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  • भूल स्वीकार कर

    भूल स्वीकार कर

    मकरन्द पान करते भ्रमर इठलाती-मँडराती तितलियाँ कुहू-कुहू की टेर लगाती कोयलिया प्रेम आलिंगन करती गौरैया अब ये सब कहाँ चले गए… सूने-सूने हो गये गाँव मिलती नहीं बरगद वाली छाँव चुप हो गया पक्षियों का कलरव...

  • नदी 

    नदी 

    कल-कल करती बहती नदी जंगल और पहाड़ों से निकलती नदी इठलाती, बलखाती नागिन रूप बनाती नित-नित सबकी प्यास बुझाती बरसातों में रूद्ररूप बनालेती तब बड़ी डरावनी हो जाती घर्र – घर्र करके सबकुछ बहा ले जाती...



  • अरमानों का खून

    अरमानों का खून

    सच पूछो तो भगत सिंह तेरे अरमानों का खून हुआ है तेरे बलिदान को अनदेखा किया है तेरे खून के कतरा-कतरा को नीलाम किया है | आजाद हिंदुस्तान के नेताजी ने आजादी को खूब भुनाया स्विस...

  • घाटी नर्क बनाकर

    घाटी नर्क बनाकर

    घाटी नर्क बनाकर दिल्ली बैठी पहन चूडियाँ किन्नर रोना रोती है | सिंहों के जिस्म कुत्ते नोच-नोच खाते शौर्य-वीरता के सम्मुख दीवार बना कानून राजनीति बंदूकों के मुख ताले लगवाती है | देखो कैसे स्वार्थवश दिल्ली...

  • कोमल बेटियाँ

    कोमल बेटियाँ

    फूलों सी, कलियों सी कोमल बेटियाँ, माँ का प्यार, पिता की इज्ज़त बेटियाँ कुल की शान, अभिमान की पगड़ी बेटियाँ, घर-परिवार की आन, मान, शान,जान बेटियाँ सीता, सावित्री, दुर्गा सी होती वीरांगना बेटियाँ, आज जीत कर...