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  • ऐ- मेरी ज़िंदगी!

    ऐ- मेरी ज़िंदगी!

    तुझे बहुत आहिस्ता से लिखना ऐ- मेरी ज़िंदगी कि हर वक़्त तो बस मुस्कुराते मिली कुछ आहिस्ता हम जी रहे कभी तुम बहा के ले चली, जिधर भी मोड़े चलते गये वक़्त से मिल फूल बरसे...

  • बस मेरा  इश्क़ ख़ास..!!

    बस मेरा इश्क़ ख़ास..!!

    कब हासिल छीन के ए- सुनो, तुम्हें इश्क़ देखती रही बस तुम रूह उकेरते रहे… बातों की साज़ में हम-तुम बिछड़ते रहे.. फिर कब किया ज़बरन तुमसे यही सोच में उलझती खुद से पहले भी जली...

  • बस तुम चले आना

    रात गहरी औ आसमां में छायें सितारे ख्वाहिशों की तरह…. बस तुम चले आना.. ख़यालों में औ चांद कर जायें इशारे दुआ की तरह…. बस तुम चले आना सूनी फिज़ा औ मदहोश हवायें पुकारे धड़कनों की...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

              मेरी रूह ———– कुछ लम्हो मे सिमट… वक्त के साथ चलते रहे.. किस्मत आने की हसरत.. अपने धुन मे बढ़ते रहे… अपनो का साथ लेकर… बात दिल से सुनते रहे.. मिल...

  • ग़ज़ल : मेरी रूह

    ग़ज़ल : मेरी रूह

    तेरा मिलना कितना सुहाना लगता है मुझसे रिश्ता सदियों पुराना लगता है… देखा जब से तेरे आँखों में सनम दिल इश्क़ में दीवाना लगता है…  फ़िज़ा में फूल बिखरे चाहत के मौसम-ए-बहार मस्ताना लगता है.. दरम्यां...


  • तेरे रूह की पैरहन

    तेरे रूह की पैरहन

    मेरी रूह तेरे रूह की पैरहन में लिपटे खामोश फ़िज़ा में कुछ इस तरह सिमटे दिल की ख़िलाफ़त एक-एक लम्हें की अदायगी तेरे यादों की सिलवटें मुझमें मुझी को करें जुदा धड़कनों की आहटें साँसों की...

  • कहानी : मोह के धागे

    कहानी : मोह के धागे

    एक अजीब सा अहसास लिए जीती हूँ, ज़िंदगी में दिल और दिमाग की भूमिका में कुछ उलझे-सुलझे रिश्तो के धागे में लिपटी हूँ…!! नंदी की कुछ यादें आज भी साथ है , जो वक़्त से गुजर...

  • गुलाब

    गुलाब

    इश्क़ की कहानी यादों की निशानी किताबों में बंद महका था गुलाब मुरझाया सा अब फिर भी अहसास में भिगोया, आस बन ज़ीस्त में लिपटी इश्क़ की फरियाद आंखो में धुंधली तस्वीर तुम्हारी फीकी सी मुस्कान...

  • ग़ज़ल : मेरी रूह

    ग़ज़ल : मेरी रूह

    मोहब्बत क्यों बुला रही शाम ढल आज़मा रही रात का चाँद हमनवां बादलो में छुपा रही ख्वाहिशों से कहे शमां फासले तो सज़ा रही सर्द आहें कज़ा बनी चांदनी यूँ खफ़ा रही ज़िक्र तेरा वफ़ा कहाँ...