज़ू एक उम्मीद एक कहर एक साथ रस्मों रिवाजों रिश्तों की गहराई में मिलती एक अवाम एक बस्ती एक शहर एक साथ लाज़मी है कि गुज़रेगा उसी...

  • गीतिका

    गीतिका

    दिल की रूमानियत दिल ही जानता है पत्थरों मुर्दों को कौन ज़िन्दा मानता है मैनें कहा नहीं उसने सुन लिया सब कुछ मौन गुफ्तगू हर इशारा पहचानता है लब हिले भी नहीं बयाँ हक़ीक़त हो गयी...

  • कहानी – बँटवारा

    कहानी – बँटवारा

    जय प्रकाश के परिवार में उसकी माँ पत्नी एयर एक छोटी सी प्यारी सी बिटिया रहते थे ! जय प्रकाश का परिवार एक माध्यम आर्थिक स्थिति के वर्ग में आता है जहाँ सभी के कुछ न...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गुलशन में गुल महकते रहेंगे है साथ उनका संभलते रहेंगे असर दुआओं में भर लो इतना हादसे खुद ब खुद टलते रहेंगे पाना ही नहीं जिन्दगी का मकसद नए ख्वाब दिलों में मचलते रहेंगे कर ले...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सौगात इश्क की मिली दर्द पहली बार है खबर सारे जहाँ को हुई वाशिंदा बीमार है गुमसुम रहा करता है महफिलों में वो खुश रहने को तन्हाईयों की दरकार है जान बूझकर हारा दिल की बाजी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सौगात इश्क की मिली दर्द पहली बार है खबर सारे जहाँ को हुई वाशिंदा बीमार है गुमसुम रहा करता है महफिलों में वो खुश रहने को तन्हाईयों की दरकार है जान बूझकर हारा दिल की बाजी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिल्लगी औ दिल की लगी समझाता कौन है दर्द दिल में हो तो कहो…. मुस्कुराता कौन है बनती बिगड़ती देखी है हस्तियों की किस्मत समय के साथ चलने की शर्त निभाता कौन है चाँद तारे तोड़...

  • क़दम

    क़दम

    बहुत मुश्किल में फस गया विवेक… एक एक घडी उसे बेचैन किये जा रही थी कि जिस समस्या से वो बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है कोई भी रास्ता सूझ नहीं रहा और बिना किसी समाधान के...