लघुकथा

लघुकथा : सीधी-सच्ची बात

काँइं – काँइं करती हुई लँगड़ी कुतिया अपना टूटा पैर खींचती हुई बाहर चली गई | काकी ने बड़ी जोर से बेचारी कुतिया की पीठ पर डडोका (लट्ठ) जो मारा था | काकी की ये हरकत आर्यन को कतई अच्छी नहीं लगी | वो रुआँसा सा होकर काकी से बोला – ‘काकी तुम बुरी हो, […]

बाल कविता

हम बच्चे मिलकर 

कूड़ा करकट यहाँ-वहाँ मत फैलाओ कूड़ेदान में ही कूड़ा डाल के आओ आओ-आओ प्यारे-प्यारे बच्चों आओ एकसाथ मिलकर भारत स्वच्छ बनाओ स्कूल हो या घर, सड़क हो या मैदान सर्वत्र चलायें स्वच्छता अभियान स्वच्छ रहे परिवेश हमारा करलो ये प्रण निश्चय ही बलवान बने अपना तन-मन बापू ने स्वच्छता की अलख जगाई थी मोदीजी ने […]

कविता

आत्महत्या

तुम्हारे जाने से किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा माह दो माह का रोना – धोना होगा ज्यादा से ज्यादा, बस…! सूरज वैसे ही निकलेगा, चंदा वैसे ही चमकेगा, तारे वैसे ही टिमटिमायेंगे जैसे तुम्हारे जीते जी क्रियाशील हैं | सच बताऊं – ये सारा ब्रह्माण्ड दु:खी है अकेले तुम ही नहीं… तुम वो बनो […]

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा – संवेदनशील कृति : काव्य दीप

युवा कवि मुकेश कुमार ऋषि वर्मा कृत काव्य-संग्रह “काव्य दीप” 31 कविताओं का संग्रह है। जिनका प्रकाशन रवीना प्रकाशन दिल्ली से 2018 में हुआ है। इस पुस्तक में शामिल “बेघर” शीर्षक कविता देखिए – “जब तेरा घर और मेरा घर बना हो काँच का तो आपस में पथराव नहीं करना चाहिए अन्यथा – तू भी […]

संस्मरण

आत्मकथ्य : कैसा रहा साल – 2019 मेरे लिए 

निरन्तर चलना ही जिंदगी है, फिर चाहे जाड़ा हो, गर्मी हो, बरसात हो बस चलना ही है और मैं निरन्तर चल रहा हूँ | परन्तु चलने के बाद भी ऐसा लग रहा है कि जिंदगी ठहर सी गई है | न जाने क्यों लगता है कि अब बाकी कुछ करने को बचा ही नहीं | […]

कविता

आदमी स्मार्ट हो गया है

वो लोग और उनका अपनापन अब नहीं रहा पहले गाँव, गाँव था अब गाँव कम, मिनी शहर बन गया है | इसीलिए तो – वो पहले वाले लोग नहीं रहे खाकर शहर की हवा मर गया उनके अन्दर से अपनापन वो उल्लास तीज त्यौहारों वाला कब का दफन हो गया अब तो बस डी. जे. […]

कविता

मेरे शब्द 

जंग अपनों से अपने आप ही हारी है मैंने, घर टूटने का दर्द, घर टूटने से पहले महसूस किया है मैंने | मेरी ये शोहरतें खरीदी नहीं, श्रम से कमाई हैं – मौत की दस्तकें बड़े नजदीक से देखी हैं मैंने || मेरा प्यारा भारत करता है हाहाकार, बेटियों पर अब बंद करो अत्याचार | […]

बाल कविता

प्यारी-प्यारी चिड़िया

नन्हीं सी प्यारी-प्यारी चिड़िया इतनी भारी सर्दी में बैठी मेरी छत की मुंडेर पर गुटुर-गुटुर… चीं-चीं, चूं-चूं करती है | दाना चुगती पर पानी नहीं पीती है ! हाल-चाल पूंछू उसको इससे पहले फुर्र गगन में उड़ जाती है | कोई परवाह नहीं उसको सर्दी की क्या उसको जाड़ा नहीं सताता बैठ घोंसले में आराम […]

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक परिचय : देहाती काव्याभिनन्दन

“ देहाती काव्याभिनन्दन ” लघुकाव्य पुस्तिका है, जिसकी रचनाएं सीधे हृदयतल तक कम्पन करा दें | करीब सत्रह (17) रचनाकारों ने युवाकवि अतुल मल्लिक अनजान के संपादन में वरिष्ठ साहित्यकार श्री विश्वनाथ दास देहाती के सम्मान में कलम चलाई है | बहुत ही सुंदर तरीके से अत्याधिक मेहनत से अनजान जी ने यह काव्य गुलदस्ता […]

कविता

यादें!

कभी हँसाती कभी रूलाती यादें! कभी सताती खट्टे-मीठे दिन याद दिलाती यादें! गुजरे दिन दु:ख या मौज में पल-पल की फिल्म दिखाती यादें! खुशी हो या हो गम आँसू बनकर छलक जाती यादें! ये नटखट बड़ी सताती तरह-तरह के रूप दिखाती यादें! कभी बचपन तो कभी पचपन की सैर कराती यादें! जिंदगी के साथ-साथ चलती […]