गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल – चाहता हूँ…

सुनो ,तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ। रंग खुशियों के सजाना चाहता हूँ। माँगी थी कभी जो दुआ तेरे लिए, आज फिर सपने सजाना चाहता हूँ । आंखों में बसी है ,वही तेरी सूरत ,  सीने में  तस्वीर छिपाना चाहता हूँ। जमाने ने दिए थे आँख में आँसू जो , भूल ज़ख्म वो मुस्कुराना चाहता हूँ। […]

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा – शेफाली (काव्य संग्रह)

कवि :-श्री रमेशचंदर सेन( विनोदी जी )। *संक्षिप्त परिचय* बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी विनोदी जी सहज ,सरल ,गंभीर प्रवृत्ति के वह कलमकार हैं जिनको अपनी माटी ,अपनी संस्कृति ,से लगाव है।जिनको प्रेम है हर रिश्ते नाते से ।जीवन के संघर्षों ने उनको हर उस चीज में पारंगत किया है जो सामने आती गयीं।कलम को थामते […]

लघुकथा

लघुकथा – मोक्ष

“हाय रे ,कित्ती शांत सुभाव ,कित्ती कमेरी थी रे ऊषिया। काहे चली गयी यों हमें छोड़ के। अब को सपेरेगो सब घर ..” उमादेवी मुँह पर धोती का पल्ला डाले कलप रही थीं। “हाँ अम्माँ भौजी हतीं तो पतो हू न चलत हतो ,सब काम कब है जात हतो ।टैम पे खायबो पीवो मिल जात […]

कविता

ऐ दिसंबर …

आये थे तुम जब लेकर हौसले, अरमान ,आशायें खुशियों के दबे ढके से सुनहले अहसास । कुछ ख्बाव ,कुछ सपने कुछ कदमों के निशान । सर्द सी सुबहों के साथ गुनगुना ,सुखद अहसास फिर शनैःशनैः हुआ बदलाव फिज़ाओं में हवाओं में ,नज़ारों में सोच में नज़रिये में । तुम भी तो बदल गये कितने रुप […]

लघुकथा

लघुकथा – अपने ही घर में

“मिसेज मधुरिता से निवेदन करूँगा कि वह अपना साहित्यिक गौरव सम्मान स्वीकारने हेतु मंच पर पधारें।और हम सबको ,यह सम्मान स्वीकार कर ,कृतार्थ करें।”मंच उद्घोषक की आवाज सुन कर मधुरिता ने हल्की सी मुस्कान होठों पर सजाते हुये सभी का हाथ जोड कर अभिवादन किया और सधे पाँव से मंच की ओर चल दी.। मंच […]

कविता

तुम कौन ?

हरीतिमा की मखमली चादर , श्वेत शफ़्फ़ाक बदन पर काले मोतियों से  सजी मेरे ख्बावों ,सपनों को समेटे … तू कौन ?? फडफडाते पन्नों पर ,सजे हर्फ दर हर्फ । ललचाते ,मुझे बुलाते ,खुश्बू में भीगे खत । लिखे कौन..?? तिलिस्म था कोई बहका बहका , कलरव बीच ज्यों चहका चहका खींचता मुझे आकर्षित कर […]