बाल कविता

रंग-बिरंगी पिचकारी

रंग-बिरंगी पिचकारी रंग-बिरंगी इक पिचकारी, मम्मी मुझे दिला दो। लाल-गुलाबी, नीली-पीली, रंगों की पुड़िया ला दो। सहेलियां मेरी लाई है, नई सजीली पिचकारी। थोड़ी पतली, थोड़ी छोटी, लगती है प्यारी-प्यारी। पिचकारी बिना अधूरा है, रंगों का यह त्यौहार। एक दूजे पर खूब करेंगे, आज रंगों की बौछार।

बाल कविता

होली पर्व मनाएं

होली पर्व मनाएं ———————– नटखट चुनमुन बोला आओ, गीत खुशी के गाएं। मस्त-मगन हम बच्चे सारे, होली पर्व मनाएं। रंग-बिरंगे रंगों सा ही, आपस में मिल जाएं। माता-पिता बड़ों का अपने, कभी ना दिल दुखाएं। गुझिया, मालपुआ, दही बड़े, खाएं और खिलाएं। मस्त-मगन हम बच्चे सारे, होली पर्व मनाएं।

बाल कविता

जंगल में सर्दी-बाल कविता

थर थर कांपे हाथी दादा, कांपे खूब बंदर। ठंडी ठंडी हवा चली है, शीत वन के अंदर।   शेर राजा दुबके मांद में, ठंड से परेशान। भालू, लोमड़ी, हिरण सबकी, आफत में है जान।   बोले ना कोयल कूं कूं कूं, कौवा करे न कांय। सर्द हवाएं आती-जाती, सभी कंपकपाए।   सांप, गीदड़, खरगोश, गैंडा, […]

शिशुगीत

चाचू की छादी

मेले चाचू की है छादी, जाऊंगा मैं तो बालाती। चाचू संग चढ़ूंगा घोड़ी, मस्ती करूंगा आज थोड़ी। ओ भाई तुम भी साथ चलो, ज़रा मेले चाचू से मिलो। बने हैं आज ये तो दूल्हा, मुखड़ा इनका है खिला-खिला।

बाल कविता

बाल कविता – छोटकू

बड़का भैया गए मेला सज-धज तैयार, संग-संग भाभी जी हैं लेगी एक हार।   छोटकू रह गया घर ही, पापा लिए नहीं साथ। रो-रो कर हाल बुरा है, हुई घर में बरसात।   दादीजी खूब समझाए दे बहुत दुलार।   छोटकू तो छोटकू है, करने लगा झमेला। ले चलो दादी मुझे, देखूंगा मैं मेला।   […]

बाल कविता

बाल कविता : मत भूलो बापू को

मत भूलो तुम उस बापू को, महात्मा गांधीजी नाम था। सत्य-अहिंसा ही धर्म उनका, देश की आजादी काम था।   गुजरात के पोरबंदर में, गांधी बापू का जन्म हुआ। धन्य हुई भारत की धरती, उस रब का हम पर करम हुआ।   बंदूक न तलवार उठाई, पर फिरंगियों को भगा दिया। देश हमारा आजाद हुआ, […]