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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वो  मांगता  है  पता  आज  हमसे  साहिल का, कभी  रहा है  सबब,  जो  हमारी  मुश्किल का। उठी  हैं  फिर  से  घटाएँ,   घुमड़  रहा  सावन, ये किसकी याद में मौसम बदल गया दिल का। न  ...

  • गीत

    गीत

    उद्गार मेरे, सुन प्राण प्रिये इक गीत बना कर लाया हूँ मैं तेरे लिये, सुन प्राण प्रिये। ख्वाबों में तुझको बुलाता हूँ सपनों में तुझको सजाता हूँ दिन रात जलाये रखता हूँ आँखों में तेरी चाहत...

  • कर संगत

    कर संगत

    अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया की हमारे देश के लोग कर भुगतान में सबसे पीछे हैं। यह बात शत प्रतिशत सही है। कर न देने के लिये हम क्या क्या जतन नहीं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नये साल में एक ताज़ातरीन ग़ज़ल कुछ काम ज़रूरी जो हमारे निकल आए, रिश्तों में कई पेंच तुम्हारे निकल आए। हमने तो वही बात कही है जो बज़ा थी, क्यूँ आपकी आँखों से शरारे निकल आए।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जब की  खुद  हमने  बढाई है  मुसीबत अपनी, आओ खुद से ही  करी जाए  शिकायत अपनी। वक्त बदला भी  तो किस काम का  अपने यारों, बद से  बदतर  ही  हुई  जाए  है  हालत अपनी। लाख  फिर...

  • काला  धन् + धा

    काला धन् + धा

    भला हो हमारी मौजूदा सरकार का की वो हमें आये दिन ऐसे मुद्दे देती रहती है जिस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस आवश्यक है, जैसे असहिष्णुता, राष्ट्रीयता, देशद्रोह बनाम देशभक्ति, सर्जिकल स्ट्राइक, विदेशी संबंध, राजनैतिक चरित्र,...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वो  सब्ज़बाग़  दिखा  कर  के  बाग़  लूट गया, ये    रौशनी   के    बहाने   चिराग़   लूट   गया। किसी  के  जिस्म  को  लूटा  दरिंदगी  ने  यहाँ, किसी के  रूप को  वहशत का  दाग़...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    एक बहरे-तवील में पेशकश: कभी राहे-ख़म को मना लिया कभी हब्से-दम को मना लिया कभी इस कदम को मना लिया कभी उस कदम को मना लिया यूँ ग़ुज़र गयी मेरी ज़िन्दगी लिये साथ मेरे नसीब को...