कहानी

कहानी : तृप्ति

कितनी गहमागहमी है हर तरफ़। हर कोई अपनी ही धुन में, किसी भी दिशा में भागता हुआ सा। स्टोव की लाल लपटों के ऊपर रखे बर्तन मे, उबलती चाय की भाप, इस सर्दी के मौसम में दूर से भी कुछ गर्माहट दे गयी। खोमचे वाले से चाय का गिलास लेकर मैंने पर्स से २० रुपये […]

गीत/नवगीत

उत्सव

हमारे हृदय का प्रेम ही इन पाँखुरियों में बसता है मधु बनकर छलकता अंदर सुगंध बनकर महकता है… कहीं सरसों की स्वर्णिम आभा कहीं गेहूं की बालियां कहीं बौर से लदे आम्र वृक्ष तो कहीं चुनरियाँ धानियां प्रकृति की इस छटा से ही जीवन में श्रृंगार उतरता है हमारे हृदय का प्रेम ही…… गुन-गुन करते […]

कविता

कविता : सुनो…

  ले चलना हमें कुछ देर कुछ दूर …. तुम अपने साथ आसमान की नीली चादर तले लिए हाथों में हाथ….. और थोड़े से जज़्बात…. जिनसे फिर जी उठे ये दिल की धड़कन…. और जाग उठे कुछ मीठी तड़पन …. यूँ ही सुनो, तुम हमें यूँ ही कहो, कुछ तुम हमें न हो जो इस […]

गीत/नवगीत

गीत : आशाएँ

आज की सुबह फिर से आई है, इक नयी उम्मीद लेकर आशा की एक नयी किरण, इक नयी तस्वीर लेकर लिख दे इक नयी तहरीर इससे, अपनी तकदीर में भर दे नए रँग फिर इसमें, ग़र तू चाहता है …… खुद की एक नयी परिभाषा लिख अपने ही शब्दों में, अपने जज़्बातों से अपने ही […]

कविता

तुम भी तो यही कहते थे

फिज़ाओं में आज नमी -सी है .. इन्हें भी एहसास है शायद मेरी उदासी-का जो गहरी पसरी है मेरे भीतर … ये रिमझिम बरसता पानी … जैसे मौसम भी भावुक हो रहा हो मेरे साथ इस भावुकता ,इस नमी का क्या है रिश्ता मुझसे .. जब पूछा तो जवाब दिया इन हवाओं ने … जब […]