गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये किस सांचे में ढाला जा रहा है । मेरे हक़ का निवाला जा रहा है ।। मुनाफ़ा जिनसे हासिल था उन्हीं का । निकाला अब दिवाला जा रहा है । अज़ब है ये तुम्हारी मीडिया भी । हमेशा सच को टाला जा रहा है ।। वतन को डस लिया वो सर्प देखो । जिसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सैलाब कोई आंखों के पानी में आएगा । जब मेरा ज़िक्र उसकी कहानी में आएगा ।। यूँ रोकिए न धार मुहब्बत की है नदी । दरिया को लुत्फ़ उसकी रवानी में आएगा ।। ऊला को पढ़ के ख़ुद को तसल्ली न दीजिये । हर दर्द मेरे शेर के सानी में आएगा ।। सँभलेगा कैसे दिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

तू बता उल्फ़त की दिल्ली दूर है क्या

2122 2122 2122 अपनी रानाई पे तू मग़रूर है क्या । बेवफ़ाई के लिए मज़बूर है क्या ।। कम न हो पाये अभी तक फ़ासले भी ।। तू बता उल्फ़त की दिल्ली दूर है क्या ।। दूर तक चर्चा है क़ातिल के हुनर की । वो ज़रा सी उम्र में मशहूर है क्या ।। तोड़ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

221 1221 1221 122 कुछ वक्त मेरे साथ बिताने के लिए आ। तू शमअ सरे बज़्म जलाने के लिए आ ।। दिल पर किसी के राज चलाने के लिए आ । ऐ दोस्त नई मंजिलें पाने के लिए आ।। यूँ छुप छुपा के देख रहा है तुझे ये कौन । शर्मो हया का पर्दा हटाने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 दिल सलामत भी नहीं और ये टूटा भी नहीं । दर्द बढ़ता ही गया ज़ख़्म कहीं था भी नहीं ।। काश वो साथ किसी का तो निभाया होता । क्या भरोसा करें जो शख़्स किसी का भी नहीं ।। क़त्ल का कैसा है अंदाज़ ये क़ातिल जाने । कोई दहशत भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेचैनियों का दौर बढा कर चली गयी । महफ़िल में वो बहार जब आ कर चली गयी ।। उसकी मुहब्बतों का ये अंदाज़ था नया । अल्फ़ाज़ दर्दो ग़म के छुपाकर चली गयी।। उसको कहो न बेवफ़ा जो मुश्क़िलात में । कुछ दूर मेरा साथ निभाकर चली गयी ।। साक़ी भुला सका न उसे चाहकर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ग़ज़ल 1222 1222 1222 122 करेगा दम्भ का यह काल भी अवसान किंचित । करें मत आप सत्ता का कहीं अभिमान किंचित ।। क्षुधा की अग्नि से जलते उदर की वेदना का । कदाचित ले रहा होता कोई संज्ञान किंचित ।। जलधि के उर में देखो अनगिनत ज्वाला मुखी हैं। असम्भव है अभी से ज्वार […]

गीतिका/ग़ज़ल

जो दिल तुझसे वो तेरा मांगता है

1222 1222 122 निगाहों से हुई कोई ख़ता है । जो दिल तुझसे वो तेरा मांगता है ।। रवानी जिस मे होती है समंदर । उसी दरिया से रिश्ता जोड़ता है ।। हमारी ज़िन्दगी को रफ्ता रफ्ता । कोई सांचे में अपने ढालता है ।। तुम्हारे हुस्न के दीदार ख़ातिर । यहाँ शब भर ज़माना […]

गीतिका/ग़ज़ल

ख्वाहिशों की बेबसी है जिंदगी

2122 2122 212 जाने कैसी तिश्नगी है ज़िंदगी । ख्वाहिशों की बेबसी है जिंदगी ।। हर तरफ़ मजबूरियों का दौर है । ज़ह्र कितना पी रही है जिंदगी ।। फ़िक्र किसको है सियासत तू बता । भूख से दम तोड़ती है जिंदगी ।। दर्दो ग़म मत पूछिए मेरा सनम । बेवफ़ा सी हो गयी है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – नारे जहाँ लगे थे कभी इंकलाब के

सब लोग मुन्तज़िर है वहाँ माहताब के । चेहरे पढ़े गए हैं जहाँ इज्तिराब के ।। छुपता कहाँ है इश्क़ छुपाने के बाद भी । होने लगे हैं शह्र में चर्चे ज़नाब के ।। दौलत के नाम पर वही भटके मिले सुनो किस्से सुना रहे थे जो मुझको सराब के ।। बदला ज़माना है या […]