समाचार

नव विमर्श : इक्कीसवीं सदी विषय पर (अंतर्राष्ट्रीय बहु विषयक) वेबिनार सम्पन्न

भिवानी | भिवानी न्यूज, भिवानी (हरियाणा) व बृजलोक साहित्य, कला, संस्कृति अकादमी आगरा (उ. प्र.) के संयुक्त तत्वावधान में नव विमर्श : इक्कीसवीं सदी विषय पर अंतरराष्ट्रीय बहु विषयक वेबिनार में देश-विदेश के विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किये। टांटिया विश्वविद्यालय श्रीगंगानगर के परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजेन्द्र गोदारा ने जीवन में शिक्षा के महत्व को […]

कविता

जीवन

तृष्णा और छल-छदम् मिटाओ | प्रेमभाव अपने हृदय में जगाओ || शुष्क मन को पुष्प सा खिलाओ | राग द्वेष से सब द्वन्द भगाओ || छोटी हो या बड़ी बाधा से मत घबराओ | भर साहस हर बाधा से तुम लड़ जाओ || सदाचार अपनाकर नित आगे बढ़ते जाओ | नफरत की इस दुनिया में […]

कविता

रिश्तों की कीमत

भौतिकता हो गई है हावी रिश्तों की मर्यादा पर हर रिश्ता सिकुड़ गया और जलकर राख हुआ स्वार्थ की भट्टी में… रिश्तों की कीमत दौलत की तराजू पर आकी जाने लगी है चेहरा देखकर आदमी की औकात बताई जाने लगी है | पद-पहुँच के हिसाब से सम्मान के रंग में निखार आने लगा है ऐ […]

लघुकथा

लघुकथा – झूठे रिश्ते

देर शाम तक मौसम रौद्ररुप दिखाता रहा। ओलों भरी बरसात ने मई के महीने को जनवरी जैसा ठण्डा बना दिया था। मौसम के इस बदलाव को रामेश्वर सहन नहीं कर पाये। रात बारह-एक बजे के बीच उनकी तबियत एकदम से बिगड़ गई। सर्दी-जुकाम ने उनके गले को बंद कर दिया। उन्हें घुटन सी महसूस हुई […]

कविता

मृदुल कूक

तुम कूक उठी मृदुल-मृदुल ये गान तुम्हारा अमर रहे | प्रेमीजन सुन कूक तुम्हारी मगन रहे || तुम काली-काली रुप न देखा जग स्वर उतर जाये उर | जैसे प्रेमी की हूक अमर || स्वच्छ गगन तले घने पातों के बीच छिपे कंठ तुम्हारा अमृत बर्षाये | गा-गाकर अमर गान स्वयं ही हर्षाये || कोकिल […]

कविता

तन

मत कर तन का घमंड ये तन तो नश्वर है हंसखेल कर पूरी करले जीवन यात्रा इस तन को एक दिन मिट्टी में मिल जाना है | मत भटक दर-दर मिलना और बिछुड़ना सृष्टि का यही नियम है | आत्मा सुखमय तो सारा जग सुखमय सुख-दु:ख दिन रात का खेल सुख बाहर नहीं, छिपा बैठा […]

कविता

कौन

किसी के दर्द में अब आँसू बहाता है कौन… अगर कोई गिर जाये तो उठाता है कौन? थिरकते पैरों में बांध देते हैं घुंघरू अब जिम्मेदारियां उठाता है कौन? माँ – बाप हुए बूढ़े – कभी छोटे के यहाँ तो कभी बड़े के यहाँ… उनके दर्द को समझता है कौन? खामोश लबों पर उदासियाँ हजार […]

मुक्तक/दोहा

दो मुक्तक

राष्ट्रहित जो बहा था खून उसको नमन है, जलियाँ वाले बाग के शहीदों को कोटि-कोटि नमन है | अंग्रेजों की गोलियां खाकर हुए कुर्बान उन शहीदों के लिए – आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में तपन है || गोलियों की तड़तड़ाहट में इंकलाब के गूँजे नारे, डायर के अत्याचारों से माँ भारती के लाल […]

कविता

पिता

पिता परिवार की प्राणवायु है पिता परिवार के प्रत्येक सदस्य की आयु है पिता से मिले परिवार को शक्ति -संबल है पिता बड़े-बड़े संकटों में बनते ढाल है पिता का प्रेम सदा अदृश्य ही रहता है पिता हंसते-हंसते कड़वा जहर पीता है पिता बहाकर निज खून-पसीना पिता लाता है परिवार कि लिए दो जून का […]

स्वास्थ्य

कोरोना त्रासदी

चीन में जन्मा कोरोना मांसाहार व अभक्ष्य आहार की देन है | आज कोरोना ने पूरे विश्व पर खतरा पैदा कर दिया है |  विश्वभर के डॉक्टर, वैज्ञानिक कोरोना वायरस को लेकर चिंतित हैं | सारा विश्व कोरोना के आतंक की तबाही की जद में आ चुका है | धीरे-धीरे कोरोना एक महामारी का रूप […]