गीतिका/ग़ज़ल

गॉंव

शहरों सा झुलस रहा है अब गॉंव पीपल रहा न चौक में, मिट गई ठंडी छांव जल-जंगल सभी हो गये यहॉं लापता कंक्रीट के जंगलों ने पसारा चहुंओर पांव शहरों सा झुलस रहा है अब गॉंव ताल-तलैया, नदी-पोखर, कुए सब सूखे मानव बनकर दानव खेल रहा स्वार्थ के दॉंव शहरों सा झुलस रहा है अब […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आस्था का प्रमुख केंद्र : कालिका आश्रम

जनपद आगरा की तहसील फतेहाबाद के गांव – रिहावली में यमुना नदी के तट पर स्थित मॉं कालिका मंदिर (आश्रम) आस्था का प्रमुख केंद्र है । प्राचीन समय से यहॉं  श्रद्धालुओं की आस्था रही है और आज भी जस की तस बनी हुई है । काफी समय तक मंदिर का निर्माण अधूरा रहा, इसका प्रमुख […]

मुक्तक/दोहा

हे छत्रपति

हे छत्रपति शिवाजी महाराज ! तुम थे भारत मां के सच्चे सपूत, तुम थे यूग- निर्माता, हिंदुत्व की शान, तुम थे शांतिदूत । गंगा – यमुनी संस्कृति के अग्रदूत, संस्कारों के वट – वृक्ष, तुम थे धर्म के रक्षक, हे छत्रपति शिवाजी महाराज ! प्रभु के अवधूत ।। — मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

लघुकथा

फिर मिलते हैं

कई वर्षों के बाद वह ऑफिस के काम से आगरा आया हुआ था । काम तो एक दिन पहले ही निपट गया, पर वह अपने कॉलेज वाले दोस्तों से एक मुलाकात करना चाह रहा था । वैसे फेसबुक पर दोस्तों के क्रियाकलाप देखता रहता था और कभी-कभी ऑनलाइन मिलने पर उनसे मैसेंजर में चैट भी […]

कविता

बसंत

खग करते कलरव मनभावन, मौसम ऋतु बसंत का आया पावन । बौर लदे झरवेरी और आम की डाली-डाली, खेतों में फैली दूर तलक मखमल सी हरियाली । बागों में महक रहे चंपा, चमेली, गेंदा, गुलाब, नीला-नीला आसमान हो रहा खुली किताब । पीली-पीली सरसों फूली, योवनता चहुंओर, ज्ञान की ज्योति जगाओ रे साथी, हो गई […]

कविता

मर-मरकर जीना होगा

मर-मरकर जीना होगा जीने की खातिर हलाहल पीना होगा अपने-पराये, दोस्त-दुश्मन सबसे मिलना होगा हँसना होगा, रोना होगा मर-मरकर जीना होगा | तिल-तिल जलना होगा सूरज सा तपना होगा घोर निराशा में भी चलना होगा तिनका – तिनका चुनकर नीड़ निर्माण करना होगा | चिंता चिता से बड़ी – चिंता से बाहर निकलना होगा भूखा-नंगा […]

कविता

बलिदान

श्रद्धा से हर मस्तक झुक जाये  वीरों का बलिदान अमर हो जाये  मां भारती के पावन चरणों में,  कितने भगत,  कितने आजाद,  कितनी सुभाष,  कितनी अशफाक, कितने बिस्मिल बलिदान हुए | आओ साथी प्रण कर लेवें मातृभूमि हित शीश सदा निज हथेली रख लेवें राजनीति के दलदल से निकल तिरंगा की आन, मान, शान पर […]

बाल कहानी

बाल लघुकथा – मयंक का बदलाव

  अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक आ चुकी थी, परंतु मयंक अपनी पढ़ाई को छोड़ मोबाइल व लैपटॉप पर गेम खेलने में मस्त था | गेम खेलने से समय बचता तो उसे टेलीविजन पर कार्टून, सीरियल देखने में निकाल देता | देर रात तक इलेक्ट्रिक दुनिया में खोया रहकर सुबह देर से जागता, इसलिए कभी ठीक से […]

मुक्तक/दोहा

तीन मुक्तक 

दिन आया अति पावन पवित्र मकर संक्रांति की खुशियां फैलीं सर्वत्र उड़ेगीं आकाश में नीली -पीली पतंग सब जन मिलकर पढ़ो मानवता का मंत्र  नहाओ भोर-भोर, कमाओ पुण्य-धर्म करो गंगा, यमुना, कावेरी से पावन कर्म खाकर तिल – लड्डू ,मूँगफली – गजक सब जन समझो त्योहारों का मर्म दान-धर्म कर जीवन सफल बनाओ चलो – […]

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा – संग्रहणीय स्मारिका : युवा धड़कन 2020                                  

वीर एकलव्य सेवा समिति आगरा के सौजन्य से प्रकाशित स्मारिका युवा धड़कन  2020 पढने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । इस स्मारिका के मुख्य संपादक हैं चर्चित साहित्यकार मुकेश कुमार ॠषि वर्मा जी और संपादक हैं अवधेश कुमार निषाद जी।सह संपादक हैं उमेश पाल जी।यह स्मारिका इसलिए भी खास है कि यह प्रवेशांक होते हुए भी […]