गीत/नवगीत

चक्रव्यूह…

मौका मिल जाए अभी भी साधु बन जाऊंगा  । प्रेमिकाओं की धोखा भजन समझ कर गाऊंगा  ।। मौका मिल जाए अभी भी… प्रेमिकाओं की धोखा भजन समझ कर गाऊंगा  ।। प्रेमिकाओं की धोखा… मौका मिल जाए अभी भी साधु बन जाऊंगा ।। हरे राम… हे राम… हरे राम…  ! बेबफाओं के रास्ते सारे बदनाम !! […]

राजनीति

भ्रष्टाचार

वास्तव में अब क्यों हम विकास एवं सामाजिक उत्थान में संसार में बहुत कुछ पिछड़ गए गए लगते हैं ।आज भ्रष्टाचार युक्त देशों में हमारे देश की गिनती होने लगी है ।जीवन मूल्यों की विखंडन की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है ।परिवारवाद टूटने लगा है । सामाजिक उत्थान पहले जैसा गतिशील अब नहीं रह गया […]

कविता

बदनसीब बचपन

मेरी मां कौन है मुझे मालूम नहीं मेरे पापा कौन है मुझे मालूम नहीं ठंड में लगाने वाला गर्म कपड़ा कैसा होता है मुझे मालूम नहीं । गर्मी होने पर.., धूप निकलने पर.., बरसात होने पर.., घर के अंदर रहने पर कैसा महसूस होता है मुझे मालूम नहीं मां बाप का प्यार दुलार कैसा होता […]

गीत/नवगीत

विरासत का हौसला

कदम दो कदम के फ़ासले ये नहीं होता फ़ासला । बुलंदियों के ऊंचाई पर रहे  विरासत का हौसला ।। अपनी हिफाजत करना है पूर्वजों का विरासत बचाना है मोहब्बत और शांति की ध्वनि फैलाना है नफरतों और षड़यंत्रों की दीवारें भी हटाना है…! काम हमें सभी करना है ये वक्त का फ़रमान है , फिर […]

कविता

घर बार बिहीन

घर बार बिहीन ये दुखी ये दीन ! घर बार बिहीन ये दुखी ये दीन !! पैरों पर खड़ा होना चाहता है । अपने पैरों पर उठना चाहता है।। यह जो है देश की मिट्टी रास्ते पत्थर कंकड़ गिट्टी ! यह जो है देश की मिट्टी रास्ते सत्य पथ की मिट्टी !! उसी को चुमना […]

कविता

जीवन_का_अंतिम_सुख

आज घर वास का तीसवां दिन है । चेहरे का रंगत मलिन है ।। घर बार विहीन …! वह मिली थी मुझे …!! जीवन की अंतिम सुख …!!! जैसे गुलाब का एक दिन …! एक डरावनी यात्रा …!! मौसमों के मकान सूने है …!!! आसमां और भी है …! हाथों से रोटी का अंतिम , […]

कविता

घर वास का तैंतीसवां दिन

आज घर वास का तैंतीसवां दिन है । तैंतीस कोटि देवी देवताओं को , समर्पण के ये दिन है ।। क्रमशः जड़, वृक्ष, प्राणी, मानव, पितर , देवी-देवता, भगवान और ईश्वर । सबसे बड़ा ईश्वर , परमात्मा या परमेश्वर ।। वेदों में जिस ब्रह्म का जिक्र है , उसका अर्थ है विस्तार, फैलना , अन्नत, […]