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  • मेरी सफलता

    मेरी सफलता

    हाँ आज मैं निराश हूँ हताश हूँ… उदास हूँ… लोगों की हंसी का पात्र हूँ क्योंकि मैं बेरोजगार हूँ ! मेरी असफलताओं का रोज-रोज मजाक बनता है अपने-परायों से खाता हूँ तरह-तरह के ताने… उलाहने… मेरी...





  • काल – चक्र

    काल – चक्र

    अपनी बढ़ती स्वार्थवृत्ति पर लगा अंकुश निश्चित ही तेरा निज तन-मन होगा खुश संचित – संपत्ति रख सदा पावन – पवित्र महाकाल  की  दृष्टि  यहाँ – वहाँ सर्वत्र झूूंठ-कपट-छल कब तक साथ निभायेगा एक -न- एक...

  • अकड़

    अकड़

    अकड़ आदमी-आदमी में भरी है किसी में धन की तो किसी में बल की / किसी में सुन्दरता की / किसी में ज्ञान की / किसी में पद की / किसी में तन की… लेकिन सच...