गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – अनजानी राहों पर

ग़ज़ल – अनजानी राहों पर…. अनजानी राहों पर चलना मुश्किल है ।गिरकर फिर से रोज सँभलना मुश्किल है ।। जीत मिले तो तय हो जाते हैं सपने ।लेकिन उगकर फिर से ढलना मुश्किल है । मन तैराक नहीं तो सागर लहरों से ।यूँ टकराकर अभी उछलना मुश्किल है ।। कोशिश कर लो जंग फ़तेह हो […]

मुक्तक/दोहा

दोहे – सखे !

इतनी होती है सखे , तेज कलम में धार । पहुँचा सकती कल्पना , सात समंदर पार ।। रिश्तों में मत खींचना , तुम लम्बी दीवार । वरना दुख देगी सखे , छोटी बड़ी दरार ।। सुननी है तो सुन सखे , आज काम की बात । अपनापन रखना सदा , नहीं मिलेगी मात ।। […]