कविता

जिंदगी की दहलीज

जिंदगी की दहलीज पर खड़ा होकर एक दिन उम्र ने तलाशी ली तजुर्बे की जेब से जो बरामद हुआ वह लम्हे थे कुछ ग़म के थे कुछ नम से थे कुछ टूटे हुए थे जो सही सलामत थे वह बचपन के थे । — मनोज शाह ‘मानस’

कविता

उम्मीदों की धारा

कराहा होगा फूट-फूटकर वो बिचारा । जो टूट गयी होगी उम्मीदों की धारा ।। कुछ तो रहा होगा जिंदगी से लगाव । कौन सी तनाव खुदकुशी की पड़ाव ।। सब कुछ तो रहा होगा उनके पास । फिर क्यों उठ गया जीवन से विश्वास ।। रहा होगा आन शान शौकत । रहा होगा रुतबा पैसा […]

गीत/नवगीत

सौभाग्य जयन्ती…

नहीं है नहीं…, नहीं है नहीं…! मेरा सौभाग्य जयन्ती नहीं…, मेरा सौभाग्य जयन्ती नहीं..!! पुरखोंं का सम्पति नहीं…! मैं स्वयं दम्पति नहीं…..!! फिर क्यों न बन जाऊँ सन्यासी..! लगाऊँ मन के आश्रम में समाधि !! नहीं है नहीं… 2 मेरा सौभाग्य जयन्ती नहीं..2 मेरा मन बेईमान नहीं …! ऐसे भी जीना आसान नहीं !! साथ […]

क्षणिका

ख्याल है तो ख्वाब है

नैनो को नैनों से बतियाने दो…, ख्वाबों को नींद में सो जाने दो…! नींद है तो सपने हैं…, ख्याल है तो ख्वाब है…, अर्धरात्रि की नीलिमा में…, मीठे सपने में खो जाने दो…!! — मनोज शाह ‘मानस’ 

गीतिका/ग़ज़ल

जेब से फ़कीर

जेब से फ़कीर और दिल से उदास में हूँ । मानो न मानो कई सालों से वनवास में हूँ ।। बिरह के जंगल में अमंगल के बीहड़ में.., भटक रहा हूँ साधु में…, सन्यास में हूँ …। चिता की आग में चिंता की आगोश में…, जलता हुआ बुझता हुआ शिलान्यास में हूँ। मैं जो भीतर […]

कविता

चौकीदार

आने जाने वाले होशियार । कि मैं हूँ यहाँ का चौकीदार ।।             आने जाने वाले होशियार ।             कि मैं हूँ यहाँ का चौकीदार ।। बचके रहना मेरे सरकार । कि मैं  हूँ यहाँ का चौकीदार।।              आने जाने […]

गीत/नवगीत

क्या से क्या हो गये..

क्या  से  क्या  हो  गये…, ज़िन्दगी  तेरे  चाह  में …।            गर्दिश  की  फूल  हो  गये…,            ज़िन्दगी  तेरे  राह  में  ……।। सोचा  नहीं …,समझा  नहीं  ..।  जांचा  नहीं …, परखा नहीं..।। -2 आकर  बस  गया  ये…, मज़हबी  तेरे  पनाह  में ।      पैरों  तले का […]

कविता

ये रिश्ता क्या कहलाता है…?

ये रिश्ता क्या कहलाता है…? बस…, बन्धन  है प्यार  की…, धड़कन है इश्क़ की बयार  की…। दोस्ती  भी  तो कई  जन्मों  से…, और  अमर  प्रेम  है इस  संसार  की  …।। बस…, ये  रिश्ता  यही कहलाता  है  …।। —  मनोजवम

कविता

रक्षाबंधन

हाथ में राखी ललाट पर चंदन । भाई बहन की पावन रक्षाबंधन ।। स्नेह के  धार में बह रही दुनिया  , कौन कर सकता है महिमामंडन । जेब खाली अक्सर रहता भाईयों का , बहने जब देती है दिल से अभिनंदन । हाथों में राखी की डोर अति शुभनिय , सौभाग्य भाई ललाट पर लाल […]