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  • हरियाली (विरह )

    गीत सावन बैरी याद पिया की दिलाये रे, लहरा हरियाली गले से लिपट जाये रे| मोरा पिया बम्बई में कमाये , होली दिवाली खाली दरस दिखावे, ऐसन कमाई के आग लग जाये रे |… लहरा हरियाली...

  • कुछ रचनाएँ

    कुछ रचनाएँ

    जीवन-एलबम ********************** जीवन की आपाधापी में, खो जाते है पल ऐसे ही, दामन को छू जाती है बस, यादों के धुधलके से आती जो, तस्वीर निकलती कब एलबम से, “मौन” सोंचते हो जब तुम| इतराते बादल...

  • जीवन का दौर —“मौन”

    जीवन का दौर —“मौन”

    कुछ लिखने को जी करता है, उन्हें अपना कहने को जी करता है, रात आती है सुलाने लगती है, कोई बात अपना दिल कचोटी है, इस बात का अहसास होता जबतक, लोग प्यार हुआ है यही...


  • प्रकृति की अव्यवस्था पर एक नज़र

    प्रकृति की अव्यवस्था पर एक नज़र

    पृथ्वी पर कोई भी जीव एकल जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है इसलिए मानव और प्रकृति की परस्पर आत्मनिर्भरता एवं सद्भावनाओं को समाप्त करने से हमारा पारिस्थितिकी तंत्र डगमगा रहा है। पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ती जनसंख्या,...


  • ईक लहरा बारिश हो गयी

    ईक लहरा बारिश हो गयी

    ईक लहरा बारिश हो गयी शहर गुलाबी हो गये । नदियों के किनारे भीग गये नदियों में बूदें तैर गयी । हवा के झोंके सर्द हुए ईंटों की गर्मी भभक गयी । सडकों पर नाली उफन...


  • सांप सूघ गये हलक सूख गये

    सांप सूघ गये हलक सूख गये

    हलक सूख गये सांप सूघ गये जीवन बगिया हरि हर गये गेहूं खडे आग झुलस गये हलक सूख गये सांप सूघ गये राह विरानी आंख निहारे आधी दुनियां खाख हो गयी सांप सूघ गये हलक सूख...

  • कातर नैन…

    कातर नैन…

    रंग बिरंगेंजीवन की स्वर्णिम आभा तेरी हो। तेरे चेहरे का नूर सदा आॅंखों को सुख देता हो। कल्पित स्वर्ण जीवन में तेरे मुकुट के जैसा हो। भीख मांगते हाथ मेरे दानी माता जैसा हो। लूट पड़े...