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  • नव निर्माण 

    नव निर्माण 

    आसमान पर ड़ाला ड़ेरा गाँव-शहर सबको आ घेरा बड़ी दूर से चलकर आये जाने कहाँ-कहाँ से आये तरह-तरह के रुप बनाकर बरसाते हैं मस्त फुहार आ गये बादल लेके उपहार समीर गा रही मीठी मल्हार सौंधी-सौंधी...

  • इंतजार 

    इंतजार 

    पल-पल किया इंतजार सदियों से बीते क्षण-क्षण कर-कर इंतजार पतझड़ भी बीत गया | आ गया सावन मन भावन तुम मिलो प्रिये… इस तरह टूटे न मिलन का सिलसिला | तेरे इंतजार में, बर्बाद हुआ योवन...

  • हमसफ़र

    हमसफ़र

    वे कल तक थे हमसफ़र आज जुदा- जुदा हो गये सुहानी सुबह, हंसी शाम अब सब अनमने हो गये रोज मिलते, साथ चलते रुठे – रुठे सनम हो गये दोष बस इतना सा हमारा वादा किया,...

  • लघुकथा – हाय

    लघुकथा – हाय

    मोबाइल फोन पर हरेलाल गिड़गिडाये जा रहे थे | उनकी आँखों में आये आँसू और मुरझाये चेहरे, सूखे होठों से साफ पता चल रहा था कि हरेलाल पर दिन दहाडे बिजली गिरी है | चौका (गांव...



  • भूल स्वीकार कर

    भूल स्वीकार कर

    मकरन्द पान करते भ्रमर इठलाती-मँडराती तितलियाँ कुहू-कुहू की टेर लगाती कोयलिया प्रेम आलिंगन करती गौरैया अब ये सब कहाँ चले गए… सूने-सूने हो गये गाँव मिलती नहीं बरगद वाली छाँव चुप हो गया पक्षियों का कलरव...

  • नदी 

    नदी 

    कल-कल करती बहती नदी जंगल और पहाड़ों से निकलती नदी इठलाती, बलखाती नागिन रूप बनाती नित-नित सबकी प्यास बुझाती बरसातों में रूद्ररूप बनालेती तब बड़ी डरावनी हो जाती घर्र – घर्र करके सबकुछ बहा ले जाती...