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बाधक शत्रु हमारे कल्याणकारी मार्ग से दूर हों

ओ३म् आचार्य डा. रामनाथ वेदालंकार जी वेदों को समर्पित अत्यन्त उच्च कोटि के विद्वान थे। उन्होंने जीवन भर वेद सेवा की है। अपने वेदों के प्रौढ़ ज्ञान से उन्होंने वेदों पर बड़ी संख्या में उच्च कोटि के ग्रन्थ लिखे हैं। उन्होंने सामवेद का संस्कृति व हिन्दी सर्वोत्तम भाष्य किया है जो वैदिक विद्वानों में समादृत […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वव्यापक, अजन्मा एक ईश्वर ही सबका का उपासनीय है

ओ३म् मनुष्य का अस्तित्व अपने माता व पिता के द्वारा होता है। माता-पिता भी इस सृष्टि के नियमों का पालन करते हुए सन्तानों को प्राप्त करते व सृष्टि की आदि से चली आ रही परम्पराओं का निर्वहन करते हुए उनका पालन व पोषण करते हैं। माता-पिता सन्तान को जन्म देने में निमित्त कारण नहीं होते। […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मैं और मेरा देश

ओ३म् मैं अपने शरीर में रहने वाला एक चेतन तत्व हूं। आध्यात्मिक जगत् में इसे जीवात्मा कह कर पुकारा जाता है। मैं अजन्मा, अविनाशी, नित्य, जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसा हुआ तथा इससे मुक्ति हेतु प्रयत्नशील, चेतन, स्वल्प परिमाण वाला, अल्पज्ञानी एवं ससीम, आनन्दरहित, सुख-आनन्द का अभिलाषी तत्व हूं। मेरा जन्म माता-पिता से हुआ है। […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

स्वामी श्रद्धानन्द के जन्मना जाति व्यवस्था पर उपयोगी विचार

ओ३म् स्वामी श्रद्धानन्द महर्षि दयानन्द के अनुयायी, आर्य समाज के नेता, प्राचीन वैदिक शिक्षा गुरूकुल प्रणाली के पुनरुद्धारक, स्वतन्त्रता संग्राम के अजेय सेनानी तथा अखिल भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा के प्रधान थे। हिन्दू जाति को संगठित एवं शक्तिशाली बनाने के लिए आपने एक पुस्तक ‘हिन्दू संगठन – क्यों और कैसे?’ का प्रणयन किया था। यह […]

समाचार

ईश्वर हमारे सभी दुरितों व क्लेषों को दूर करने सहित हममें वैराग्य भावनायें भरें: साध्वी प्रज्ञा

ओ३म् रविवार दिनांक 28-3-2021 को वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून में दिनांक 7 मार्च, 2021 से चल रहे तीन सप्ताह के चतुर्वेद पारायण एवं गायत्री यज्ञ का समापन हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य सन्दीप जी थे। यज्ञ में मन्त्रोच्चार गुरुकुल पौंधा-देहरादून के चार ब्रह्मचारियों ने किया। स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में यह […]

समाचार

परमात्मा ने हमारे सुख के लिये इस विशाल ब्रह्माण्ड को बनाया हैः स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती

ओ३म् वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून की पर्वतीय इकाई तपोभूमि में दिनांक 7 मार्च से 28 मार्च तक चतुर्वेद पारायण एवं गायत्री महायज्ञ सम्पन्न हुआ। इस अवधि में योग एवं ध्यान शिविर भी संचालित हुआ। यह आयोजन स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी की प्रेरणा, उनके संरक्षण एवं पोषण सहित उनके मार्गदर्शन में हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

महात्मा बुद्ध ईश्वर में विश्वास रखने वाले आस्तिक थे?

ओ३म् महात्मा बुद्ध को उनके अनुयायी ईश्वर में विश्वास न रखने वाला नास्तिक मानते हैं। इस सम्बन्ध में आर्यजगत के एक महान विद्वान पं. धर्मदेव विद्यामार्तण्ड अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘‘बौद्धमत एवं वैदिक धर्म” में लिखते हैं कि आजकल जो लोग अपने को बौद्धमत का अनुयायी कहते हैं उनमें बहुसंख्या ऐसे लोगों की है जो ईश्वर […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आर्य सुधारक थे महात्मा बुद्ध

ओ३म् बौद्ध मत के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध के बारे में यह माना जाता है कि वह आर्य मत वा वैदिक धर्म के आलोचक थे एवं बौद्ध मत के प्रवर्तक थे। उन्हें वेद विरोधी और नास्तिक भी चित्रित किया जाता है। हमारा अध्ययन यह कहता है कि वह वेदों को मानते थे तथा ईश्वर व जीवात्मा […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

महर्षि दयानन्द ने वेदों का प्रचार और खण्डन-मण्डन क्यों किया?

ओ३म् महर्षि दयानन्द ने अपने वैदिक, योग एवं उपासना ज्ञान सहित तदनुरूप कार्यों से विश्व के धार्मिक व सामाजिक जगत में अपना सर्वोपरि स्थान बनाया है। उन्होंने सप्रमाण सिद्ध किया है कि ज्ञान-विज्ञान का स्रोत ईश्वर व वेद हैं। आर्यसमाज के दस नियमों में उन्होंने पहला ही नियम बनाया है कि सब सत्य विद्या और […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

धर्म के अनुशासन बिना विज्ञान मानव जीवन के लिए अहितकारी है

ओ३म् आजकल विज्ञान की उन्नति ने सबको आश्चर्यान्वित कर रखा है। दिन प्रतिदिन नये नये बहुपयोगी उत्पाद हमारे ज्ञान व दृष्टि में आते रहते हैं। बहुत कम लोग जानते होंगे कि उनकी अनेक समस्याओं का कारण भी विज्ञान व इसका दुरुपयोग ही है। इसका मुख्य उदाहरण तो वायु, जल और पर्यावरण प्रदुषण का है। यह […]