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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कैसे कह दूं हुआ हादसा ही नहीं । दिल जो टूटा अभी तक जुड़ा ही नहीं।। तब्सिरा मत करें मेरे हालात पर । हाले दिल आपको जब पता ही नहीं ।। रात भर बादलों में वो...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    महल टूटा जो ख्वाबों का बड़ा ख़तरा नज़र आया । गुलिस्ताँ जिसको समझा था वही सहरा नजर आया ।। बहुत सहमा है तब से मुल्क फिर खामोश है मंजर। उतरते ही मुखौटा जब तेरा चेहरा नजर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हुई तीरगी की सियासतें उसे बारहा यूँ निहार कर । कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर ।। अभी क्या करेगा तू जान के मेरी ख्वाहिशों का ये फ़लसफा । जरा तिश्नगी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कुछ धुंआ घर के दरीचों से उठा हो जैसे । फिर कोई शख्स रकीबों से जला हो जैसे ।। बादलों में वो छुपाता ही रहा दामन को । रात भर चाँद सितारों से ख़फ़ा हो जैसे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कुछ रंजो गम के दौर से फुर्सत अगर मिले । आना मेरे दयार में मुहलत अगर मिले ।। यूँ हैं तमाम अर्जियां मेरी खुदा के पास । गुज़रे सुकूँ से वक्त भी रहमत अगर मिले ।।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    आँख मुद्दत से मियाँ आप मिलाते भी नहीं । फासले ऐसे मुकर्रर हैं कि जाते भी नहीं ।। मुल्क से बढ़ के सियासत की है कुर्सी यारो । बेच आये हैं वो ईमान बताते भी नहीं...