गीतिका/ग़ज़ल

ये सोने के हिरण

बनाकर वेश साधू का कई रावण निकलते हैं , ये सोने के हिरण सीता को त्रेता युग से छलते हैं । नही चाहत रही अब धर्म के ग्रंथों को पढ़ने की सुना है होम करने से भी अपने हाथ जलते हैं । गले मिलते हुए देखा है उनको ख़ूब उल्फ़त से , मगर मौक़ा मिले […]

मुक्तक/दोहा

छठ पूजा

विधा- दोहा विषय – छठ पूजा लोकपर्व की धूम है , छठ पूजा है आज । गंगा जी के घाट पर , उमड़ा भक्त समाज ।। कातिक सुदी सुहावनी,डाला छठ की शाम । अर्घ्य दे रहे सूर्य को , करते सभी प्रणाम ।। सबके मन में है यही , छठ मैया से आस । सुख […]

कुण्डली/छंद

करवाचौथ (हरिगीतिका छंदमें )

चंदा चमकता है गगन में , प्रेम पर बलिहार है । करवा लिये बैठी सुहागिन कर रही मनुहार है ।। बेंदी सजी माथे चमकती , सोलहों सिंगार है ।। अहिवात उसका हो अचल , करती विनय हर बार है ।।। निर्जल रखा है व्रत मिले , दैवी कृपा सौभाग्य हो । मन में यही है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – भादो की अष्टमी

भादो की अष्टमी खुशी की बात हो गयी , कान्हा के अवतरण की हँसी रात हो गयी । कृष्णा ने देवकी को वो जल्वा दिखा दिया , वसुदेव की किशन से मुलाक़ात हो गयी । सब पहरुवे भी सो गये जादू सा चल गया जमुना के जल मे प्रेम की बरसात हो गयी माता जसोदा […]

गीत/नवगीत

रंग उड़े

विधा-गीत शीर्षक – रंग उड़े रंग उड़े रंग उड़े —— रंग उड़े आसमां में हर तरफ बहार है , हर तरफ ख़ुमार है होली का त्योहार है । फूल खिले बाग़ों में मधुबन गुलज़ार है , चूम रहा कलियों को भँवरा दिलदार है । रंग उड़े रंग उड़े ——– गोरे – गोरे पाँवों में पायलिया […]

गीत/नवगीत

इज्जत

लाख करो टुकड़े सोने के उसकी क़ीमत उतनी है , नारी की होती इज़्ज़त जिस घर में उसकी क़ीमत दुगनी है । लाख करो —– पावन बन जाती जलधारा जो गंगा में मिलती है , सत्य मार्ग के अनुगामी मानव को इज़्ज़त मिलती है । मात- पिता का भक्त श्रवण था उसकी महिमा जितनी है […]

गीत/नवगीत

सत्ता की तक़दीर तुम्हारे हाथों में

सत्ता की तक़दीर तुम्हारे हाथो में , लोकतन्त्र की डोर तुम्हारे हाथों मे । आया है त्योहार चुनावी मौसम फिर , चुनो भली सरकार तुम्हारे हाथों मे। पाँच साल में आता है ये मौक़ा फिर , ज़िम्मेदारी बड़ी करो मतदान सभी। शातिर ख़ूनी कत्ली को तुम मत चुनना , देश की रक्षा भार तुम्हारे हाथों […]

मुक्तक/दोहा

नारी पर दोहे

नारी पर दोहे — दुष्ट चक्षुओं से बचने को ,परदा करती नारि। नारी सुलभ संकोच ही , काफी इसे सँभारि।। परदा कर लेवे लाख पर , रक्षित न होती नारि । अन्तरचरित शक्तिबल से ही ,रक्षा पाती है नारि ।। सदाचरण का बल जहाँ ,घूँघट का क्या काम । कपड़े की दीवार क्या ,रोके है […]

कविता

मैं बेटी हूँ

मैं बेटी हूँ , मैं दुहिता हूँ , मैं इस दुनिया में आयी हूँ , मै हूँ रचना परमेश्वर की मैं प्यार प्रीत बन आई हूँ । मैं हूँ मान्या , मैं हूँ कन्या , उषा की किरण सरीखी हूं , आह्वान करो मेरा मन से मैं ज्योतिर्मय बन आयी हूँ । मैं हूँ सुगन्ध, […]

कविता

जगमग- जगमग आई दीवाली

कितना फैला घनघोर अंधेरा रात अमावस की है काली दीपों के परिधान पहन कर जगमग जगमग आई दीवाली अवधपति श्री राम चन्द्र का , स्वागत करती नगरी सारी । घर -घर में है दीपमालिका , द्वार -द्वार जगमग उजियारी। सत्य की जीत हमेशा होती , ज्ञान का दीप हरे अँधियारी । रावण रूप है घोर […]