गीतिका/ग़ज़ल

आफताब

उस जहां में हिसाब होगा…..होने दीजिए । इस जहां में बेखौफ बेहिसाब जी लीजिए ।। यूं तो महफ़िल में लगाम कोई हिसाब नहीं, जिंदगी जश्न समझ…बेहिसाब पी लीजिए । बहुत हुआ रुख़ से नकाब हटाइए आहिस्ता, जमाने में जीना है तो..बे नकाब हो लीजिए । इंसान को हथकड़ी…बंदर के हाथ में छड़ी, वक्त ने करवट […]

गीतिका/ग़ज़ल

मेरे मन में आओ

कभी तो मेरे  आंगन में आओ । या फिर खुला दामन में आओ ।। टूटते हुए  बिखरते हुए मंजिल, धड़कते हुए धड़कन में आओ । पंख लग जाए परवानों में भी, अगर संग संग गगन में आओ । मंच मिल जाए अरमानों को भी, दिलवर दिल के मंचन में आओ । अर्पण में भी  तड़पन […]

गीतिका/ग़ज़ल

प्यार की पाठशाला

दुनिया यह दुनिया मृतक शरीर का मज़ार बस । प्यार की पाठशाला में हो जाए पल भर प्यार बस ।।  नफरतों को काटती है उल्फत की धार बस, प्यार करिए,  हर वक्त, प्यार करिए, प्यार बस । ये कहां की मुंसिफी है  ये कहां की रीत है, गुल उन्हें जो बेवफ़ा है, बावफा को ख़ार […]

कविता

अंजलि

क्यों बेजान जिंदगी क्यों बेजान है रात ! क्यों खफा जिंदगी क्यों नहीं मुलाकात !! क्यों त्याग रहे हो जिंदगी क्या अन जल ली ! बहुत खूबसूरत जिंदगी और तुम अंजलि !! खनकती चूड़ियों की शहर फिरोजाबाद ! धड़कती धड़कनों की शहर फिरोजाबाद !! मिर्जापुर शहंशाह का शहर विद्यांचल की सुंदरी! विधाओं में निपुण पूर्वांचल […]

गीत/नवगीत

जिंदगी एक जुमला

अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेना,                किसको अच्छा लगता है ! ‘आ बैल मुझे मार ‘ कह देना………,               किसको अच्छा लगता है !! अपने ही पैरों पर……..! आ बैल मुझे मार…….!! कदम संम्भल संम्भल कर चल …,       […]

कविता

लू चल रही है…

लू चल रही है लू लग रही है… शहरों में भी ख्वाहिशों में भी… पसीना से लथपथ नीम के नीचे सुस्ता रही है सपने भी अपने भी… घिसती चली जा रही है जिंदगी… लड़खड़ाती चली जा रही है परिवेश… आ भी जाओ प्रिय प्रियतम बरसात की रानी वर्षा कर जाओ शहरों में शीतल कर जाओ […]

कविता

जिंदगी कट रही है…

सुबह होती है शाम होती है दिन आता है रात जाती है धूप निकलती है फिर अस्त होती है… इस तरह ही…, हफ्ता महीना वर्ष आते हैं चले जाते हैं इस तरह ही…, दिन बीत रहा है उम्र बढ़ रही है मालूम नहीं मुझे…, जिंदगी जी रहा हूं या दिन काट रहा हूं परंतु मैं…, […]

कविता

बिछड़ने का दर्द

देश शहर है प्यारा अपने ही समाज से है प्यार । चारों धाम से सुखमय मुझको मेरा घर परिवार ।। घर परिवार का दर्द महसूस किया है । अपनों से बिछड़ने का दर्द महसूस किया है ।। मां ने गोद में बिठाकर बाल सहलाया भी नहीं सोलह सावन । पिता का उंगली पकड़कर चला भी […]

कविता

कलयुग की करामात…

प्रलय महाप्रलय की ये रात है । यह कलयुग की करामात है ।। विनाश महाविनाश की महाकाल ! छेड़ती प्रकृति की प्रवृत्ति विकराल !! महा शक्तियां अपने वर्चस्व बचाने में ! लगे है मानव सभ्य संसार मिटाने में !! मानव द्वारा बोया हुआ मानवता पर आघात है । यह कलयुग की करामात है ।। वक्त […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कुछ देना है तो डर नहीं हौसला दो । जिंदगी जीने की एक फ़लसफ़ा दो ।। इंसां के लिए  इतना गुस्सा ठीक नहीं, हारकर जो जीते इन्हें बधाई बड़ा दो । एक दिन जोश ए जुनून सफल होगा, संघर्ष विजय को  ऐसी  मशवरा  दो । मां की जीवन बीत गई बर्तन खाना में, निवाला कम […]