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  • सैनिक की पाती

    सैनिक की पाती

    दिन-ब-दिन बढ़ती जाती कश्मीर समस्या, अब इसको सुलझाने दो सेना को आगे बढ़ने दो खूब खा लिये पत्थर उनसे, अब सबक सिखाने दो दुश्मन पर कहर ढहाने दो शांतिवार्ता होती रही विफल हमेशा, अब लातों के...

  • कलम

    कलम

    जब विचार कविता का आकार लेने लगते हैं, तब कलम होकर पैनी, तलवार बनने लगती है बगैर एक बूंद रक्त बहाये, अपना काम करने लगती है जब जुल्म – सितम की आँधियां कहर ढाने लगती हैं,...


  • आँखें

    आँखें

    सच और झूंठ बताती आँखें | शर्म – हया दिखाती आँखें || मर जाये आँख का पानी, कठोर हृदय की पहचान कराती आँखें || प्यार – मुहब्बत की पहली सीढ़ी, शुरूआत कराती आँखें || घड़ियाली आंसुओं...




  • लघुकथा – लोभ

    लघुकथा – लोभ

    बाजार पूरी तरह से सजा था, सारी दुकानें खचाखच भरी थीं | भीड़ भाड भी बहुत थी, भीड़ को काबू में करने व बाजार में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए तमाम पुलिसबल को सरकार ने...