गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल सच किसी में निहा नहीं होता

तुम नही तो जहाँ नहीं होता बिन तेरे ये समाँ नहीं होता दूर रह कर करीब हो दिलके प्यार कह कर बयाँ नही होता मूँद ली जब लजा के यों पलकें रूप तेरा बयाँ नहीं होता प्रीत में और प्रीत घुलती है सच किसी में निहाँ नहीं होता साथ कुछ देर और चलने से हाल […]

गीतिका/ग़ज़ल

रंग जिंदगी के

रंग जिंदगी के होते बहुत निराले हैं रंग ज़िन्दगी के, उल्फ़त कभी जफ़ा से हैं रंग ज़िन्दगी के l उल्लास की ज़मीं पर तारे उतार लाती, होटों पे तबस्सुम से हैं रंग जिंदगी के l बाज़ारे मुफ़्लसी में ईमान का सौदा है, उम्मीद की कली से हैं रंग जिंदगी के l सुख हैं तो कभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

उत्तरप्रदेश

*उत्तर प्रदेश* नव कलेवर नव दिशा में बढ़ रहा उत्तर प्रदेश । अब नवल परिवेश गढ़ कर खिल रहा उत्तर प्रदेश । शुद्ध वातायन हुआ है,प्रकृति मुस्काने लगी, योग की पावन ज़मीं फिर गढ़ रहा उत्तर प्रदेश। राम लक्षण की ज़मी आदर्श जो बिसरा दिए , सभ्यता आदर्श वह दोहरा रहा उत्तर प्रदेश। जो मनुज […]

कविता

कविता

*नवल आभा ज्ञान की लौ से मिटेगा हर अंधेरा* साल का अंतिम दिवस ये कह रहा हैं आज हमसे | मैं तुम्हारी भूल लेकर जा रहा लौटू न फिरसे | कर प्रायश्चित भूल दोहराना नहीं गत में करी जो | छोड़ना दुर्भावनाएं हों अगर मन में कहीं जो | और आगत को सजाना प्राप्त सारे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नफ़रत मिटाना चाहिए ज़िंदगी के फलसफ़े को आजमाना चाहिये सुख मिले या दुख हमें बस मुस्कराना चाहिये | हर तरफ़ खुशियाँ बरसती हों कहाँ तक लाज़मी पास हों खुशियाँ अगर सब में लुटाना चाहिये | दर्द पी कर जी रहेजो तड़फड़ाते भूमि पर रिस रहे उन घाव पर मरहम लगाना चाहिये | है अगर इन्सानियत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

प्यार बसाकर तो देखिए ~~~~~~~~~~~~ नफरत को ज़हनों दिल से भुलाकर तो देखिए । मां भारती की शान बढ़ाकर तो देखिए । हरबार सरलता से नहीं काम चलेगा, कुछ कारगर कदम को उठाकर तो देखिए । होगी न अमावस की रात होगा उजाला, पूनम का चांद दिल में उगाकर तो देखिए । उम्मीद फिर फलेगी […]

कुण्डली/छंद

आल्हा छंद : नारी का जग पर उपकार

साहस शौर्य शक्ति की प्रतिमा, नारी का जग पर उपकार दुर्गा लक्ष्मी राजपुतानी, की गाथाये कहें पुकार जग को जीवन देने वाली, जिससे है जग में पहचान त्याग तपस्या की मूरत सी, नारी जग का है आधार लक्ष्मी बाई, दुर्गा बन कर, करे शत्रुओं का संहार विकट परिस्थितियाँ हों चाहें, करती नहीं हार स्वीकार मानव […]

कविता

फूल पर तीन कविताएं

1) फूल की बात ************ कंटकों में फूल मुस्काता हुआ यह कह रहा है , प्रकृति हो सुर्भित इसी से इस चुभन को सह रहा हूँ | आँधियों में ताप में पतझाड़ की इस मार को सह, मैं पुन: मधुमास लाने के लिये ही जी रहा हूँ | खार के संग पल रहा हूँ मुस्कराकर […]

कहानी

कहानी – सुगंध

सात भाई – बहन में सबसे छोटी गायत्री घर में सबकी लाड़ली थी| घर का काम- काज तो उसे कभी करना ही नहीं पड़ा | समय के साथ-साथ वह भी बड़ी हो रही थी |पर अभीभी वही ढंग था जीने का वही पुरानी दिनचर्या मौज – मस्ती , पढना , खेलना बस| धीरे- धीरे तीन […]

लघुकथा

पहचान (लघु कथा )

पहचान (लघु कथा ) मीरा उठ दिन चढ आया | कबतक सोती रहेगी जा बबलू को स्कूल छोड़ आ |माँ मुझे भी स्कूल जाना है ,मेरा भी बस्ता ला दे| “अरे करम जली चुप रह !बापू सुन लेंगे तो अनर्थ हो जाएगा “| लड़किया तो चुल्हे चौके के लिये ही बनी है | माँ……… मै […]