लघुकथा

मन की शांति

एक राजा था जिसे पेटिंग्स से बहुत प्यार था। एक बार उसने घोषणा की कि जो कोई भी उसे एक ऐसी पेंटिंग बना कर देगा जो शांति को दर्शाती हो तो वह उसे मुंह माँगा इनाम देगा। फैसले के दिन एक से बढ़ कर एक चित्रकार इनाम जीतने की लालच में अपनी-अपनी पेंटिंग्स लेकर राजा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कभी ज़िगर ए जोश हो जाते हैं लोग । कभी  जुवां खामोश हो जाते हैं लोग ।। अक्सर  अल्फाज़ ए राज़  जाने बगैर , कैफियत को  परोस से जाते हैं लोग । कभी बेहोश फिर मदहोश होकर यूं ही , अक्सर  अपनी होश खो जाते हैं लोग । अर्थहीन, संबंधहीन, संबंध, नाता, रिश्ता , यूं […]

गीतिका/ग़ज़ल

कल्पना की होली

तेरे संग मैंने खेली , मेरी कल्पना की होली । यही बात मैंने अब तक , तुम से नहीं है बोली ।। कोई रंग ना बिखेरा , ना गुलाल ही उड़ाया । सुंदर सी रूप तेरा , बस प्रेम से सजाया ।। मेरी कल्पना से निकलो , आ जाओ खेलों होली । यही बात मैंने […]

गीतिका/ग़ज़ल

प्यार के बंधन

प्यार के बंधन जीवन के बंधन सदा हो । तन मन समर्पण जीवन अर्पण सदा हो ।। नहीं   जानता   कि   तुम  मेरे  क्या  हो  , मेरे  मनमीत  हो, शायद  मेरे  सखा  हो । मिल  जाते   हैं   सारी  खुशियां  जिसमें , अनमोल  सा  शायद  तुम  वो लम्हा  हो । बंध  गए  हैं  एक  डोर  में  मन  […]

कविता

तुम ही हो

कह दो समंदर से मुझे , जरूरत नहीं लहरों की । बस एक तुम ही हो जिंदगी में , तूफान लाने के लिए ।। सवाल कुछ भी हो , जवाब तुम ही हो ! रास्ता कोई भी हो , मंजिल तुम ही हो !! दुख कितना भी हो , खुशी तुम ही हो ! अरमान […]

क्षणिका

क्षणिकाएं

#जल मैं वहां परिंदा नहीं…, जल सूखा और तालाब छोड़ दूं ! मैं वह मीन हूं …, जल सूखा और तड़पकर मर जाऊं !! #पानी पानी रे पानी तेरा रूप कई प्रकार ! तुम ही जीवन तू ही जीवन का आधार !! #नीर आंखों से जो बह गए अश्क़ बन गए …, गंगा से बह […]

गीतिका/ग़ज़ल

याद करके तुम्हें

याद करके तुम्हें   तुम्हारी तस्वीर को छुआ । वल्लाह खूबसूरत तुम्हारी तस्वीर को छुआ ।। क्या बात  क्या नूर  क्या खूमार  चेहरों पर , तेरी उम्मीद  तेरी दीद ए बेनजीर को छुआ । वो सुहाना मौसम वो दिलकश सफर सुहाना , दिल में  कैद यादों की  वो जंजीर  को छुआ । मेरे करीब आए तुम  […]

कविता

बतीस दांतो के बीच…

भारत भीतर ही है बहुत सारे ऐसे , पर्वतराज हिमालय पहाड़ श्रृंखला । नैतिकता ही है भारतीयों का , अनेकता में एकता विशेषता । हमेशा सफल रहते हैं भारतीय , जीवन की हरियाली और रास्ता । कभी खत्म ना होने वाली , खुशहाली और मंगल यात्रा । शिर कभी झुका नहीं सकते , बेशक हम […]

हाइकु/सेदोका

तांका – मूल्य…

१. काश ! नेता भी     देश विकास मूल्य     समझ जाते     लोग इस तरह     शून्यता में ना होते २. जिंदा में नहीं     प्रतिमा कोई मूल्य     आदमीयत     ‘वो कितने अच्छे थे’     मरने पे मालूम — मनोज शाह ‘मानस’