भाषा-साहित्य

आलेख – बाल साहित्य में नवाचार

छोटी उम्र के बच्चों को ध्यान में रख कर लिखा गया साहित्य बाल साहित्य कहलाता है |साहित्य की परंपरा में बाल साहित्य भी बहुत धनी रहा है | बाल साहित्य लेखन की परंपरा अति प्राचीन है |पंचतंत्र नामक पुस्तक इसका उत्कृष्ट उदाहरण है ,जिसमें पशु पक्षियोंको माध्यम बनाकर बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती थी […]

कविता

जन-जन की पीड़ा दुःख हर लें

जन-जन की पीड़ा दुःख हर लें ~~~~~~~~~~~~~~~~ देखो बसन्त ने दस्तक दी पर प्रकृति नहीं मुस्कायी है | भय छुपा हुआ दृग में इतना हर कुसुम कली कुम्हलायी हैं| बागों में जो बगराता था बोलो बसन्त वो गया कहाँ – हर ओर धुन्द है दहशत की हर कली – कली मुरझाई है | अब तो […]

लघुकथा

विडम्बना

विडम्बना ********* आँगन में खेलते बच्चों को श्यामा आवाज लगाती है ! चलो आओ खेलना बंद करो बच्चो !! देखो मैने भोजन में कुछ खास बनाया है | तीनो बच्चे माँ की आवाज सन खुशी खुशी दौड़ आते हैं | माँ – माँ क्या बनाया है ? बहुत अच्छी सुगंध आ रही है ,मुन्नी बोल […]

गीतिका/ग़ज़ल

प्रेम धारा सरस् तुम बहाया करो

दिल हमारा न ऐसे दुखाया करो – सब्र मेरा न यूँ आजमाया करो | बेरुखी की तपिश से जले आशियाँ – प्रेम धारा सरस तुम बहाया करो | प्यार की रौशनाई में भीगे हुये- जुगनुओं की तरह जगमगाया करो | तोड़ कर हर रवायत की बंदिश सनम – बस मोहब्बत का वादा निभाया करो | […]

कहानी

इंसानियत अभी ज़िंदा है

इन्सानियत अभी ज़िंदा है *********************** शारदा उदय होते सूरज को नम आँखो से देख रही थी शुभ भी उसके पास बैठा था | शारदा बोलती ही जा रही थी , असंख्य रश्मियों के साथ तुम नित्य उदीयमान हो सकल संसार को प्रकाशित करते हो किंतु मेरे जीवन का तमस कभी समाप्त नहीं होता | क्यों […]

गीतिका/ग़ज़ल

बेटियाँ

बेटियाँ बेटियाँ हैं हसरतें दिल की कली- छोड़ दूजे घर बसें दस्तूर है | प्रेम के रस में पगी रस घोलती- ये दुआ रब की खुदा का नूर हैं | बेटियों से गूँजता है आँगना – ये न हों तो हर चमन बेनूर है | मत भरो इन आँख में यूँ अश्क को- ये खुदा […]

लघुकथा

कल और आज

कल आषाढी पूर्णिमा है !! निम्मी ! दही बरे और करायल (उरद पकौड़ी की सब्जी )जरूर बना लेना परसों से सावन लग जाएगा | खुद भी हरी चूड़ियाँ पहन लेना और मेरे लिये भी ले आना | माँ जी आज के जमाने में ये सब ढकोसले कोई नहीं करता रेवा और रवि तो पिज्जा बर्गर […]

गीतिका/ग़ज़ल

आँखे

आँखे ****** हाय दिल को लुभा गयी आँखे | रोग दिल का लगा गयी आँखे | नींद पलकों से गुम हुयी अब तो – ख्वाब लाखों सजा गयीं आँखें | तीर ऐसा चला नज़र का था – तिश्नगी को बढा गयी आँखे | राज दिल में दबा रखे थे जो – हाय पल में बता […]

लघुकथा

लघुकथा – खामोश प्रश्न

सुमन की चहकन से घर का कोना कोना चहका करता था |विवाह के बाद घर सूना हो गया एक उदासी जिसे रमा नाथ और लक्ष्मी दोनों छुपा रहे थे | तभी वीर आ आता है ; क्या हुआ माँ ! दीदी की की कमी लग रही है | दोनों मुस्कुरा देते हैं तू है न […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

में खोई ख्वाब में अक्सर नई दुनिया बनाती हूँ | जहाँ इन्सानियत पलती वहीं रिश्ता बनाती हूँ | जहाँ नफ़रत जहाँ रंजिश दिखी तकरार की रेखा – मिटा कर उन लकीरों को नयी रेखा बनाती हूँ | मुकम्मल ख्वाब होगा है यकीं दिल को हमारे भी – वही तदबीर करती हूँ वही रस्ता बनाती हूँ […]