गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

23/3/20 कॅरोना ग़मज़दा हो रही है धरा आसमा- वक्त थम सा गया रोग आने के बाद | डोर अब भी तेरे हाथ मे है सुनो- घर से निकलो ‘कॅरोना’ भगाने के बाद | बाग शाहीन अब मत सियासत गढ़ो- ना सम्भलपाओगे लड़खड़ाने के बाद| कौम से देश ऊपर रहा है सदा – माफ़ियाँ ना मिलेंगी […]

कुण्डली/छंद

कुंडलिनी छंद : कोरोना विकट महामारी

पीड़ित सकल समाज है,कोरोना से आज | ड्रैगन की करतूत से, गिरी सभी पर गाज | गिरी सभी पर गाज ,विश्व को इसने मारा | जीना है दुस्वार,समय की बदली धारा | * संयम सद्संकलप से, बनते काम तमाम | बार बार धों हाथ को,लें विवेक से काम | लें विवेक से काम ,रहें अपने […]

गीत/नवगीत

कैसे गाऊँ गीत प्रेम का

कैसे गाऊँ गीत प्रेम के पिय का प्रीत कलश रीता | हृदय पटल पर हे प्रिय हमने , अंकित तेरा नाम किया | सेंदुर माँग सजाया हमने , काजल बिंदिया सजा लिया | श्वेत पत्र सा हृदय तुम्हारा , पर रंगों से नहीं रंगा | कैसे गाऊँ – – – – – – जीवन को […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

परचम हमारे देश का ऐसा लहर गया | भारत हमारा विश्व के दिल में उतर गया | सीने पे खा जो गोलियाँ जय बोलते रहे- उनके लहू से देश का चेहरा निखर गया | जाँबाज सरफरोश निडर देश के वो लाल- करतब को जिनके देख के दुश्मन सिहर गया | फांसी का फंदा चूम के […]

गीत/नवगीत

निर्भया और स्वर्ग

निर्भया और स्वर्ग ____________ बादल बीच लगाकर सीढ़ी ,स्वर्ग द्वार खोला| किरणों से ले ज्योति पुंज ,घर में अपार घोला| स्वर्णिम आभा ले धरती पर स्वर्ग बसाया हमने – पर हैवानों से जीवन का तार-तार डोला| मैंने अपने सपनों को परवान चढ़ाया था| अरमानों की लगा सीढियाँ स्वर्ग बसाया था| बीच बैठ बादल के रथ […]

भाषा-साहित्य

आलेख – बाल साहित्य में नवाचार

छोटी उम्र के बच्चों को ध्यान में रख कर लिखा गया साहित्य बाल साहित्य कहलाता है |साहित्य की परंपरा में बाल साहित्य भी बहुत धनी रहा है | बाल साहित्य लेखन की परंपरा अति प्राचीन है |पंचतंत्र नामक पुस्तक इसका उत्कृष्ट उदाहरण है ,जिसमें पशु पक्षियोंको माध्यम बनाकर बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती थी […]

कविता

जन-जन की पीड़ा दुःख हर लें

जन-जन की पीड़ा दुःख हर लें ~~~~~~~~~~~~~~~~ देखो बसन्त ने दस्तक दी पर प्रकृति नहीं मुस्कायी है | भय छुपा हुआ दृग में इतना हर कुसुम कली कुम्हलायी हैं| बागों में जो बगराता था बोलो बसन्त वो गया कहाँ – हर ओर धुन्द है दहशत की हर कली – कली मुरझाई है | अब तो […]

लघुकथा

विडम्बना

विडम्बना ********* आँगन में खेलते बच्चों को श्यामा आवाज लगाती है ! चलो आओ खेलना बंद करो बच्चो !! देखो मैने भोजन में कुछ खास बनाया है | तीनो बच्चे माँ की आवाज सन खुशी खुशी दौड़ आते हैं | माँ – माँ क्या बनाया है ? बहुत अच्छी सुगंध आ रही है ,मुन्नी बोल […]

गीतिका/ग़ज़ल

प्रेम धारा सरस् तुम बहाया करो

दिल हमारा न ऐसे दुखाया करो – सब्र मेरा न यूँ आजमाया करो | बेरुखी की तपिश से जले आशियाँ – प्रेम धारा सरस तुम बहाया करो | प्यार की रौशनाई में भीगे हुये- जुगनुओं की तरह जगमगाया करो | तोड़ कर हर रवायत की बंदिश सनम – बस मोहब्बत का वादा निभाया करो | […]

कहानी

इंसानियत अभी ज़िंदा है

इन्सानियत अभी ज़िंदा है *********************** शारदा उदय होते सूरज को नम आँखो से देख रही थी शुभ भी उसके पास बैठा था | शारदा बोलती ही जा रही थी , असंख्य रश्मियों के साथ तुम नित्य उदीयमान हो सकल संसार को प्रकाशित करते हो किंतु मेरे जीवन का तमस कभी समाप्त नहीं होता | क्यों […]