कविता

सांस्कृतिक मूल्य

सांस्कृतिक मूल्य गर्व करें हम मूल्यों पर अपने, नमन करें हम मूल्यों को अपने। मानव धर्म का ज्ञान कराएं, मूल्य हमें इंसान बनाएं। नैतिकता का पाठ पढ़ाएं, मूल्य हमें सन्मार्ग दिखाएं। भौतिक विकास का सोपान चढ़ाएं, दिल में हमारे आध्यात्म जगाएं। व्यक्तित्व हमारा सुंदर बनाएं, मूल्य हमें संस्कारी बनाएं। ईर्ष्या द्वेष से हमको बचाकर, श्रृद्धा […]

लेख सामाजिक

बलात्कार एक जघन्य अपराध, कैसे लगे अंकुश?

  नवनीत शुक्ल(शिक्षक) यदि किसी संस्कृति को समझना है तो सबसे जरुरी है कि हम उस संस्कृति की महिलाओं के बारे में जानें, उनके हालात और परिस्थितियों को समझने की कोशिश करें क्योंकि महिलाएं समाज के वास्तविक चेहरे का दर्पण होती हैं। भारतीय समाज के बारे में देखा जाये तो हम पाते हैं कि महिलाएं […]

लेख स्वास्थ्य

औषधीय गुणों से भरपूर मूली

*औषधीय गुणों से भरपूर मूली* नवनीत शुक्ल(शिक्षक एवं पूर्व कृषि शोध छात्र, इ० वि० इ०) प्रकृति ने हमें विभिन्न प्रकार के फल-फूल, सब्जियाँ एवं कंदमूल प्रदान किये हैं, इन्हीं में से पौष्टिक तत्वों से भरपूर मूली भी एक सब्जी है जो सम्पूर्ण भारतवर्ष में बहुतायत मात्रा में उगायी जाती है जिससे सभी आमजन परिचित हैं, […]

बाल कविता

पंक्षी

  सुबह उड़ते-उड़ते पंक्षी बोले, प्यारे बच्चों क्या हाल-चाल हैं। सुबह से तुम लिखते रहते हो, सचमुच सब बच्चे कमाल हैं।। बच्चों कुछ लिखो हमारे बारे में भी, हम कठिन दौर से गुजर रहे हैं। हमकों खाना कहाँ मिलेगा अब, धरा पर मानव जंगल काट रहे हैं।। तोता मैना चिड़िया कोयल सारे, इसी सोंच में […]

कविता

हिन्दी

हिन्दी जब सहज भाव से बहती, हिंदोस्ताँ की संस्कृति संग में चलती। सभ्यता संस्कृति की प्रतीक है, सरल अभिव्यक्ति की संगीत है। एकता का पाठ हमें पढ़ाती है, एक सूत्र में राष्ट्र को बांधती है। हिन्दी है मृदु भावों का सागर, भरी है इसमें अपनत्व की गागर। आधुनिक युग के इस दौर में, खो रही […]

लेख

सूखा और मरुस्थलीकरण एक गंभीर समस्या

                ‘नवनीत शुक्ल’  उपजाऊ जमीन का खराब होकर बंजर हो जाने की प्रक्रिया मरुस्थलीकरण कहलाती है, जिसमें जलवायु परिवर्तन तथा मानवीय गतिविधियों समेत अन्य कई कारणों से शुष्क,अर्द्ध-शुष्क और निर्जल अर्द्ध-नम इलाकों की जमीन रेगिस्तान में बदल जाती है, फलस्वरूप जमीन की उत्पादन क्षमता में भारी कमी हो […]

कविता

आओ योग करें

आओ योग करें हम सब, तन-मन को शुद्ध बनायें। स्वस्थ हो सारी मानवता, जन जागरूकता फैलायें।। आदिकाल की थी परम्परा, स्वस्थ रहो कर प्राणायाम। सुबह का हो पहला काम, योग, साधना और व्यायाम।। भांति-भांति के हैं योगासन, भिन्न-भिन्न हैं इनके नाम। शरीर के हर एक हिस्से को, मिलता इससे बहुत आराम।। आओ सब मिलकर लें […]

कविता

गुरुवर

मन है आज मेरा बहुत हर्षित पुलकित, गुरु के चरणों में है पुष्प श्रद्धा के अर्पित। शिक्षक दिवस है पर्व पावन सुनहरा, गुरु-शिष्य का रिश्ता है सबसे गहरा। आपसे ही महकता है यह सारा संसार, गुरुवर आप ही हैं इस सृष्टि के आधार। हे प्रिय ! गुरुवर आपके उपदेश और वचन, करते हैं सारे जग […]

बाल कविता

बालकविता – क्रिकेट

चिंटू यह बोला मिंटू से आओ खेलें क्रिकेट, सबका प्यारा यह खेल निराला गिरेगा विकेट। छोटी सी थी गेंद और था खूब बड़ा सा बल्ला, खेल शुरू हुआ जब मैदान में मच गया हल्ला। चिंटू ने मारा जोरदार शाट लग गया छक्का, बैटिंग देख हैरान मिंटू हो गया हक्का बक्का। चिंटू की देख बैटिंग मिंटू […]

कविता

प्यारा भारत

प्यारा भारत देश हमारा, मैं इसकी संतान हूँ। देश सेवा की खातिर मैं, हर पल कुर्बान हूँ।। यहाँ गंगा, यमुना, सरस्वती, पर्वत राज विराट है। आयोध्या में प्रभु चरणों को, धोता सरयू घाट है।। यह धरा है राम- कृष्ण की, जन्मे हैं कई वीर महान। इसी कारण से भारत की है, विश्व में अलग पहचान।। […]