कविता

फिर मिलेंगे

लेकर इरादा किया एक वादा एक मुलाक़ात का कुछ जज़्बात का कि…, फिर मिलेंगे कभी तो मिलेंगे…! हम कहीं ढूंढते रहें वह कहीं ढूंढते रहे हमें वो नहीं मिला उन्हें हम नहीं मिले मिलता तो वो है जो ठिकाने पर हो…! फिर क्या…! जिंदगी का उसूल गया नहीं फ़िज़ूल कि…, वही याद रहेगा जो याद […]

कविता

यादें बेजान हुआ नहीं

यादें बेजान हुआ नहीं…। लेकिन आवाज़ सुना नहीं ।। सुई रुक चुका था…, लेकिन वक्त रुका नहीं । मुसाफ़िर रुक चुका था…, लेकिन सफ़र रुका नहीं । ज़िंदगी रुक चुका था…, लेकिन दुनिया रुका नहीं । सरकार रुक चुका था…, लेकिन सत्ता रुका नहीं । संबंध रुक चुका था…, लेकिन प्यार रुका नहीं । यादें […]

कविता

दो हजार इक्कीस का जाना

मेरी उम्र इक्कीस का जाना ज़िन्दगी-नादां सा लगा ! दो हजार इक्कीस का जाना एक हादसां सा लगा !! मेरी उम्र इक्कीस का जाना दास्तां सा लगा ! दो हजार इक्कीस का जाना हादसां सा लगा !! दो हजार इक्कीस का जाना हादसां सा लगा ! जैसे किसी से मिलकर बिछड़ना सा लगा !! जाते […]

गीतिका/ग़ज़ल

रेत के ख़्वाब थे

रेत के ख़्वाब थे और नदी से मिले । इस तरह से  हम आप  ही से मिले ।। यूं उम्र तो काट ली हमने तन्हाई में , आखिरी वक़्त में जिन्दगी से मिले । प्यास कोई कभी भी बुझा न सका , कितने दरिया मेरी तिश्नगी से मिले । सुफियों की दुआ तो रही है […]

गीतिका/ग़ज़ल

तेरी भी है और मेरी भी

ये प्रेम की कहानी  तेरी भी है  और मेरी भी । वो प्यार की निशानी तेरी भी है और मेरी भी ।। रात में पलकों पे आकर जो ख़्वाब सोया है , वो ख़्वाब सलोनी   तेरी भी है और मेरी भी । रूह से रूह का मिलन हुआ जिन तन्हाई में , वो शाम-ए-सुहानी तेरी […]

कविता

चलेंगे साथ-साथ…!

जब… हम चलेंगे साथ-साथ…! जब…, सूरज उगेगा मनमाने तरीके से, किसी भी दिशा में…, जब…, तारों की भी अपनी दुनिया होगी आसमां से जरा अलग ही…, जब…, नीम और पलाश हाथों में डालें हाथ बातें करते दिखेंगे सड़कों पर…, जब…, भगवान की उपस्थिति नहीं होगी सिर्फ उसके ही घरों में…, जब…, अच्छा शहरी बनते बनते […]

गीतिका/ग़ज़ल

चुपके चुपके

चुपके चुपके चुराई नज़रों से देख लिया करते हैं । पलके झुका कर हाल ए दर्द बता दिया करते हैं ।। तुमको खबर हो न हो मुझको खबर है हकीकत , अपनी खबर से तुम्हारी खबर ले लिया करते है । मेरा याद रहे ना रहे तुम्हारी यादें जरूर है जानम , ख्वाब में ही […]

कविता

जादू भी यकीन लगता था

जादू भी यकीन लगता था …, उभरती उम्र की हसीं रास्ते में ! अब हकीकत भी शक के दायरे में है, उम्र की दहलीज़ पर पड़ी गुलदस्ते में !! खुद पर यकीं रख ऐ क़ाबिल दोस्त.., क्या ढूँढ रहा है तू उस फरिश्ते में….! कहाँ होते हैं पंछीयों के पास नक्शे.., मंजिल ढूँढ ही लेते […]

गीतिका/ग़ज़ल

तेरी सूरत तेरी यादें

मानस तेरी सूरत तेरी यादें लिखता है ।  तुम कहती हो, वो गजलें लिखता है ।। वादा करके न आना कितनी होगी बेरहम, दिल बेसबरा आने की तारीखें लिखता है । तुमको यकीं हो न हो तुम बहुत खूबसूरत हो, खुदा भी खत में तुम्हारी तारिफें लिखता है  । निगाहें झुकी झुकी जुबां खामोश है […]

गीतिका/ग़ज़ल

चौराहेबाज़ी…

गांव चलो दोस्तों अमरुद अब हरे नहीं । शहरों की आपाधापी में खरे उतरे नहीं ।। रोनाकाल कोरोनाकाल फिर भी डटे रहें , सुई चुभोकर फुस्स करदे वो गुब्बारे नहीं । पत्थरबाजों की तादाद बढ़ने लगे हैं फिर , कुरेदो मत  हमें यूं  जख़्म अभी भरे नहीं । मरना जानते हैं तो मारना भी जानते […]