कविता

नारी तेरी यही कहानी

दिल में दर्द,आंखों में पानी नारी तेरी यही कहानी तूने हस्ती अपनी मिटा दी पर दुनिया ने तेरी कदर न जानी। तेरे बिन अस्तित्व नहीं दुनिया की सम्पूर्ण तुम हो दुनिया की तेरे बिन दुनिया अधुरी तेरे बिन दुनिया नहीं पुरी। कहे कवि माखनलाल , तेरे आंचल में दूध आंखों में पानी, त्याग, सेवा और […]

कविता

मैं थकने लगा हूँ

इस जीवन की भागदौड़ में भाग भाग कर मैं थकने लगा हूँ, रातों को सोते सोते जागने लगा हूँ। बचपन में तितलियों को पकड़ना आती है याद, एक चॉकलेट के लिए करता था फरियाद। जब गुब्बारों को देख हृदय कम्पित हो जाते थे, तब नानी से चंदा मामा की कहानी सुन सो जाते थे। जब […]

कविता

कुछ पता ही नहीं चला

कैसे गुजरे ये वक्त कुछ पता ही नहीं चला, बचपन से जवानी और फिर बुढापे में जीवन ढला। बचपन में हांफते थे फिर भी मजे से साईकिल चलाते थे, फिर कब चार चक्कों मे लगे घुमने पता ही नहीं चला। था अपना शहर पेड़ो की हरियाली से भरा पूरा, कब ये कंक्रीट में बदल गया […]

कविता

ये जिंदगी

बनते बिगड़ते रिश्तों का लेखा जोखा है ये जिंदगी रोज नये रिश्ते बनते और टूटते हैं क्या यही है जिंदगी? कभी धुप में रिश्तों की छाया देती है ये जिंदगी, कभी खुशी कभी गम की बरसात देती है ये जिंदगी। क्या यही है जिंदगी? किसी पे आस किसी पे विश्वास है ये जिंदगी, कभी किसी […]

कविता

गायब होती जिंदगी

शहरों से हो रही हरियाली गायब जिंदगी से खुशहाली है गायब ईयरफोन बन गया है कानों का गहना जिससे कानों की बाली है गायब। त्योहारों से हो रही खुशहाली गायब ईद, होली और दिवाली की खुशियाँ गायब उतर रहा है आंखों से पानी सबके चेहरे की लाली गायब। अफवाहों का बाजार है जिंदा चेहरे की […]

कविता

सुशांत तेरी याद में

सपने संजोये हम बालीवुड में आते हैं , दर – दर के ठोकरे खाते – खाते कोई मुकाम हम पाते हैं। अपनी मेहनत का लोहा हम मनवाते है , फिर एक दिन हम शिकारियों के शिकार हो जाते हैं । बड़ा दर्द होता है हमें इन नेपोटिज्म की गोलियों से, हम तेरे हिस्से का तो […]

कविता

बढ़ती उम्र, या घटती जिंदगी

जब मैं छोटा बच्चा था बड़े होने की तमन्ना था बड़ा हुआ तो जवानी आई दूर खड़ा बुढ़ापे ने अपनी हाथ बढाई। मैं डर के भागना चाहा बचपन में डरने लगा उम्र के पचपन से जवान होने का सपना धोखा था बचपन में ही रहना एक सर्वणिम मौका था। जवानी ने मेरे बचपन को बोला […]

कविता

कहाँ जा रहें हैं हम

क्या कहूँ कैसे कट रही है जिंदगी इस उजड़े चमन को लिए हुए, चेहरे से उड़ रही है हवाईयाॅ दिल में गमों का क्रंदन लिये हुए। ऐ मेरे देशवासियों ठंडा करो इस नफरत के शोलो को, वर्ना जी न सकेगी भारतमाता इस शोलो के तपन लिए हुए । अब तितलियाॅ भी न जाती हैं उजड़े […]

कविता

बदलते रिश्ते

कहते हैं अपने पर अपनापन नहीं , कहते हैं भाई पर भाईचारा नहीं । रिश्ते, रिश्तों का सगा नहीं, कोई नहीं जो एक दूसरे को ठगा नहीं। दुनिया भर गई है, स्वार्थ से, किसी को किसी से प्यार नहीं। खून के रिश्ते भी पड़ गये है फीके, क्या करेंगे लोग अब इस दुनिया में जीके। […]

कविता

जिंदगी और मौत

ये जिंदगी चंद लम्हो की है यारो, आएगी मौत तो हाथ रहेगी खाली फिर काहे को हाय तौबा है यारो, काफी है जीने के लिए दाल रोटी की थाली। जिंदगी एक गुलामी है उम्र भर के लिए, मौत आजादी है हमेशा के लिए तू डर ना मौत से ऐ मेरी जिंदगी, मौत को ही बना […]