कविता

सीख लो

चाँदनी रातों पे तो धड़कन भी है गिरवी तपती दुपहरी में बलिदान देना सीख लो सावन का स्वागत सदा करते आए हो अब पतझड़ को भी सम्मान देना सीख लो सोती नदियों में सब नाव चला लेते हैं भड़कते समंदर में नाव खेना सीख लो – नवीन कुमार जैन

कविता

क्या है जीवन

धोखा मिला सहारा मिला डूबते हुए को किनारा मिला हँसना हुआ रोना कभी मिलना हुआ बिछड़े कभी सफलता मिली शून्य मिला हँसे हमेशा हम खिलखिला शिखर भी चढ़े नदी में डूबे उत्साह रहा पर कभी ऊबे खोजा कुछ कभी खोए कहीं रोए कभी हाँ कभी रोए नहीं पत्र मिला कभी तार मिला दुश्मन मिले यार […]

कविता

मंजिल तक पहुँचो

एक दरवाजा बंद हो जाए तुम्हारी कामयाबी का और खिड़की भी न खुले कोई तो यूँ ही कैद न रहो कमरे में या तो तोड़ दो बंद दरवाजा और पहुँचो अपनी मंजिल तक या कर दो छेद दीवारों में लोग तो आसमान में भी सुराख की बात करते हैं अपनी मंजिल तक पहुँचो कैसे भी […]

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तुम

नदी जैसे बहती अपने में रहती वैसे बढ़ो तुम अपने में रहो तुम वृक्ष जैसा अचल है पूर्ण वन में वैसे अपना मन स्थिर करो तुम पक्षी जैसे गाते हैं अपना संगीत वैसे अपनी बात जग में रखो तुम सागर जैसा गंभीर है असीम है वीर गंभीर और चंचल बनो तुम सागर गंभीर चंचलता भी […]

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बढ़ते जाएँगे

भाग्य और पुरुषार्थ का मिल जाए हमें संग       हम बढ़ते ही जाएँगे लेकर मन में नई उमंग ऊर्जावान तरंगों की गति ले कदम बढ़ाएँगे राह के काँटों को हम कुचलते ही जाएँगे राह के पत्थर कब तक हमको गिराएँगे हम गिरकर उठेंगे उठकर बढ़ते ही जाएँगे मंजिल तक पहुँचना ही जो ध्येय […]

कविता

परिवर्तन नियम है

एक जमीन थी हरियाली पशु पक्षियों का बसेरा जीव-जंतुओं का डेरा वहाँ शांति थी सुकून था लोग वहाँ आते थे घूमने देखने सौंदर्य प्रकृति का एक दिन अचानक वहाँ मशीनों से होने लगी खुदाई उस धरती को खोदा जाने लगा जंतुओं के घरों को रोंदा जाने लगा क्योंकि वहाँ फैक्ट्री लगनी थी काम पूरा हुआ […]

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नहीं रही वो बात

अब न वो सुबह होती है न वो वैसी रात होता तो सब है मगर अब नहीं रही वो बात अब न वैसी गर्मी होती है न वैसी बरसात होता तो सब है मगर अब नहीं रही वो बात अब न वैसे लोग मिलते हैं न ही वैसे ख्यालात मिलते तो सब हैं मगर अब […]

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निखार

  जीवन के संघर्षों से लड़कर भी जिनके बाल नहीं बिखरा करते असल जिंदगी में वो व्यक्ति ही निखरा करते लड़ते हुए संकटों से जिनके इरादे तार तार नहीं होते उनके प्रयास बेकार नहीं होते लक्ष्य प्राप्ति हेतु जिनके रक्त की एक-एक बूँद बनकर स्वेद बह जाती है उनके समक्ष विपदाओं की दीवारें भी ढह […]

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बेटी

बेटियों का जीवन कहीं आँगन की तुलसी की तरह होता है जिसे रोज सींचा जाता है पूज्य माना जाता है बेटियों का जीवन कहीं वीरान जगह पर लगे पेड़ की तरह होता है जिसे गर्मी की लपटें ठंडी के थपेड़े मूसलाधार बारिश सब कुछ सहन करना पड़ता है जो बेटियों को आँगन की तुलसी की […]

कविता

आगे बढ़ते जाएंगे

कांटों भरा हो पथ चाहे हम तनिक नहीं घबराएँगे लाँघ मार्ग की बाधाएँ विजय का ध्वज लहराएँगे चलते रहेंगे, बढ़ते रहेंगे, आत्मविश्वास न डिगाएँगे हम वीर,धीर,गंभीर बनेंगे विजयी गान ही गाएँगे पथ की स्वर्णमयी शिलाओं पर हम न समय बिताएँगे नदीं के शीतल जल पर ही न हम आश्रित हो जाएँगे आश्चर्यचकित हो निहार प्रकृति […]