सामाजिक

संस्कृत व इतर भाषाओं का अध्ययन और महर्षि दयानन्द

हम समझते हैं कि महर्षि दयानन्द जी का यह पत्र उनके संस्कृत प्रेम को प्रदर्शित करने के साथ पाठशाला में संस्कृत की उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है जो उनके पत्र में लिखित आगामी शब्दों से प्रकट हो रहा है – ‘मुंशी कालीचरण रामचरण जी के पत्र से विदित हुआ कि आप लोगों की पाठशाला […]

समाचार

वेदों का ज्ञान अपौरूषेय अर्थात् ईश्वर प्रदत्त हैः आचार्य धनंजय

आर्यसमाज सुभाषनगर का वार्षिकोत्सव संपन्न  आयोजन में पं. धर्मसिंह ने अपनी भजन मण्डली सहित प्रभावशाली भजन प्रस्तुत किये जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रातःकाल डा. आचार्य धनंजय आर्य के ब्रह्मत्व में बृहद यज्ञ सम्पन्न हुआ जिसमें वेदपाठ और मंत्रोच्चार आर्यसमाज के पुरोहित श्री अमरनाथ एवं श्रीमद्दयानन्द आर्ष गुरूकुल, पौंधा, देहरादून के लगभग 11 ब्रह्मचारियों ने किया। […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वाल्मीकि के राम और वैदिक धर्म

सृष्टि के आरम्भ से अब तक संसार के इतिहास में अगणित महापुरूष हुए हैं परन्तु ज्ञात पुरूषों में अयोध्या के राजा दशरथ पुत्र श्री राम चन्द्र जी का स्थान अन्यतम है। इसका प्रमाण वाल्मीकि रामायण एवं विश्व इतिहास में हुए प्रसिद्ध महापुरूषों के जीवन चरित्र हैं। श्री राम चन्द्र जी के जीवन चरित्र लेखक महर्षि […]

सामाजिक

संसार से धार्मिक अज्ञान व अन्धविश्वासों को दूर करने का क्या कोई उपाय है?

विगत दो या तीन शताब्दियों में देश व दुनियां में विज्ञान ने अभूतपूर्व उन्नति की है। आज से दो सौ साल पहले किसी ने सोचा भी न था कि कभी हमारे देश या संसार में बैलगाड़ी व तांगे का युग समाप्त होगा और साईकिल, पेट्रोल से चलने वाले स्कूटर वा मोटरसाइकिल, कार, रेल, भूमिगत मैट्रो, […]

सामाजिक

माता के दूध का ऋण, सत्य धर्म की खोज व उसका पालन’

अपार ब्रह्माण्ड का एक छोटा सा ग्रह यह पृथिवी लोक सर्वत्र मुनष्यों एवं अन्य प्राणियों से भरा हुआ है। मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसे परमात्मा ने बुद्धि तत्व दिया है जो ज्ञान का वाहक है। ईश्वर निष्पक्ष एवं सबका हितैषी है। इसी कारण उसने हिन्दू, मुसलमान व ईसाई आदि मतों के लोगों में किंचित […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर का नाम ‘सच्चिदानन्द’ क्यों व कैसे?

सत्य शब्द किसी के अस्तित्व की सत्यता को कहते हैं। ईश्वर सत्य है, यदि ऐसा कहें तो इसका अर्थ होता है कि ईश्वर का अस्तित्व वास्तविक व यथार्थ है अर्थात् सत्य है। इसका विपरीत अर्थ करें तो कहेंगे कि ईश्वर के अस्तित्व होना मिथ्या नहीं है। ऐसा नहीं है कि ईश्वर हो ही न और […]

इतिहास

‘आर्यसमाज की स्थापना से संसार में नए युग का शुभारम्भ’

यह संसार विगत लगभग 2 अरब वर्षों से अस्तित्व में है। इस अवधि में नाना महत्वपूर्ण ऐतिहासक घटनायें घटी हैं परन्तु उनमें से कुछ थोड़ी सी घटनाओं के दिन व तिथियां ही ज्ञात हैं। आज से 140 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल पंचमी तदनुसार 10 अप्रैल, 1875 को महर्षि दयानन्द सरस्वती ने मुम्बई के गिरगांव मोहल्ले […]

इतिहास

आर्य समाज के उर्दू साहित्य का संरक्षण व उसका हिन्दी अनुवाद

महाभारत काल के बाद लगभग 5000 वर्ष का समय भारत के धार्मिक एवं सामाजिक जगत के लिए ह्रास व पतन का था। ऐसे समय में महर्षि दयानन्द ने 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई में आर्य समाज की स्थापना की। महर्षि दयानन्द वेदों के पारदर्शी विद्वान थे और महाभारत काल के बाद वा विगत 5,000 वर्षों […]

सामाजिक

संस्कृत भाषा का महत्व व इसके प्रचार पर विचार

संस्कृत भाषा संसार की प्राचीनतम एवं प्रथम भाषा है। इस भाषा में ही सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर ने वेदों का ज्ञान दिया था। हमने एक लेख में यह विचार किया था कि क्या ईश्वर के अपने निज प्रयोग की भी क्या कोई भाषा है? इसके समाधान में हमारा निष्कर्ष यह था कि ईश्वर भी […]

इतिहास

‘परोपकारिणी सभा के उत्सव में पं. श्यामजी कृष्ण वर्म्मा और पं. गुरूदत्त विद्यार्थी के ऐतिहासिक व्याख्यान’

इस लेख में इतिहास के एक महत्वपूर्ण प्रसंग की चर्चा कर रहे हैं। 28 व 29 दिसम्बर सन् 1887 को परोपकारिणी सभा अजमेर का दो दिवसीय वार्षिकोत्सव था। इस अवसर पर वहां दयानन्द आश्रम का शिलान्यास भी किया जाना था जो कि सम्पन्न हुआ था। इस उत्सव में प्रसिद्ध क्रान्तिकारी व सभी देशभक्त क्रान्तिकारियों के […]