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  • इंतज़ार

    इंतज़ार

              मेरी रूह ———– कुछ लम्हो मे सिमट… वक्त के साथ चलते रहे.. किस्मत आने की हसरत.. अपने धुन मे बढ़ते रहे… अपनो का साथ लेकर… बात दिल से सुनते रहे.. मिल...

  • ग़ज़ल : मेरी रूह

    ग़ज़ल : मेरी रूह

    तेरा मिलना कितना सुहाना लगता है मुझसे रिश्ता सदियों पुराना लगता है… देखा जब से तेरे आँखों में सनम दिल इश्क़ में दीवाना लगता है…  फ़िज़ा में फूल बिखरे चाहत के मौसम-ए-बहार मस्ताना लगता है.. दरम्यां...


  • तेरे रूह की पैरहन

    तेरे रूह की पैरहन

    मेरी रूह तेरे रूह की पैरहन में लिपटे खामोश फ़िज़ा में कुछ इस तरह सिमटे दिल की ख़िलाफ़त एक-एक लम्हें की अदायगी तेरे यादों की सिलवटें मुझमें मुझी को करें जुदा धड़कनों की आहटें साँसों की...

  • कहानी : मोह के धागे

    कहानी : मोह के धागे

    एक अजीब सा अहसास लिए जीती हूँ, ज़िंदगी में दिल और दिमाग की भूमिका में कुछ उलझे-सुलझे रिश्तो के धागे में लिपटी हूँ…!! नंदी की कुछ यादें आज भी साथ है , जो वक़्त से गुजर...

  • गुलाब

    गुलाब

    इश्क़ की कहानी यादों की निशानी किताबों में बंद महका था गुलाब मुरझाया सा अब फिर भी अहसास में भिगोया, आस बन ज़ीस्त में लिपटी इश्क़ की फरियाद आंखो में धुंधली तस्वीर तुम्हारी फीकी सी मुस्कान...

  • ग़ज़ल : मेरी रूह

    ग़ज़ल : मेरी रूह

    मोहब्बत क्यों बुला रही शाम ढल आज़मा रही रात का चाँद हमनवां बादलो में छुपा रही ख्वाहिशों से कहे शमां फासले तो सज़ा रही सर्द आहें कज़ा बनी चांदनी यूँ खफ़ा रही ज़िक्र तेरा वफ़ा कहाँ...

  • कविता : दरमियां

    कविता : दरमियां

    दो टूक की खामोशी सिमटी साज़िशों में उलझ गये… कुछ तो था……. तेरे-मेरे दरमियां… वक़्त के मंज़र पल के अहसास बादलों में उड़ गये.. कुछ तो था…… फैसला …..तेरे-मेरे दरमियां शाम की फ़िज़ा संदल सी हवा...