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  • तत्कालीन वस्तुस्थिति

    तत्कालीन वस्तुस्थिति

    सन 2014 के आम चुनावो के होने तक आम जनमानस की मनोदशा ऐसी ही थी…हर ओर सिर्फ अंधेरा ही दिखता था …. और तब……..   बढ़ता जितना अंधियारा है आलम हो जाता कारा है जब घड़ा...

  • आपातकाल

    आपातकाल

    सोचो कैसे तब वो दिन थे गुजरा वो हर क्षण गिन गिन के कुछ बोल नही तब पाते थे कुछ लिखने से घबराते थे था लोकतंत्र शरशय्या पर वो उतरे ,उसकी हत्या पर क्या पंचशील से...

  • मेरी चाह

    मेरी चाह

    दूर अंधेरा कर देने को दीपक सा जल पाऊँ मैं चाह यही है काल से पहले ऐसा कुछ रच जाऊँ मैं निर्धन की कुटिया का थोड़ा , उजियाला बन छाऊँ मैं चाह यही है काल से...

  • गीतिका

    गीतिका

    इतना मत खुद पे ताप सहो , तुम एक जलावन बन जाओ इतने न विभीषण पालो तुम , की खुद ही रावण बन जाओ है अलग अलग छत्रप जितने , सबकी धरती क्यो हड़प रहें है...

  • धर्मयुद्ध नव भारत का

    धर्मयुद्ध नव भारत का

    पूरी दुनिया नतमस्तक हो , माँ भारती का सम्मान करें कहो कौन बनेगा नीलकंठ , जो हँस कर के विषपान करे फिर बाल्मीक आ जाएंगे ,पहले कोई राजा राम मिले ये धर्म युद्ध नव भारत का...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    राज अभी कई गहरे बाकी है टूटने को ख्वाब सुनहरे बाकी है पकड़े गए है लुटेरे कुछ ही अभी तो कितने चेहरे बाकी है इक नल ही पकड़ा है पाप का अभी सागर नदिया नहरे बाकी...

  • गीत

    गीत

    सबने केवल गीत लिखे है ,लैला शीरीं हीर के कोई गीत नही लिखता है , भारत माँ की पीर के   सब ग़ज़ले लिखने में रहते ,  शेरों में  श्रृंगार लिखे आशिक लिखते, राँझा लिखते ,...

  • गीत पीर के

    गीत पीर के

    सबने केवल गीत लिखे है ,लैला शीरीं हीर के कोई गीत नही लिखता है , भारत माँ की पीर के सब ग़ज़ले लिखने में रहते , शेरों में श्रृंगार लिखे आशिक लिखते, राँझा लिखते , मजनूं...

  • मोजू का हथौड़ा

    मोजू का हथौड़ा

    तब भी दुश्मन ही जीता था , भारत माँ ही हारी थी जीत नही थी वो भी तेरी, वो तेरी गद्दारी थी दुश्मन जीता उसका तुम सब ,मिल कर के उल्लास करो अमर शहीदों की कुर्बानी,...