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  • सावन

    सावन

    पावस की महिमा प्रबल ,चहुँ दिस बसी उमंग | हरी भरी धरती लगे , झरे प्रीत मकरंद || बरसे सावन बादरी , नाच रहे हैं मोर | कोयल कुहके बाग में , मन मे उठे हिलोर...


  • दोहे

    दोहे

    सावन पावस की महिमा प्रबल ,चहुँ दिस बसी उमंग | हरी भरी धरती लगे , झरे प्रीत मकरंद || बरसे सावन बादरी , नाच रहे हैं मोर | कोयल कुहके बाग में , मन मे उठे...




  • कविता – सावन घन

    कविता – सावन घन

    पुलकित है प्यासा मन नाच उठा अंतर मन बरसे यह सावन घन उमड़ घुमड़ बरसे|| मेघों से याचक बन देखो प्रेमी चातक स्वाती की एक बूँद माँग रहा कबसे|| बरसे अविरल बादल नेह के आँगन आँगन...