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  • मुकरियाँ

    मुकरियाँ

    प्रीत बढ़ाए प्यास जगाए ख्वाब दिखाए मन महकाए हरा भरा धरती का आँगन का सखि साजन ना सखि सावन | तपती धरती व्याकुल जन मन ऐ • सी कूलर में भी तड़पन आने से जिसके मन...





  • आओ नव वर्ष मनाएँ

    आओ नव वर्ष मनाएँ

    नूतन बेला नूतन खुशियाँ नूतन संसार सजाएँ आओ नव वर्ष मनाएँ | कुछ यत्न करें कुछ नेक करें दुखियों के दुःख को दूर करें, मुझाए आनन पर आओ मिल कर मुस्कान खिलाएँ आओ नव वर्ष मनाएँ...

  • प्रण

    प्रण

    प्रण चिर दग्ध दुखी वसुधा को , भय त्रस्त भ्रमित मानव को , अलौकिक सुख की आशा में , बाँधने का प्रण। है | विश्रृंखलित पराजित मानवता को , जन मानस में व्याप्त विषमता को ,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिल की हसरत को दबाने की जरूरत क्या है ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ इश्क कीजे तो छुपाने की अरूरत क्या है | दिल की हसरत को दबाने की जरूरत क्या है | राह में इश्क के हर खार भी...

  • नारी

    नारी

    नारी घर संसार है, नारी है आधार| नारी पर क्यों हो रहा, फिर -फिर अत्याचार|| आदि शक्ति संजीवनी, जग की मूलाधार| स्वयं तरसती प्रीत को, बहती बन रसधार|| मासूमों को नोचते, करते नित संहार| स्वांग रचा...