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  • बसन्त

    बसन्त

    बसन्त ***** आया ऋतुराज बसन्त देख उल्लास प्रकृति में छाया , खिल गए कुसुम किंशुक पलाश चहुँ ओर हर्ष है छाया | यह शस्य श्यामला धरा खिली रंग गयी विविध रंगों से | लहराये लंहगा हरा...

  • सरस्वती वंदना

    सरस्वती वंदना

    सरस्वती वंदना ************* हे हंस वाहिनी मुझे वरदान दो वरदान दो | अपनी कृपा की कोर दो उत्थान दो वरदान दो | वागीश वीणा वादिनी करुणा करो करुणा करो | मुझको अगम स्वर ज्ञान का वरदान...

  • यात्रावृत्त – मेला

    यात्रावृत्त – मेला

    प्रकृति की नैसर्गिक सुषमा का अवलोकन करना किसको नहीं भाता ,मुझे भी बहुत लुभाती है यह प्रकृति | विवाह के बाद प्रत्येक वर्ष जून में हम भारत के किसी न किसी प्रांत का भ्रमण अवश्य करते...

  • बचपन का संसार

    बचपन का संसार

    बचपन का संसार बड़ा सजीला रंग रंगीला खेल खिलौनो का संसार | बचपन मे हम खेला करते , गुड्डे गुड़िया का घर बार | कभी बनाते एक तराजू , छोटी छोटी दिया निकाल | निमकौरी का...

  • कल और आज

    कल और आज

    कल और आज जी रहा यंत्रवत जीवन को , दो पल सुकून के ढूंढ रहा | अनजान अजनबी सा मानव , अब भी बिल्कुल न चेत रहा | युग है संचार साधनों का , मानव भी...

  • रोला छंद

    रोला छंद

    रोला छन्द तीन मुक्तक (1) जीवन के पल चार ,सदा खुश होकर जी लो अधरों की मुसकान ,बाँट कर खुशियाँ घोलो | मिटे कुहासा द्वन्द,करें कुछ ऐसा आओ बढे परस्पर प्रेम ,जहाँ को स्वर्ग बनाओ |...

  • पौधों से प्रेम

    पौधों से प्रेम

    पौधों से प्रेम गीतिका को पेड़- पौधों से विशेष लगाव था| कोई बेवजह पौधों को नुकसान पहुंचाए उसे बेहद नागवार था |घर के सामने पार्क में गीतिका ने कई बडे पेड़ो के पौधे लगाये |ये सोंच...

  • शिक्षा का महत्व

    शिक्षा का महत्व

    शिक्षा का महत्व सन्तोष ! मीना और अपने बच्चों के साथ खुश था किसी चीज की कोई कमीं नहीं थी |सन्तोष को जितना पढाई-लिखाई से प्यार था ,उसके बच्चे शिक्षा के प्रति उतने ही उदासीन थे...

  • बेटियाँ

    बेटियाँ

    बेटियाँ आँगनो मे घूमती फिरती मचलती हैं तितलियाँ छीन ली सारी खुशी वो अब न हैं अठखेलियाँ | रंग सतरंगी बिखेरे आसमानी हो समां- आंगनों मे है रंगोली जब तलक हैं बेटियाँ | प्यार की बस्ती...

  • धर्मधारा (लघुकथा )

    धर्मधारा (लघुकथा )

    धर्मधारा टन -टन -टन बाइस्कोप वाला आया तमाशा देखो आओ बच्चो कठपुतली का खेल देखो की आवाज सुनते ही मोहल्ले के बच्चे इकट्ठा हो जाते |धर्मेश और धारा बच्चों को खेल तमाशा दिखा कर मनोरंजन करते...