गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़िन्दगी इतनी उदास क्यूं है भटकती हुई-सी आस क्यूं है । सब कुछ है दिखावटी,नकली, खोखला इस कदर हास क्यूं है । दूर-दूर तक है फैली खामोशी, ग़मगीन हर दिवस,मास क्यूं है । शंका के बादल छाये गगन पर, सिसकता यहां विश्वास क्यूं है । कितने हैं ज़िन्दा,कहना कठिन, चलती-फिरती हर लाश क्यूं है । […]

मुक्तक/दोहा

दोहे – बेटी

बेटी तो कोमल कली ,बेटी तो  तलवार ! बेटी सचमुच धैर्य है,बेटी तो अंगार !! बेटी है संवेदना,बेटी है आवेश ! बेटी तो है लौह सम,बेटी भावावेश !! बेटी कर्मठता लिये,रचे नवल अध्याय ! बेटी चोखे सार का,है हरदम अभिप्राय !! बेटी में करुणा बसी,बेटी में है धर्म ! बेटी नित मां-बाप प्रति,करती पूरा कर्म […]

मुक्तक/दोहा

मंचीय शुचिता

काव्य-गीत के मंच को , जिसने किया अशुध्द । उसको ना विद्या मिले, रहें सरस्वती क्रुध्द ।। फूहड़ता अब छोड़ दो, ये कवियो दो ध्यान । वरना तो हो जायगी, कविता अन्तर्ध्यान ।। नहीं लतीफे और अब, सुनो छिछोरेबाज़। कर लो मिल सारे जतन, जगमग करो समाज ।। पैसे ने शुचिता हरी, कविवर हैं अब […]

मुक्तक/दोहा

हक़ीक़त

नहीं शेष संवेदना,रोते हैं सब भाव ! अपने ही देने लगे,अब तो खुलकर घाव !! स्वारथ का बाज़ार है,अपनापन व्यापार ! रिश्ते रिसने लग गये,खोकर सारा सार ! नित ही बढ़ती जा रही,अब तो देखो पीर ! अपनों के नित वार हैं,बरछी-भाला-तीर !! हर कोई ख़ुद में लगा,होकर बेपरवाह । दर्द,व्यथा,ग़म,वेदना,देख निकलतीआह ।। जीवन मुरझाने […]

कुण्डली/छंद

जनता को नमन्

जनता को मेरा नमन, रच डाला इतिहास मोदी को चुनकर पली, हर दिल में नवआस हर दिल में नव आस, भरोसा है अब दूना मोदी जिसने दुश्मन को घर घुसकर भूना यह ‘नीलम’ की बात, कर्म से ही घर बनता मोदी हैं बलवान समझती है सब जनता।  — डॉ. नीलम खरे

भजन/भावगीत

सरस्वती-वंदना

मातु शारदे,नमन् कर रहा,तेरा नित अभिनंदन है ! ज्ञान की देवी,हंसवाहिनी,तू माथे का चंदन है !! अक्षर जन्मा है तुझसे ही, तुझसे ही सुर बिखरे हैं वाणी तूने ही दी सबको, चेतन-जड़ सब निखरे हैं दे विवेक और नवल चेतना,तेरा तो अभिवंदन है ! ज्ञान की देवी,हंसवाहिनी,तू माथे का चंदन है !! कर दे तीक्ष्ण […]

कविता

अटल जी के प्रति – मेरी बात

(1) नहीं रहे हैं श्री अटल, जो थे सच्चे लाल पांच दशक करते रहे, सचमुच ” नील” कमाल प्रतिभा अद्भुत ले बढ़े, वे मंज़िल की ओर आगे बढ़ते ही गये, लिये लगन का ज़ोर (2) कविता है खामोश अब, कलप रहे हैं गीत हमें छोड़कर के गया, सबके मन का मीत अटलबिहारी जी गये, पर जीवित हर हाल कालजयी व्यक्तित्व का, क्या कर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका : चूड़ियों के विविध रंग

अभिसार में किसी के खनकती हैं चूड़ियाँ । परिणय की सेज पर तो महकती हैं चूड़ियाँ ।। जिनके कई हैं रंग, और रूप भी कई, प्रियतम नहीं हैं पास, बिलखती हैं चूड़ियाँ । आये बलम विदेश से तो खिल उठे अधर, तो तोड़ सारे बंध, मचलती हैं चूड़ियाँ । जब रात में नयन से नींद […]

कविता

कविता : चूड़ियाँ

अभिसार में किसी के खनकती हैं चूड़ियाँ । परिणय की सेज पर तो महकती हैं चूड़ियाँ ।। जिनके कई हैं रंग, और रूप भी कई, प्रियतम नहीं हैं पास, बिलखती हैं चूड़ियाँ । आये बलम विदेश से तो खिल उठे अधर, तो तोड़ सारे बंध, मचलती हैं चूड़ियाँ । जब रात में नयन से नींद […]