गीतिका/ग़ज़ल

अब तक नही संभले

ठगे तुम ही गए हो आज तक कोई न फिर ठग ले तुम्ही ने ठोकरे खाई मगर अब तक नही संभले जिन्हें दुश्मन समझ बैठे हो तुम पूर्वज तुम्हारे है जरा सी बात भी पल्ले नही पड़ती है क्यो पगले जिन्हें था नाज हिंदुस्ता पे वो मोमिन कहा अब है यहां दिखते जियादातर नकाबों में […]

कविता

तत्कालीन वस्तुस्थिति

सन 2014 के आम चुनावो के होने तक आम जनमानस की मनोदशा ऐसी ही थी…हर ओर सिर्फ अंधेरा ही दिखता था …. और तब……..   बढ़ता जितना अंधियारा है आलम हो जाता कारा है जब घड़ा पाप का है भरता वो अपनी मौत मरा करता विद्रोही होती सभी दिशा हाँ, हारे तब मनहूस निशा   […]

कविता

आपातकाल

सोचो कैसे तब वो दिन थे गुजरा वो हर क्षण गिन गिन के कुछ बोल नही तब पाते थे कुछ लिखने से घबराते थे था लोकतंत्र शरशय्या पर वो उतरे ,उसकी हत्या पर क्या पंचशील से पाया कह क्यों भारत को लुटवाया कह जब मानसरोवर खोया था पूरा भारत ही रोया था हर भारतवासी लाश […]

गीत/नवगीत

मेरी चाह

दूर अंधेरा कर देने को दीपक सा जल पाऊँ मैं चाह यही है काल से पहले ऐसा कुछ रच जाऊँ मैं निर्धन की कुटिया का थोड़ा , उजियाला बन छाऊँ मैं चाह यही है काल से पहले ऐसा कुछ रच जाऊँ मैं घोर निराशा में हो जो भी उनको कुछ विश्वास मिले शायद मेरी कविताओं […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

इतना मत खुद पे ताप सहो , तुम एक जलावन बन जाओ इतने न विभीषण पालो तुम , की खुद ही रावण बन जाओ है अलग अलग छत्रप जितने , सबकी धरती क्यो हड़प रहें है राज दिया तुम राम बनो , मत आप युँ वामन बन जाओ हे पतित पावनी गंगा माँ , कब […]

कविता

धर्मयुद्ध नव भारत का

पूरी दुनिया नतमस्तक हो , माँ भारती का सम्मान करें कहो कौन बनेगा नीलकंठ , जो हँस कर के विषपान करे फिर बाल्मीक आ जाएंगे ,पहले कोई राजा राम मिले ये धर्म युद्ध नव भारत का ,फिर सारथी न घनश्याम मिले तो उठो सभी जन बन अर्जुन , गांडीव धरो संग्राम करो ये समर अधूरा […]

कविता

याद गोधरा की ,जलती हुई वसुंधरा की

रेल में बैठे थे यात्री कई हजार सफर में मशगूल , खुशियाँ अपरंपार पर अचानक घटित हुआ कुछ ऐसा इक डब्बे पर अचानक हुआ वार याद है ना वो प्लेटफार्म , वो डब्बे वो जलने के निशान ,वो काले धब्बे बंद थे बाहर से दरवाजे अंदर से आ रही थी आवाजे कातर स्वर में चीख […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

राज अभी कई गहरे बाकी है टूटने को ख्वाब सुनहरे बाकी है पकड़े गए है लुटेरे कुछ ही अभी तो कितने चेहरे बाकी है इक नल ही पकड़ा है पाप का अभी सागर नदिया नहरे बाकी है इक जरा सी हलचल में लड़खड़ा गए अभी तो सुनामी लहरे बाकी है युँ ही लिखा है मोजू […]

गीत/नवगीत

गीत

सबने केवल गीत लिखे है ,लैला शीरीं हीर के कोई गीत नही लिखता है , भारत माँ की पीर के   सब ग़ज़ले लिखने में रहते ,  शेरों में  श्रृंगार लिखे आशिक लिखते, राँझा लिखते , मजनूं का वो प्यार लिखे   कोई कलम न लिखना चाहती, भारत माँ की आहो को सबने लिखना चाहा […]

कविता

गीत पीर के

सबने केवल गीत लिखे है ,लैला शीरीं हीर के कोई गीत नही लिखता है , भारत माँ की पीर के सब ग़ज़ले लिखने में रहते , शेरों में श्रृंगार लिखे आशिक लिखते, राँझा लिखते , मजनूं का वो प्यार लिखे कोई कलम न लिखना चाहती, भारत माँ की आहो को सबने लिखना चाहा है बस, […]