भाषा-साहित्य

एक भारत भाषा सेनानी : हरपाल सिंह राणा

जनभाषा में न्याय के लिए न्यायपालिका से ही न्याय की जंग हर साल 15 अगस्त को हम स्वतंत्रता दिवस तो मनाते हैं लेकिन बिना स्वभाषा के स्व तंत्र कैसे हो सकता है और बिना स्व तंत्र के देश सही अर्थों में स्वतंत्र कैसे हो सकता है ? भारत की भाषा हिंदी, जिसे सभी स्वतंत्रता सेनानियों […]

भाषा-साहित्य

मराठी को लेकर महाराष्ट्र सरकार का सराहनीय निर्णय

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि महाराष्ट्र में तमाम दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम अनिवार्यत: मराठी भाषा में देवनागरी लिपि में ही होंगे। पहले भी इस प्रकार का आदेश था लेकिन अब इसे पूरी गंभीरता से लागू करने का निर्णय लिया गया है। निश्चय ही अपनी जनता के […]

संस्मरण

स्मृति-चलचित्र : सेवा-निवृत होते कार्मिक की अनुभूति

जो व्यक्ति सेवा निवृत्त नहीं हुआ हो, सेवा निवृत्ति से पूर्व वह शायद यह अनुभूति न कर सके। कहा जाता है कि भावनाएँ वैयक्तिक होते हुए भी सार्वभौमिक होती हैं। व्यक्तिगत भिन्नताओं के बावजूद भी काफी हद तक हम एक जैसी अनुभूतियों से गुजरते हैं। यूं तो ये अनुभूतियाँ मेरी व्यक्तिगत हैं। लेकिन अगर किसी […]

भाषा-साहित्य

हिंदी के टुकड़े-टुकड़े करने की कोशिशें और राष्ट्रहित

पिछले कुछ समय से हिंदी की बोलियों के नाम पर गठित संस्थाओं द्वारा संविधान की अष्टम अनुसूची में हिंदी की बोलियों को जोड़ने की मांग रह रह कर उठने लगती है। हिंदी का कुछ बोलियों को संविधान की अष्टम अनुसूची में स्थान मिलने के बाद तो होड़ सी लग गई है। बोलियों के स्वयंभू प्रतिनिधियों […]

भाषा-साहित्य

देवनागरी लिपि के पथ की बाधाएँ और उपाय

यह सर्वमान्य तथ्य है कि यदि हमें अपनी भाषाओं का प्रचार – प्रसार करना है तो भाषा के साथ-साथ इनकी लिपियों को बचाए रखना भी अत्यंत आवश्यक है। लेकिन पिछले कई वर्षों में यह देखने में आ रहा है कि हिंदी ही नहीं अन्य ऐसी भाषाएं जो देवनागरी में लिखी जाती हैं उन्हें भी ज्यादातर […]

समाचार

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी का आयोजन

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, वैश्विक हिंदी सम्मेलन तथा के.सी. कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में मुंबई में दिनांक 11 जनवरी को  वैश्विक हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय था: ‘हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं का समन्वय।’ संगोष्ठी के प्रारंभ में महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष शीतला प्रसाद दुबे ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत […]

विज्ञान

आधुनिक बनाम पुरातन ज्ञान-विज्ञान

जब कोई खगोलीय घटना घटती है तो विभिन्न टी.वी. चैनलों पर वैज्ञानिकों और आध्यात्मिक गुरुओं के बीच वैचारिक संघर्ष साफ दिखाई देता है। लगता है दोनों में एक – दसरे को पछाडंने की होड़ लगी है। अगर में यह कहूँ कि इस मामले में मैं अक्सर स्वयं को वैज्ञानिकों के नहीं बल्कि कथित आध्यात्मिक गुरुओं […]