लघुकथा

लघुकथा : मेहरबानी

बस की खचाखच भीड़ में कई जगह उड़ती हुई नजर डालने के बाद मेरी नजर एक सीट पर टिक गई, जिस पर तीन दुबले-पतले, सींकिया से बदन  के युवक बैठे थे। शायद वहाँ सम्भावना बने, यह सोचकर किसी तरह जगह बनाते हुए वहाँ पहुँचा और उनमें से एक युवक को अपनी आवाज में अतिरिक्त मधुरता घोलते हुए […]

लघुकथा

लघुकथा – बीपीएल

“नमस्कार ।” अचानक घर आये सूटबूटधारी युवक ने उन्हें अभिवादन किया । “जी, नमस्कार ।आइए बैठिए ।”उनका पहले से ही फूला हुआ सीना कुछ और फूल गया, वे इस योग्य हैं ही कि लोग उन्हें अभिवादन करें , उनकी तारीफ में गिर-गिर जायें । “और क्या हाल है सर ?”युवक ने बेहद विनम्रता से कहा । “बस, […]

लघुकथा

लघुकथा – नींद

“विवेक, तेरा ही ठीक है यार ! यूँ लगता है,जैसे किसी शहजादे की जिन्दगी जी रहा है तू ! इतनी ढेरसारी पाकेटमनी तुझे कैसे देते हैं तेरे पापा ! मेरे पापा तो यार दस रुपये भी देते हैं तो बाकायदा उसका हिसाब-किताब लेते हैं। भला हैं क्या तेरे पापा? ” गिरीश ने पूछा। विवेक अकड़ता […]

लघुकथा

लघुकथा : शरीफ

पूजा आफिस में घुसते-घुसते गेट के बाहर ही ठिठक गई। भीतर उसी की बातें हो रही थीं। ” यार, यह जो पूजा है न ! जरा सा लिफ्ट नहीं देती। हम क्या इतने बुरे हैं। इसने खुद को समझ क्या रखा है !” यह महेश की आवाज थी। ” हाँ यार, बस वह दनदनाते हुए […]