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  • दोहे – बेटी

    दोहे – बेटी

    बेटी तो कोमल कली ,बेटी तो  तलवार ! बेटी सचमुच धैर्य है,बेटी तो अंगार !! बेटी है संवेदना,बेटी है आवेश ! बेटी तो है लौह सम,बेटी भावावेश !! बेटी कर्मठता लिये,रचे नवल अध्याय ! बेटी चोखे...

  • मंचीय शुचिता

    मंचीय शुचिता

    काव्य-गीत के मंच को , जिसने किया अशुध्द । उसको ना विद्या मिले, रहें सरस्वती क्रुध्द ।। फूहड़ता अब छोड़ दो, ये कवियो दो ध्यान । वरना तो हो जायगी, कविता अन्तर्ध्यान ।। नहीं लतीफे और...

  • हक़ीक़त

    हक़ीक़त

    नहीं शेष संवेदना,रोते हैं सब भाव ! अपने ही देने लगे,अब तो खुलकर घाव !! स्वारथ का बाज़ार है,अपनापन व्यापार ! रिश्ते रिसने लग गये,खोकर सारा सार ! नित ही बढ़ती जा रही,अब तो देखो पीर...

  • जनता को नमन्

    जनता को नमन्

    जनता को मेरा नमन, रच डाला इतिहास मोदी को चुनकर पली, हर दिल में नवआस हर दिल में नव आस, भरोसा है अब दूना मोदी जिसने दुश्मन को घर घुसकर भूना यह ‘नीलम’ की बात, कर्म...

  • सरस्वती-वंदना

    सरस्वती-वंदना

    मातु शारदे,नमन् कर रहा,तेरा नित अभिनंदन है ! ज्ञान की देवी,हंसवाहिनी,तू माथे का चंदन है !! अक्षर जन्मा है तुझसे ही, तुझसे ही सुर बिखरे हैं वाणी तूने ही दी सबको, चेतन-जड़ सब निखरे हैं दे...

  • अटल जी के प्रति – मेरी बात

    अटल जी के प्रति – मेरी बात

    (1) नहीं रहे हैं श्री अटल, जो थे सच्चे लाल पांच दशक करते रहे, सचमुच ” नील” कमाल प्रतिभा अद्भुत ले बढ़े, वे मंज़िल की ओर आगे बढ़ते ही गये, लिये लगन का ज़ोर (2) कविता है खामोश अब, कलप रहे...


  • कविता : चूड़ियाँ

    कविता : चूड़ियाँ

    अभिसार में किसी के खनकती हैं चूड़ियाँ । परिणय की सेज पर तो महकती हैं चूड़ियाँ ।। जिनके कई हैं रंग, और रूप भी कई, प्रियतम नहीं हैं पास, बिलखती हैं चूड़ियाँ । आये बलम विदेश...