कविता

कविता – दर्द

दर्द मुझ से गुनगुनाते हुये तन्हाई में अक्सर पूछता है मैं तो पूरी शिद्दत से वफा निभाता हूँ भोर – संध्या सा हमारा नाता है तुम क्यों मुझे ठुकरा कर बेवफाई का ख़िताब पाने को आतुर रहती हो मैं कहती हूँ जिंदगी पूरी गुजर गयी तेरे ही साथ अंतिम बेला में चंद पल मैं भी […]

कविता

कविता — बचपन

इठलाता लहराता चाँद लेने की जिद कर मचल कर रुठता झील में परछांई देख ख़ुशी से नाचता परिंदों को पकड़ने लपक कर दौड़ता नाजुक सी पीठ पर बस्ते को ढ़ोते सुबकते ठुमकते पाठशाला जाते हुये उड़ कर खो गया समय के फलक में मासूम बचपन ……। वक्त जिंदगी का यौवन उन्मुक्त नदी सा बह चला […]