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  • विडम्बना

    विडम्बना

    विडम्बना ********* आँगन में खेलते बच्चों को श्यामा आवाज लगाती है ! चलो आओ खेलना बंद करो बच्चो !! देखो मैने भोजन में कुछ खास बनाया है | तीनो बच्चे माँ की आवाज सन खुशी खुशी...



  • बेटियाँ

    बेटियाँ

    बेटियाँ बेटियाँ हैं हसरतें दिल की कली- छोड़ दूजे घर बसें दस्तूर है | प्रेम के रस में पगी रस घोलती- ये दुआ रब की खुदा का नूर हैं | बेटियों से गूँजता है आँगना –...

  • कल और आज

    कल और आज

    कल आषाढी पूर्णिमा है !! निम्मी ! दही बरे और करायल (उरद पकौड़ी की सब्जी )जरूर बना लेना परसों से सावन लग जाएगा | खुद भी हरी चूड़ियाँ पहन लेना और मेरे लिये भी ले आना...

  • आँखे

    आँखे

    आँखे ****** हाय दिल को लुभा गयी आँखे | रोग दिल का लगा गयी आँखे | नींद पलकों से गुम हुयी अब तो – ख्वाब लाखों सजा गयीं आँखें | तीर ऐसा चला नज़र का था...


  • गज़ल

    गज़ल

    में खोई ख्वाब में अक्सर नई दुनिया बनाती हूँ | जहाँ इन्सानियत पलती वहीं रिश्ता बनाती हूँ | जहाँ नफ़रत जहाँ रंजिश दिखी तकरार की रेखा – मिटा कर उन लकीरों को नयी रेखा बनाती हूँ...