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  • प्रेरणा बन चली आना

    प्रेरणा बन चली आना

    कहीं खोया है उत्साह मेरा कहीं खोई है मन की आशा। उमड़-घुमड़ कर चली आई है बादल बनकर ढेर निराशा। कविताएं भी शुष्क हुई हैं निष्प्राण सा हुआ हूं मैं। चाहतें भी हो रहीं हैं गुम...

  • ए जिंदगी

    ए जिंदगी

    शिकायतें तो बहुत हैं तुझसे ए जिंदगी पर फिर भी तू अजीज है। तेरे बिना हूं क्या मैं शायद कुछ भी नहीं या फिर एक सड़ी हुई सी लाश जो मुशीबतों का पुलिंदा है। पर तू...

  • पथभ्रष्ट होती भाजपा….

    पथभ्रष्ट होती भाजपा….

    देश की जनता को मुंगेरीलाल के हसीन सपनें दिखाकर सत्ता में आई भाजपा अब निरंकुश सत्ता पाने की लालसा में कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। आज हालात ऐसे हो चलें हैं कि देशभर में...

  • खुदा बनके आ

    खुदा बनके आ

    खुदा बनके आ गॉड बनके तू आ आके प्रभु तू दरस दिखा। कहां है तू विधाता मेरे मन से मेरे सारे पर्दे हटा खुदा बनके आ गॉड बनके तू आ आके हृदय में समा जा आजा...


  • आओ अबकी होली में

    आओ अबकी होली में

    रंगों की रंगोली में साथ सभी के टोली में। प्यार का रंग बरसातें हैं प्रिये आओ अबकी होली में। फागुन का खूब चढ़े खुमार रस घोल दो ऐसी बोली में। गिले-शिकवे भूल मिल जाएं गले मीत...

  • दंगा

    दंगा

    भाषणों का जहर घुला था मनभावन एक शहर जला था। हो रही थी अनर्गल बातें जय जयकारों का शोर मचा था। फिर शब्दों के बाण छूटे और द्वेश की एक लहर उठी। जैसे शांत खड़ी उस...


  • पिता के अरमान

    पिता के अरमान

    कमाता रहा वह जीवन भर एक पल में लूटाने को। सपनें तक बेच आया वह बेटी की डोली सजाने को। नींदें बेचकर लाया वो अलंकारों का भंडार जो। सज रहा था आज घर-आंगन एक परी का...