कविता

वो अक्सर कहती है

वो अक्सर कहती है तुम बहुत बोलते हो पल में हंसते हो, पल में ख़ौलते हो वो नही जानती एक दिन उसकी आंखें यूं ही बरस जाएंगी जब तक खुली हैं आँखें जी भर के सुन लो बक बक जिस दिन बन्द हो गयी ये आंखें एक शब्द के लिए भी तरस जाएंगी वो कहती […]

कविता

विदाई

क्या हुआ जो तू परायी हो गयी क्या हुआ जो तेरी इस घर से विदाई हो गयी हम कल भी वही थे हम आज भी वहीं है कल भी इस घर की बेटी थी हमारी बहना आज भी इस घर की बेटी है क्या हुआ जो तेरी इस घर से जुदाई हो गयी मत भूलना […]

कविता

वो शाम

मुझे याद है वो शाम जब तुम पहली बार मेरे पास आई थीं आंखे नीचे किये थोड़ा मुस्कुराई थी तुम्हारी यूं शर्माती नज़रों से मेरे मन मे एक बात आई थी जो कह दी थी मैने तुम्हे और तुम कैसे सकपकाई थी चाहता तो मैं भी था थोड़ा सा और पास आऊं खींच कर अपनी […]

कविता

कल रात

कल रात तू मेरे सपने में आई थी कुछ देर मुझे देख मुस्कुराई थी मैने बहुत की थी कोशिश कि छू के देखूँ तुझको पर छू सकूं इस से पहले ही तेरी आँख भर आयी थी क्या वजह थी उन आंसुओं की ये बात न मेरी समझ आयी थी क्या वो रिश्तों की थी मर्यादा […]

कविता

वो शाम

मुझे याद है वो शाम जब तुम पहली बार मेरे पास आई थीं आंखे नीचे किये थोड़ा मुस्कुराई थी तुम्हारी यूं शर्माती नज़रों से मेरे मन मे एक बात आई थी जो कह दी थी मैने तुम्हे और तुम कैसे सकपकाई थी चाहता तो मैं भी था थोड़ा सा और पास आऊं खींच कर अपनी […]

कविता

मुझे पता है

मुझे पता है तू मुझसे मिलने के लिए अपनी किस्मत से लड़ रही होगी अपनी सखियों की आई डी से मेरी कविताओं को छिप छिप कर पढ़ रही होगी मुझे यह भी पता है तू मुझे देखने के लिए कल्पना की उड़ान भर रही होगी कोई देख न ले तुझे रोते हुए मुँह छिपाकर आंगन […]

लघुकथा

अष्टमी

अष्टमी (लघु कथा ) दिव्या पुलिस स्टेशन खड़ी थी। मेट्रो स्टेशन पर मनोज ने उसके साथ बदतमीज़ी की थी। अपने बयान में दिव्या ने बताया कि मनोज काफी देर तो उसे घूर रहा था और जब मेट्रो ट्रेन में प्रवेश हुआ तो उसके बाद जानबूझ कर अश्लील हरकतें कर रहा था। लिहाजा वहीं उसने मनोज […]

ब्लॉग/परिचर्चा

बिलखते मासूम

अक्सर देखता हूँ ए महेश, सुबह सुबह पीठ पर बोरी लटकाए हुए बच्चे 2 टूक रोटी के लिए तरसाये हुए बच्चे जिन्हें अब तक यह भी नही पता इस दुनिया मे क्यों आये वो गरीब लाचार हालात के ठुकराए हुए बच्चे… सच मे दिल को कुछ होता है देखते हुए कि ऐसे लाखों करोड़ों बच्चे […]

कविता

साया

मत कर मेरा इंतज़ार मैं तो तेरा ही साया हूँ सदा साथ हूँ तेरे महसूस करके देख एक बार जहां जहां तू होती है मैं भी वहीं आया हूँ क्योंकि मैं तो तेरा ही साया हूँ माना कि वक़्त ने दिए हैं हज़ारों गम हमे पर मैं तो तेरे लिए खुशियां ही लाया हूँ आंखों […]

कविता

सज़ा

कभी कभी सोचता हूँ कितना हँसती थी तू अब तेरी उदासी की वजह मैं तो नही चहक उठती थी जो सुबह की पहली किरण के साथ आज तेरी तन्हाईयों की वजह मैं तो नही आखिर क्या कसूर था तेरा जो मैं आया तेरी जिंदगी में खुशियों से दामन भरा रहता था जिसका आज वो गमगीन […]