गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कुछ मुहब्बत कुछ शरारत और कुछ धोका रहा । हर अदा ए इश्क़ का दिल तर्जुमा करता रहा ।। याद है अब तक ज़माने को तेरी रानाइयाँ । मुद्दतों तक शह्र में चलता तेरा चर्चा रहा ।। पूछिए उस से भी साहिब इश्क़ की गहराइयाँ । जो किताबों की तरह पढ़ता कोई चहरा रहा ।। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर इक सू से सदा ए सिसकियाँ अच्छी नहीं लगतीं । सुना है इस वतन को बेटियां अच्छी नहीं लगतीं ।। न जाने कितने क़ातिल घूमते हैं शह्र में तेरे । यहाँ कानून की खामोशियाँ अच्छी नहीं लगतीं ।। सियासत के पतन का देखिये अंजाम भी साहब । दरिन्दों को मिली जो कुर्सियां अच्छी नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सवालों का तो मंजर है अभी तक l कोई मुखिया निरुत्तर है अभी तक ।। उसे इल्जाम का डर है अभी तक । कहीं सच्चा सुख़नवर है अभी तक ।। ग़रीबी और बढ़ती जा रही है । यहाँ आबाद अंतर है अभी तक ।। वहाँ भी देखिए साहब दिवाली । जहां इंसान बेघर है अभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दरिया में उतर आए मियां जुल्म के डर से । पानी न गुज़र जाए कहीं आपके सर से ।। लगता है मेरे गांव में जुमलों का असर है ।। भटके मिले कुछ लोग शराफ़त की डगर से ।। कातिल हुई है भीड़ यहां मुद्दतों के बाद । निकलो न अकेले ही कहीं रात में घर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कीजिये मत अभी रोशनी मुख़्तसर ।। आदमी कर न ले जिंदगी मुख़्तसर । इश्क़ में आपको ठोकरें क्या लगीं । दफ़अतन हो गयी बेख़ुदी मुख़्तसर ।। नौजवां भूख से टूटता सा मिला । देखिए हो गयी आशिक़ी मुख़्तसर ।। गलतियां बारहा कर वो कहने लगे । क्यूँ हुई मुल्क़ में नौकरी मुख़्तसर ।। कैसे कह […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अब न चहरे की शिकन कर दे उजागर आइना । देखता रहता है कोई छुप छुपा कर आइना ।। गिर गया ईमान उसका खो गये सारे उसूल । क्या दिखायेगा उसे अब और कमतर आइना ।। सच बताने पर सजाए मौत की ख़ातिर यहां । पत्थरो से तोड़ते हैं लोग अक्सर आइना । आसमां छूने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – फासले बेकरार करते हैं

फासले    बेकरार    करते   हैं । और   हम   इतंजार   करते   हैं ।। इक तबस्सुम को लोग जाने क्यूँ । क़ातिलों  में   शुमार   करते   हैं ।। सिर्फ धोखा मिला ज़माने से । जब भी हम ऐतबार करते हैं ।। मैं तो इज्ज़त बचा के चलता हूँ । और वह तार तार करते हैं ।। उनको […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बादल का अंदाज जुदा सा लगता है । सावन सारा सूखा सूखा लगता है ।। जाने क्यूँ मरते हैं उस पर दीवाने । इश्क़ उसे जब खेल तमाशा लगता है ।। काहकशाँ से टूटा जो इक तारा तो । चाँद का चेहरा उतरा उतरा लगता है ।। तेरी अना से टूट रहा है वह रिश्ता […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

गुज़री है मेरे दिल पर क्या क्या अब हिज्र का आलम पूछ रहे ।। मालूम तुम्हें जब गम है मेरा क्यूँ आंखों का पुरनम पूछ रहे ।।1 इक आग लगी है जब दिल में चहरे पे अजब सी बेचैनी । इकरारे मुहब्बत क्या होगी ये बात वो पैहम पूछ रहे ।।2 कुछ फ़र्ज़ अता कर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वो मक़तल में कैसी फ़ज़ा माँगते हैं ।। जो क़ातिल से उसकी अदा माँगते हैं ।। जुनूने शलभ की हिमाकत तो देखो । चरागों से अपनी क़ज़ा माँगते हैं।। उन्हें भी मिला रब सुना कुफ्र में है । जो अक्सर खुदा से जफ़ा माँगते हैं ।। असर हो रहा क्या जमाने का उन पर । […]