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  • कहानी : तृप्ति

    कहानी : तृप्ति

    कितनी गहमागहमी है हर तरफ़। हर कोई अपनी ही धुन में, किसी भी दिशा में भागता हुआ सा। स्टोव की लाल लपटों के ऊपर रखे बर्तन मे, उबलती चाय की भाप, इस सर्दी के मौसम में...

  • उत्सव

    उत्सव

    हमारे हृदय का प्रेम ही इन पाँखुरियों में बसता है मधु बनकर छलकता अंदर सुगंध बनकर महकता है… कहीं सरसों की स्वर्णिम आभा कहीं गेहूं की बालियां कहीं बौर से लदे आम्र वृक्ष तो कहीं चुनरियाँ...

  • कविता : सुनो…

    कविता : सुनो…

      ले चलना हमें कुछ देर कुछ दूर …. तुम अपने साथ आसमान की नीली चादर तले लिए हाथों में हाथ….. और थोड़े से जज़्बात…. जिनसे फिर जी उठे ये दिल की धड़कन…. और जाग उठे...

  • गीत : आशाएँ

    गीत : आशाएँ

    आज की सुबह फिर से आई है, इक नयी उम्मीद लेकर आशा की एक नयी किरण, इक नयी तस्वीर लेकर लिख दे इक नयी तहरीर इससे, अपनी तकदीर में भर दे नए रँग फिर इसमें, ग़र...

  • तुम भी तो यही कहते थे

    तुम भी तो यही कहते थे

    फिज़ाओं में आज नमी -सी है .. इन्हें भी एहसास है शायद मेरी उदासी-का जो गहरी पसरी है मेरे भीतर … ये रिमझिम बरसता पानी … जैसे मौसम भी भावुक हो रहा हो मेरे साथ इस...